Wednesday, 9 December 2015

शहीद भगत सिंह के नाम पर नहीं रखा जाएगा चंडीगढ़ एयरपोर्ट का नाम !


हरियाणा ने की डा मंगल सैन के नाम की मांग
चंडीगढ़ 9 दिसंबर : जय सिंह छिब्बर
दो राज्यों की राजधानी चंडीगढ़ स्थित एयरपोर्ट के नाम को लेकर पंजाब व हरियाणा एक बार फिर आमने सामने हो गये है। जबकि यूटी प्रशासन इसका नाम चंडीगढ़ एयरपोर्ट रखना चाहता है। हरियाणा सरकार ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर चंडीगढ़ एयरपोर्ट का नाम डा मंगलसैन इंटरनैशनल एयरपोर्ट रखने की मांग की है। जबकि पंजाब सरकार पहले ही शहीद भगत सिंह के नाम पर शहीद भगत सिंह एयरपोर्ट रखने की मांग कर चुका है,बकायदा पंजाब सरकार ने विधान सभा में प्रस्ताव भी पारित कर रखा है। प्रधान मंत्री नरिंदर मोदी द्वारा एयरपोर्ट के नये टर्नीमल का उदघाटन करने के मौके पर पंजाब सरकार एयरपोर्ट को मोहाली का एयरपोर्ट बताती रही है और इसका नाम शहीद भगत सिंह के नाम पर रखने की बात करती रही है। किन्तु ऐसा अभी तक हो नहीं सका।
मिली जानकारी के अनुसार मनोहर लाल खट्टर सरकार ने डा मंगल सैन के नाम पर एयरपोर्ट का नाम पर रखने की मांग को लेकर केंद्र सरकार को पत्र लिखा है। जहां डा मंगलसैन 1977-79 के बीच हरियाणा के सीएम रहे है वही वे आरएसएस के प्रचारक रहे है। दो राज्यों के बीच नाम को लेकर चल रही कशमकश कारण केंद्र सरकार भी एयरपोर्ट का नाम बदलने को लेकर असमंसज में है। सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार शहीद भगत सिंह के नाम पर एयरपोर्ट का नाम हरगिज नहीं रखना चाहती। जबकि मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की ओर से केंद्र सरकार को शहीद भगत सिंह के नाम पर एयरपोर्ट का नाम रखने के लिये कई बार पत्र लिख चुके है परन्तु केंद्र इस पर कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहा।
उड्डयन विभाग के प्रमुख सचिव डा महावीर ने संपर्क करने पर कोई जानकारी देने से मना कर दिया है। डा महावीर ने तर्क दिया कि उन्होंने कुछ दिन पहले ही ज्वाइन किया है इसलिये वह फिलहाल कुछ नहीं कह सकते। उनका कहना है कि नाम रखने या बदलने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है।
सबसे अहम बात यह है कि शहीद भगत सिंह क्रांतिकारी है और देश के आजादी संग्राम में उनकी अहम भूमिका रही है। दिलचस्प बात यह भी है कि केंद्र में अकाली दल की भाईवाल भाजपा की सरकार है। अगर ऐसे मौके पर केंद्र पंजाब सरकार की डिमांड को अनदेखा करेगा तो इससे लोगों में यही मैसेज जाएगा कि प्रधान मंत्री नरिंदर मोदी पंजाब सरकार खासकर अकाली दल को कोई खास अहमीयत नहीं दे रहा है। यह आने वाला समय ही बताएगा कि केंद्र एयरपोर्ट का नाम बदलेगी या फिर चंडीगढ़ एयरपोर्ट के रूप में ही इसका नाम चलता रहेगा।

Wednesday, 18 November 2015

अगर लेनी है सरकारी नौकरी तो खुले में शौच नहीं जाना होगा


अगर लेनी है सरकारी नौकरी तो खुले में शौच नहीं जाना होगा
चंडीगढ़ 18 नवंबर : जय सिंह छिब्बर
पंचायत चुनावों में शिक्षा व शौचालय अनिवार्य करने के फैसले को लेकर भले ही हरियाणा सरकार सुप्रीम कोर्ट में केस का सामना कर रही है। किन्तु अब सरकार ने सरकारी नौकरी में आवेदन करने वालों के लिये घरों में शौचालय होने की शर्त लगा दी है। हरियाणा सरकार ने फैसला किया है कि जो खुले में शौच करेगा सरकार उसे नौकरी नहीं देगी। जानकारी के अनुसार डीडीआरए कुरूक्षेत्र की ओर से कई समाचार पत्रों में नौकरी के लिये विज्ञाुन दिया गया है। जिसमें नौकरी पाने के लिये साफ सफाई का जिक्र करते हुए ब्लाक कोआर्डीनेटर व क्लस्टर मोटिवेट्र्स इत्यादि आसामी पर आवेदन करने के लिये सरकार ने यह शर्त रखी है कि आवेदन करने वाला खुले में शौच न करता हो। यानी हरियाणा सरकार ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की स्वच्छ भारत अभियान को पूरी तरह लागू करते हुए यह फैसला किया है। एक अधिकारी ने अपना नाम न प्रकाशित करने शर्त पर बताया कि आवेदन करने वाले को यह लिखकर देना होगा कि वह घर में व्यवस्थित ढंग से रहते है और घर व बाहर शौचालय का प्रयोग करते है। सीधे रूप में व्यक्ति खुले में शौच नहीं जाता यह लिखकर देना होगा।
सरकार का यह फैसला कितना लाभदायक होगा यह तो आने वाला समय बताएगा फिलहाल सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन को सरकारी नौकरी के लिये भी लागू कर दिया है। पंचायत चुनाव लडऩे के इच्छुक व्यक्तियों के लिये लगाई गई शुशर्त का मामला पहले ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। भविष्य में यह मुद्दा भी कानूनी रूप लेगा यह भी देखने वाली बात होगी। 

Wednesday, 14 October 2015

38 विदेशी कैदियों को सजा पूरी करने के बावजूद रिहाई का इंतजार --


पंजाब व हरियाणा की जेलों में 200 के करीब मनोरोगी कैदी भी बंद
चंडीगढ़ 14 अक्तूबर : जय सिंह छिब्बर
एक तरफ पंजाब में कुछ सिख संगठन सजा पूरी काट चुके कैदियों की रिहाई की मांग कर रहे है और सरकार खासकरके पंजाब पुलिस जेलों में सजा पूरी कर चुके किसी भी कैदी के ना होने की बात करती रही है। परन्तु सजा पूरी होने के बावजूद जेल काट रहे कैदियों को लेकर हाईकोर्ट द्वारा लिए गए स्वयं संज्ञान मामले में मंगलवार को पंजाब सरकार ने जवाब दाखिल कर बताया कि अमृतसर जेल में 38 ऐसे कैदी हैं जिनकी सजा पूरी होने के बावजूद उन्हें रिहा नहीं किया जा सका है। हैरानीजनक बात यह है कि इनमें 19 कैदी मानसिक रोगी भी है। पंजाब सरकार ने बताया कि इन कैदियों के विदेशी होने के चलते इन्हें रिहा नहीं किया जा सकता। इनको डिपोर्ट करने के लिए केंद्र सरकार को कई बार लिखा गया परंतु अभी तक इन्हें डिपोर्ट नहीं किया गया है। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार के इस जवाब को रिकार्ड पर लेते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
मामले में हलफनामा दाखिल कर पंजाब सरकार ने बताया कि जेल के ट्रांजिट कैंप में मौजूद ऐसे कैदी भी हैं जिन्हें पंजाब सरकार चाहकर भी रिहा नहीं कर सकती। इन कैदियों को रिहा न कर पाने का सबसे बड़ा कारण इनका विदेशी मूल का होना है। इस कारण इन कैदियों को रिहा कर छोड़ा नहीं जा सकता क्योंकि नियमों के अनुसार इन्हें डिपोर्ट किया जाना है। इन कैदियों को डिपोर्ट करने का अधिकार व जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है। पंजाब सरकार ने बताया कि इन सभी कैदियों ने अपनी सजा पूरी कर ली है और अब ये अमृतसर की जेल में स्थित ट्रांजिट कैंप में मौजूद हैं। इन कैदियों के बारे में जानकारी देते हुए पंजाब सरकार ने बताया कि 38 कैदियों में से 19 ऐसे हैं जो मानसिक रूप से बीमार हैं। इन कैदियों को उपचार तो मुहैया करवाया जा रहा है लेकिन यहां पर केंद्र सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि इन कैदियों की वतन वापिसी का रास्ता साफ किया जाए। पंजाब सरकार ने इसके लिए केंद्र सरकार को कई बार लिखा परंतु अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए जिसके चलते वतन वापसी का इंतजार कर रहे कैदी अपना जीवन ट्रांजिट कैंप में गुजारने को मजबूर हैं। हाईकोर्ट ने इस पर कड़ा रवैया अपनाते हुए केंद्र सरकार को फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के निर्देश भी दिए। अभी तक केंद्र सरकार इस मामले में प्रतिवादी नहीं थी। मंगलवार को कोर्ट के आदेशों पर केंद्र सरकार को प्रतिवादी सूची में शामिल किया गया।
--हरियाणा और पंजाब की जेलों में करीब 200 मनोरोगी कैदी
जेल में मनोरोगी कैदियों का रिकार्ड देते हुए हरियाणा और पंजाब सरकार ने हलफनामा दाखिल किया। पंजाब सरकार ने बताया कि पंजाब की जेलों में 74 ऐसे कैदी हैं जो मनोरोगी हैं वहीं हरियाणा सरकार ने अपने हलफनामे में मनोरोगियों की सं या 100 से अधिक बताई। हरियाणा व पंजाब सरकार ने बताया कि सरकार जेल में कैद मनोरोगियों को उपचार मुहैया करवा रही है। दोनों के हलफनामे को रिकार्ड पर लेते हुए हाईकोर्ट ने आदेश जारी कर कहा कि हरियाणा व पंजाब सरकार बताए कि इन कैदियों को रखने के लिए अगल से बैरिक व अन्य क्या व्यवस्थाएं की गई है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई गाईड लाईन के अनुसार जिन लोगों को उम्रकैद की सजा काट रहे कैदियों पर सुप्रीम कोर्ट के ओदशों के अनुरूप सरकार की क्या राय है। जिन मामले मे प्री मिच्योर रिलीज का लाभ दिया जा सकता है उन कैदियों को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का लाभ दिया जा सकता है उनकी रिहाई पर राज्य सरकार की क्या राय है। सुप्रीम कोर्ट ने 23 जुलाई के आदेशों में कहा था कि सी.बी.आई. जांच के बाद मिली सजा व सेंट्रल ला के मामलों में सजा प्राप्त करने वालों के अलावा अन्य कैदियों की सजा को राज्य माफ कर सकता है।

Friday, 31 July 2015

कोर्ट का समय बरबाद करने पर याचि को दो लाख रुपये हरजाना

हाईकोर्ट का याचिकाकर्ता को बड़ा झटका
कोर्ट का समय बरबाद करने पर याचि को दो लाख रुपये हरजाना
याची ने सुखबीर बादल खिलाफ दायर कर रखी थी याचिकाएं
कोर्ट के 440 घंटे बरबाद करने का आरोप
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल सहित अन्य उच्चाधिकारियों के खिलाफ करीब ढाई सौ याचिकाएं डालकर कोर्ट का समय बरबाद करने के आरोप में याचिकाकर्ता नरेश सहगल को दो लाख रुपये कास्ट डाली है। इसके तहत हाईकोर्ट ने रजिस्टरी शाखा को भविष्य में याचिकाकर्ता की ऐसी याचिका को न मंजूर करने के निर्देश जारी किये है। हाईकोर्ट ने याचि खिलाफ कड़ा रूख अपनाते हुए फरीदकोट के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट को निर्देश दिये है कि यदि याची नरेश सहगल दो माह के भीतर उक्त राशि का भुगतान नहीं करता तो उनके खिलाफ कड़ी कारवाई की जाए। जानकारी अनुसार याची नरेश सहगल ने हाईकोर्ट में झूठी जानकारी देने के साथ साथ कुछ जानकारी को छिपाकर भी रखा है।
हाईकोर्ट के मुताबिक याची ने कोर्ट के करीबन 440 घंटे बरबाद किये है और साल 2003 से अब तक करीब 250 याचिकाएं दायर की है। यह समय कोर्ट किसी अन्य याचिकाओं के फैसले के लिये लगा सकता था। लेकिन नरेश सहगल ने अपनी पब्लिसिटी के लिये कोर्ट का समय बरबाद किया है।
कोर्ट में मंजूर नरेश सहगल ने माफी मांगी जिसके चलते कोर्ट ने उन्हें जेल भेजने तथा आपराधिक कारवाई को अमल में नहीं लाया परन्तु सबक सिखाने के लिये उसे दो लाख रुपये  कास्ट जरूर डाल दी है ताकि लोगों को कोर्ट का समय बरबाद करने पर उनके खिलाफ कैसा व्यवहार किया जाएगा का पता चल सकेे।
बता दें कि नरेश सहगल ने उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल के खिलाफ गलत जानकारी देकर उकना चुनाव रद्द करने,केस दर्ज करने,पास्पोर्ट जब्त करने इत्यादि याचिकाएं डाल रखी थी।
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Tuesday, 21 July 2015

डीपीआई सेकेंडरी ने हाईकोर्ट में मांगी माफी




लेक्चरार पद पर नियुक्ति को लेकर रिश्वत मांगने का मामला
6 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
 पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में लंबित एक मामलें को सुलझाने के लिये डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन के दो मुलाजिमों द्वारा एक महिला लेकचरार से रिश्वत मांगने के मामलें में डीपीआई पंजाब बलवीर सिंह ने हाईकोर्ट में माफी मांगी है। जस्टिस अरूण पल्ली ने मामलें पर सुनवाई 6 अगस्त तक स्थिगत कर दी है। लेकचरार अंग्रेजी के पद पर नियुक्ति को लेकर हाईकोर्ट में लंबित याचिका के मामलें को सुलझाने के दायर याचिका की सुनवाई दौरान मंगलवार को डीपीआई (सेकेंडरी) के डीलिंग हैंड सुखविंदर सिंह तथा कानूनी सहायक सुनील द्वारा रिश्वत की मांग के मामले पर डीपीआई सेकेंडरी एजूकेशन बलबीर सिंह ने माफी मांगी है।
डीपीआई ने अपने जवाब में कहा कि दोनों कर्मचारियों पर भारी जुर्माना लगाने के लिए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इसके जवाब में कर्मचारियों ने चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर याची के पति से मिलने की बात को तो स्वीकार किया है लेकिन रिश्वत की बात से साफ मना कर दिया है। दोनों कर्मचारियों को चार्जशीट जारी कर भर्ती शाखा बदल दिया गया है। बता दें कि लेकचरार की नियुक्ति की मांग को लेकर याची नवदीप कौर को डीपीआई (सेकेंडरी) कार्यलय में केस डील कर रहे डीलिंग हैंड सुखविंदर सिंह का फोन आया कि उन्हें कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई से पहले ही नियुक्ति पत्र जारी किया जा सकता है यदि वे तीन से चार लाख रुपये खर्च करें। नवदीप के पति अवतार सिंह ने फोन पर इस सारी बातचीत को रिकार्ड कर लिया। डीलिंग हैंड सुखविंदर सिंह ने ला अफसर सुनील से भी उनकी फोन पर बात करवाई थी। तय प्रोग्राम अनुसार 2& मई को सुबह दस बजे के करीब सुखविंदर सिंह ने अपने साथी सुनील के साथ अवतार सिंह से एक घंटे मुलाकात भी की। दोनों कर्मचारिोयं ने कहा था कि फाइल ने को कई जगहों से गुजरना है। जिस कारण उन्हें तीन -चार लाख रुपये रिश्वत देनी होगी और राशि अदा न करने पर कोर्ट में उनकी नियुक्ति का विभाग विरोध करेगा और याची के केस जीत जाने पर भी विभाग आसानी से नियुक्ति न देकर उन्हें परेशान करेगा और सही जगह नियुक्ति नहीं दी जाएगी। यह सारी बात याची के पति ने रिकार्ड की थी।
इस मामलें की अगली सुनवाई 6 अगस्त को होगी।


10 सितंबर तक करें किसानों को गन्ने की बकाया राशि का भुगतान

हाईकोर्ट के हरियाणा व पंजाब सरकार को निर्देश
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा एवं पंजाब सरकार द्वारा किसानों की गन्ने की बकाया राशी का भुगतान न करने के एक मामलें की सुनवाई करते हुए दोनों राज्यों की सरकारों को 10 सितंबर तक बकाया राशि का भुगतान करने के आदेश जारी किये है। मंगलवार को जस्टिस एसके मित्तल व जस्टिस एचएस सिद्बू के आधारित खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए दोनों सरकारों को फटकार लगाते हुए कहा कि वह किसानों को जैसे तैसे अदायगी करें। इस मामलें पर अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी।
पंजाव व हरियाणा राज्य के किसानों को गन्ने की बकाया राशि का भुगतान न करने को लेकर समाज सेवी संस्था लोक भलाई इंसाफ वेलफेयर सोसायटी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रखी है। याची अनुसार पंजाब में शुगर मिलों ने किसानों का करीब 700 करोड़ तथा हरियाणा में शुगर मिलों ने  किसानों का 900 करोड़ रुपये का भुगतान करना है। शुगर मिलों द्वारा किसानों की बकाया राशि का भुगतान नहीं किया जा रहा। जिससे किसानों की आर्थिक हालत खराब हो रही है और किसान परेशान हैं। याचिका में कहा गया कि पंजाब में 1 अक्टूबर 2014 से 15 अप्रैल तक किसानों द्वारा बेची गई गन्ने की फसल का 700 करोड़ रुपये लंबित है। सरकार किसान हितैषी होने का दम भर रही है। दूसरी ओर हरियाणा में हालात और भी बदतर हैं। हरियाणा के किसानों को उनकी फसल के करीब 900 करोड़ रुपये की बकाया राशि नहीं मिल रही। याची ने कहा कि किसानों को अपनी फसल बेचने के बावजूद उन्हें पैमेंट को लेकर तरसना पड़ रहा है।
मंगलवार को सुनवाई दौरान दोनों राज्यों के सरकारी वकीलों ने कोर्ट को जवाब में बताया कि केंद्र सरकार गन्ने के भुगतान को लेकर 6000 करोड़ रुपये ऋण देने की नीति तैयार कर रही है। ऐेसे में सभी राज्यों के किसानों को बकाया राशि का भुगतान किया जाएगा। कोर्ट ने सख्त रूख अख्तियार करते हुए कहा कि केंद्र पाल्सी बनाए या नहीं ,दोनो राज्य की सरकारें जैसे तैसे 10 सितंबर तक गन्ने की बकाया राशि का भुगतान करें।




Friday, 17 July 2015

मुख्यमंत्री एवं अनिल विज के बीच मतभेद फिर हुए उजागर


ब्रांड एम्बेसडर की नियुक्ति से स्वास्थ्य मंत्री दुखी
मुख्यमंत्री को बताया जंगल का शेर
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
 बालीवुड अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा को बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम की ब्रांड एम्बेसडर नियुक्त करने से मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री अनिल विज के बीच मतभेद एक बार फिर उजागर हो गये है। हालांकि विज ने मुख्यमंत्री के साथ मतभेद होने की खबर को सिरे से नकारते हुए अपना मित्र बताया है। लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि भारतीय राजनीति में मुख्यमंत्री बाहुवली होता है तथा मुख्यमंत्री के  पास पूरे अधिकार होते है और वह कुछ भी कर सकते है। परन्तु ब्रांड एम्बेसडर की नियुक्ती को लेकर उन्हें अथवा विभाग को कोई नॉलज नहीं है। 
अनिल विज ने जहां मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की तुलना जंगल के शेर व मंत्रियों की तुलना आम आदमी से की वहीं यहां तक कह दिया कि उनका विभाग बेटी बचाओ मुहिम को चलाने में सक्षम है। विभाग में किसी भी ब्रांड एम्बेसडर की जरूरत नहीं है। ऐसे में बेची बचाओ बेटी पढ़ाओं प्रोग्राम को लांच करने के लिये 21 जुलाई को गड़गांव में स्थित प्रोग्राम में अनिल विज के शामिल होने पर भी असमंसज पैदा हो गया है।
शुक्रवार को अपने कार्यलय में कुछ चुनिंदा पत्रकारों से बातचीत दौरान कहा कि उन्हें बीते रात सोशल मीडिया में हरियाणा सरकार द्वारा ब्रांड एम्बेसडर नियुक्त करने की खबरों से यह जानकारी मिली थी। विज ने कहा कि ब्रांड एम्बेसडर को लेकर कभी भी विभाग में चर्चा नहीं हुई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने कल उनसे 21 तारीख को प्रोग्राम होने और फरी रहने की बात कही थी परन्तु इस बारे कोई बातचीत नहीं हुई। उन्होंने कहा कि बेटी बचाना स्वास्थ्य विभाग और बेटी पढ़ाना शिक्षा विभाग का काम है और दोनों विभागों को इस बारे कोई जानकारी नहीं है। विज ने कहा कि विभाग के डाक्टरों की मेहनत कारण पीएनडीटी एक्ट को सख्ती से लागू किया जा रहा है और लिंग अनुपात का आंकड़ा बढ़ा है और नाचने गाने से बेटी नहीं बचने लगी। बता दें कि हरियाणा सरकार ने गुरूवार को बालीवुड अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा को स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को बिना भरोसे में लिये ब्रांड एम्बेसडर नियुक्त कर दिया। जिससे अनिल विज विभाग में दखल अंदाजी से क्रोधित हो गये।
प्रत्येक जिले में होंगे 44 कोच भर्ती ---
अनिल विज ने कहा कि खेल विभाग में बड़ी तबदीली की जा रही है और खेल नीति तहत भर्ती किये गये खिलाड़ियों को लेकर कानूनी विचार विमर्श किया जा रहा और ऐसा निमय बनाया जा रहा है कि खेल कोटे से भर्ती होने पर खिलाड़ी न्यूनतम छह साल तक खेलें या फिर खेल मैदान में खिलाड़ियों को ट्रेनिंग दे। उन्होंने कहा कि जल्द ही प्रदेश में 624 कोचों की भर्ती की जा रही है और इस वक्त 414 कोच है। इसी के साथ सभी जिलों में खेलों को बढ़ावा देने के लिये रैसेलाइजेशन किया जा रहा है। उन्होंने खुलासा करते हुए बताया कि कई जिलों में ऐसे कोच तैनात है जहां उस खेल का कोई खिलाड़ी भी नहीं है। 

Thursday, 16 July 2015

केंद्रीय मंत्री चौधरी वरिंदर सिंह डिफाल्टर घोषित

घर बनाने,कार खरीदने को लिया कर्जा वापिस न करने का आरोप
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
करीब चार दशकों से राजनीति कर रहे वरिष्ठ नेता एवं केंद्रीय मंत्री चौधरी वरिंदर सिंह ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उन्हें अपनी ही सरकार में अपमानित होना पड़ सकता है। देश के ग्रामीण विकास व पंचायती विभाग के मंत्री और पांच बार हरियाणा विधान सभा में हरियाणा की प्रतिनिधित्व करने वाले चौधरी वरिंदर सिंह को हरियाणा विधान सभा ने डिफाल्टर घोषित कर दिया है। चौधरी पर करीब 35 लाख रुपये का ऋण न चुकाने का आरोप है। जिसकी वजह से विधान सभा ने यह फैसला लिया है। विधान सभा के सूत्रों मुताबिक चौधरी वरिंदर सिंह ने कार खरीदने एवं हाउस बनाने के लिये करीब 35 लाख रुपये ऋण लिया था। जानकारी अनुसार चौधरी वरिंदर सिंह ने घर बनाने के लिये दो बार 12.50 लाख रुपये का कर्जा लिया। इसके अलावा दस लाख रुपये कार खरीदने के लिये अलग से कर्जा लिया था।  बकाया ऋण का भुगतान करने के लिये विधान सभा कार्यलय की तरफ से चौधरी वरिंदर सिंह को तीन-चार बार नोटिस भेजे गये परन्तु उन्होंने नोटिस को गंभीरता से नहीं लिया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केंद्र और हरियाणा में भाजपा की सरकार है। अपनी ही सरकार में एक केंद्रीय मंत्री के खिलाफ इतना बढ़ा फैसला लेना हैरानीजनक है। इसलिये विधान सभा कार्यलय ने कर्जा की अदायगी न करने पर उन्हें डिफाल्टर घोषित किया है।
ओर विधायकों ने भी ले रखा है कर्जा:
विधान सभा के विश्वनियता सूत्रों का कहना है कि बहुत सारे मौजूदा व पूर्व विधायकों ने भी कर्जा ले रखा है। परन्तु उनके कर्जा का भुगतान उन्हें दी जाती पैंशन से काट लिया जाता है। चौधरी वरिंदर सिंह सांसद बन गये और सांसद चुने जाने पर नियमों मुताबिक उन्हें विधान सभा से पैंशन नहीं दी जाती। जिसकी वजह से उनके बकाया राशि का भुगतान रूक गया था।
यह है राजनीतिक कैरियर :
चौधरी वरिंदर सिंह बीते 38 सालों से राजनीति की दुनिया में है। चौधरी को पांच बार हरियाणा के लोगों ने विधान सभा में भेजा है और दो बार वह सांसद और एक बार राज्य सभा सदस्य रहे है। जानकारी के अनुसार वह पहली बार 1977 में विधायक चुने गये थे। इसके बाद 1982 से 84 तक,1994-96 तक,1996 से 2000 तक और 2005 से 2009 तक विधायक रहे। वह हरियाणा के कैबेनिट मंत्री भी रहे है। इसी तरह दो बार हिसार संसदीय क्षेत्र से सांसद चुने गये। किन्तु पूर्व मुख्यमंत्री भुपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ सबंध अच्छे न होने के चलते उन्होंने कांग्रेस का हाथ छोडक़र भाजपा का दामन थाम लिया था।

Friday, 10 July 2015

अमित शाह आधा दर्जन राज्यों के विधायकों,मंत्रियों की लेंगे क्लास

मंत्री अपना अपना रिपोर्ट बनाने में जुटे
12 को होगी दिल्ली में मीटिंग
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह 12 जुलाई को करीब आधा दर्जन राज्यों के पार्टी के विधायकों और जिन राज्यों में पार्टी की सरकारें है,के मंत्रियों की क्लास लेंगे। पार्टी अध्यक्ष द्वारा क्लास लेने से हरियाणा के मंत्रियों में हडक़ंप मचा हुआ है और सभी मंत्री अपना अपना रिपोर्ट कोर्ड तैयार करने में जुटे हुए है। यह पहली बार है कि किसी राष्ट्रीय पार्टी का अध्यक्ष अपनी पार्टी के विधायकों और मंत्रियों की क्लास लेगा। क्योंकि अक्सर प्रदेश से संबंधित मामलों के प्रभारी ही बैठक लेते है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पार्टी हाईकमान को शिकायतें मिल रही है कि जहां जहां पार्टी की सरकारें वहां मंत्रियों और विधायकों के बीच तालमेल नहीं है। तालमेल न होने की वजह से जहां पार्टी कार्यकर्ताओं में मायूसी का आलम है वहीं इसका लोगों में सरकार को लेकर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। सूत्र बताते है कि  हरियाणा में मंत्रियों व विधायकों के बीच संबंध मधुर नहीं है और इनकी शिकायतें ज्यादा हाईकमान के पास पहुंच रही है।
हाईकमान का आदेश आने के बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की कैबेनिट के सभी मंत्री अपना अपना रिपोर्ट कार्ड बनाने में जुटे हुए है कि सरकार के नौ माह के कार्यकाल दौरान क्या क्या किया है। मंत्रियों को डर सता रहा है कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह किस विभाग के बारे में क्या  पूछ लें। इसीलिये वे किसी किसम की कोताही नहीं बरतना चाहते क्योंकि यह पहली बार है कि पार्टी अध्यक्ष सरकार के कामकाज का लेखा जोखा लेंगे कि सरकार ने लोग हित में क्या कया काम किया है। प्रधान मंत्री नरिंदर मोदी की ओर से शुरू की गई योजनाओं पर क्या क्या अमल हुआ है और लोगों का क्या रिसपांस मिल रहा है। इन सभी बातों का मीटिंग में जिक्र होगा। सूत्र बताते है कि हरियाणा के अलावा पंजाब,जम्मू कशमीर,दिल्ली,राजस्थान,उतराखंड इत्यादि राज्यों के पार्टी विधायक मीटिंग में हिस्सा लेंगे। सूत्र बताते है कि सभी राज्यों के नेताओं के साथ अलग अलग मीटिंग होगी।
हरियाणा प्रदेश भाजपा के प्रभारी अनिल जैन ने अमित शाह द्वारा मीटिंग लेने की पुष्टि करते हुए कहा कि पार्टी अध्यक्ष द्वारा कई राज्यों के विधायकों,मंत्रियों के साथ मीटिंग कर रहे है,जिनमें हरियाणा राज्य भी शामिल है।

Wednesday, 8 July 2015

कई मायने रखता है मुख्यमंत्री का बस सफर

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धरातल की समस्याएं और लोगों की नब्ज टटोल रहे है सीएम
बस में सीएम के साथ साथ -----
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा सरकारी वाल्वो बस में सफर करना कोई छोटी मोटी बात नहीं है। भले ही विपक्ष इसे सियासत से जोडक़र देख  रहा हो और अफसरशाही को भी यह अटपटा लगता हो। पर मुख्यमंत्री के सरकारी बस में सफर करने के कई मायने है। मुख्यमंत्री ने स्वयं पहल कर सरकार में शामिल अन्य मंत्रियों,विधायकों एवं अफसरशाही को भी यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह देश व सूबे के हित के लिये सरकारी खर्च पर कटौती करे।
बिलकुल सादगी,बिना ला लश्कर,बिना कोई सुरक्षाकर्मी जहां तक कि पायलट के बिना बुधवार को सुबह चंडीगढ़ से करनाल तक करीबन ढाई घंटे तक बस सफर किया। बसे में सफर दौरान ऐसा प्रतीत हो रहा था कि मानों कि बस में सूबे का मुखिया सीएम नहीं आम लोग ही सफर कर रहे है। मुख्यमंत्री ने जहां एक एक कर यात्रियों से मुलाकात कर उनका हालचाल पूछा वहीं उनसे सूबे की स्थिति को लेकर मन की बात पूछी। यही नहीं जिसने मुख्यमंत्री को किसी समस्या से अवगत करवाया तो मुख्यमंत्री ने उसी से समाधान करने का तरीका भी पूछा। इसके अलावा प्रदेश व केंद्र सरकार की कार्यशैली को लेकर भी लोगों से बातचीत की।
बस में सफर करने को लेकर पूछे सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके पास आज समय था। इसलिये उन्होंने बस में सफर करने को पहल दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह जहाज में सफर करते है तो उन्होंने सोचा कि आज बस में सफर किया जाए। यदि सडक़ मार्ग जाते है तो रोड पर बहुत सुरक्षा लगती है। ऐसे में लोगों को भी परेशानी होती है।
क्या भविष्य में भी बस में सफर जारी रखेंगे ,इसके जवाब में उन्होंने कहा कि जब उन्हें फ्री समय मिलेगा तो वह ऐसे ही बस में सफर करेंगे।  वाल्वो बस की जगह साधारण बस और ग्रामीण एरिया को क्यों नहीं चुना तो उन्होंने बताया कि आज उनका करनाल में प्रोग्राम था। भविष्य में ग्रामीण एरिया में साधारण बसों में भी सफर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दिनों दिन ट्रेफिक बढ़ रही है। ऐसे में लोगों को बसों व रेलों में सफर करने को पहल देनी चाहिये। इससे देश व सूबे की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी और सडक़ों पर ट्रेफिक कम होगी व प्रदूषण भी कम होगा। कुल मिलाकर मुख्यमंत्री ने बस में सफर कर सूबे की ब्यूरोक्रेसी, राजनीतिज्ञों को साधारण जिंदगी बसर करने और सरकारी खर्च पर कटौती करने का मैसेज देने की कोशिश की है।  जैसे पौधारोपण करने के बाद इसकी छाया कई सालों बाद मिलती है ठीक उसी तरह मुख्यमंत्री के प्रयास का असर आने वाले समय में देखने को मिलेगा।
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वई झूठ न बोला हम तो सिफराश से लगा.......
जिस बस में सीएम ने सफर किया उसके टायर की चंडीगढ़ से चलते वक्त ही टूटी टूट गई थी। जिसके चलते टायर बदलने के लिये बस चालक  बस को रोडवेज वर्कशाप ले गये। वर्कशाप में कूड़ा कक्र्ट होने और टायर,ट्यूब व अन्य समान इधर उधर बिखड़ा होने पर मुख्यमंत्री ने  चेहरे पर कोई गुस्सा नहीं दिखा। मुख्यमंत्री ने रोडवेज अधिकारी को पूछा कि आप घर में भी ऐसे कूड़ा कक्र्ट रखते है तो अधिकारी ने जवाब दिया नहीं। मुख्यमंत्री ने प्यार से समझाया कि जब घर में सफाई रखते है तो जहां भी रखा करो। यह भी आपका घर है। इसी दौरान मुख्यमंत्री ने परिचालको को पूछा कि सबसे बड़ी समस्या क्या है तो एक परिचालक ने कहा कि उन्हें अपने पास दो-ढाई सौ रुपये रखने की अनुमति है जबकि सुबह पहले टाइम पर बस चलाने समय खुले पैसे न होने पर काफी परेशानी आती है ऐसे में दो तीन हजार रुपये कैश रखने की अनुमति चाहिये। इसी दौरान कर्मचारियों ने ओर भर्ती व बसे डालने की भी मांग की। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार एक हजार के करीब नई बसें डालने को लेकर काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने पूछा कि क्या आप सिफराश से लगे है कि अपने दम पर। तो एक कर्मचारी ने कहा कि वाई झूठ न बोला हम तो सिफराश से लगा। उसके परिजन की मौत हो गई थी जिसके चलते उन्हें नौकरी मिली है समझो सिफराश से ही नौकरी मिली।

Monday, 6 July 2015

आईपीएएस नौनिहाल सिंह के जमीन खरीद मामलें की विजिलेंस जांच के आदेश

हाईकोर्ट का फैसला ------
आईपीएएस नौनिहाल सिंह के जमीन खरीद मामलें की विजिलेंस जांच के आदेश
विजिलेंस को छह माह में जांच कर जरूरी कदम उठाने को कहा
लुधियाना के दो सगे भाईयों ने दायर की थी याचिका
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब केडर के आईपीएस अधिकारी (यूटी के पूर्व एसएसपी) नौनिहाल सिंह व अन्य द्वारा दो सौ करोड़ रुपये की जमीन खरीदने के मामलें की विजिलेंस जांच के आदेश दिये है। हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच की मांग को लेकर दायर याचिका पर सोमवार को सुनवाई करते हुए सीबीआई मांग को नकारते हुए छह माह के भीतर विजिलेंस जांच के आदेश दिये है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद आईपीएस अधिकारी नौनिहाल सिंह, उनके भाई गुजरात कैडर के आईएएस अधिकारी रूपवंत सिंह और उनके ससुर हवा सिंह जो कि हरियाणा के पूर्व एडवोकेट जनरल है,की मुशिकलें बढ़ सकती है।
लुधियाना निवासी जसविंदर पाल सिंह तथा उसके भाई हरमीत सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि पंजाब केडर के आईपीएस अधिकारी नौनिहाल सिंह,उसके भाई गुजरात कैडर के आईएएस अधिकारी रूपवंत सिंह, ससुर हरियाणा के पूर्व एडवोकेट जनरल हवा सिंह हुडा और भतीजे लवलीन सिंह ने तमिलनाडु व आंध्र प्रदेश में करोड़ों रुपये की करीबन दो सौ एकड़ कामीन खरीद की है। शिकायतकर्ताओं ने सीबीआई जांच की मांग करते हुए कहा कि वह 2002 में नौनिहाल के एसएसपी लुधियाना रहते समय उनके संपर्क में आए थे। तमिलनाडु में करोड़ों रुपये की जमीन बेनामी ट्रांजेक्शन के जरिए खरीद की है। याची अनुसार तमिलनाडु लैंड रिफोर्मस (फिक्सेशन ऑफ सिलिंग ऑन लैंड) एक्ट 1961 के मुताबिक पांच लोगों के परिवार का सिलिंग एरिया 30 एकड़ है। इसी तरह वैट लैंड की खरीद पर भी सिलिंग लिमिट 27 एकड़ है। डबल क्राप  वैट लैंड पर यह लिमिट 18 एकड़ है। ऐसे में जमीन की खरीद नहीं की जा सकती थी।
जस्टिस एजी मसीह ने याचिका पर सुनवाई करते हुए विजिलेंस को छह माह के भीतर मामलें की जांच करने और जरूरी कदम उठाने के निर्देश देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया है।
डीआईजी पीएपी तैनात है नौनिहाल सिंह --
नौनिहाल सिंह इस वक्त पंजाब पुलिस में डीआईजी आम्र्ड पुलिस फोर्स के पद पर तैनात हैं जबकि रूपवंत सिंह गुजरात के इंडस्ट्रियल एक्सटेंशन ब्यूरो के एमडी हैं। जबकि हवा सिंह हुडा हरियाणा में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुडा सरकार में एडवोकेट जनरल थे।

Friday, 3 July 2015

युवाओं को अंधकार में डोब रहे है नर्सिंग कालेज


नियमों के विपरीत चल रहे है छह दर्जन से अधिक कालेज
प्रदीप कासनी ने की विजिलेंस जांच की सिफारश
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
प्रदेश में छह दर्जन के करीब नर्सिंग कालेज कानून एवं नियमों को ताक पर रखकर  चल रहे है। नर्सिंग में विद्यार्थियों का भविष्य बनाने की बजाए यह युवाओं को अंधकार में डोब रहे है और तय फीसों से ज्यादा फीसे वसूल कर मोटी कमाई कर रहे है। इसका खुलासा वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रदीप कासनी ने अपनी एक रिपोर्ट में किया है। मेडिकल एजुकेशन व रिसचर्च के निर्देशक पद से ट्रांसफर होने से पहले प्रदीप कासनी ने सरकार को एक विशेष रिपोर्ट सौंपी है जिसमें नर्सिंग कालेजों को लेकर चल रहे गोरखधंधे की विजीलेंस जांच करवाने की सिफारश की गई है। एक तरफ नर्सिंग कालेजों के छात्र उनका रिजल्ट घोषित करने की मांग को लेकर  धरना प्रदर्शन कर रहे है वहीं दूसरी ओर वरिष्ठ अधिकारी प्रदीप कासनी ने सरकार को विजिलेंस जांच करवाने की सिफारश करते हुए रिपोर्ट सौंप दी है। इससे सरकार कसूती स्थिति में फंस गई है।
सबसे अहम बात यह है कि प्रदीप कासनी ने अपनी रिपोर्ट में सूबे में बनी मेडिकल काउंसिल के असिस्त्व पर ही सवाल खड़ा कर दिया है क्योंकि हरियाणा में मेडिकल काउंसिल पंजाब मेडिकल काउंसिल एक्ट के अनुसार चल रही है। उक्त एक्ट मुताबिक हरियाणा में चल रही मेडिकल काउंसिल की सभी गतिविधियां गलत है। क्योंकि पंजाब सरकार ने मेडिकल काउंसिल एक्ट 1934 में संशोधन कर लिया है परन्तु हरियाणा सरकार ने इसमें संशोधन तक नहीं किया। ऐसे में विद्यार्थियों की डिग्री को लेकर बड़ी कानूनी अड़चन पैदा हो सकती है। 
सूत्र बताते है कि प्रदीप कासनी ने अपनी रिपोर्ट में अंकित किया है कि प्रदेश में कई नर्सिंग कालेज ऐसे सामने आये है ,जो सिर्फ दो तीन कमरों में चल रहे है। यही नहीं कई नर्सिंग कालेजों की बिल्डिंग ने के नीचे कोई यूनियन का दफ्तर अथवा दुकान चल रही है ऊपरली बिल्डिंग में नर्सिंग कालेज चल रहा है।
वरिष्ठ अधिकारियों की भी मिलीभगत ------
सूत्र बताते है कि कई नर्सिंग कालेज सियासी नेताओं अथवा उनके सगे संबंधियों के है। सियासी नेताओं के अलावा स्टेट के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी अपने हाथ रंगे है। रिपोर्ट में ऐसे अधिकारियों के खिलाफ विजिलेंस जांच कर आय से अधिक संपति अर्जित करने को लेकर केस दर्ज करने की भी सिफारश की गई है। बताया जाता है कि अधिकारियों व कर्मचारियों ने नर्सिंग कालेज के मालिको,संचालकों से मोटी रकम वसूली है।
भले ही प्रदीप कासनी की रिपोर्ट पर अंतिम फैसला मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने लेना है परन्तु जिस ढंग से प्रदीप कासनी ने अपनी रिपोर्ट तैयार की है उससे नर्सिंग कालेजों में शिक्षा लेने वाले विद्यार्थियों के भविष्य पर भी सवालिया निशान लग गया है। अगर सरकार प्रदीप कासनी की रिपोर्ट मुताबिक जांच करवाती है तो सियासी नेताओं के साथ साथ कई वरिष्ठ अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है।

Friday, 26 June 2015

अब अनपढ़ नहीं बन सकेगा पंचायत सदस्य !


सरकार न्यूनतम शैक्षणिक योज्यता निरधारित करने पर कर रही है विचार
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
विधायक एवं सांसद बनने के लिये भले ही कोई शैक्षणिक योज्यता निरधारित नहीं है और राजनीति में रिटायरमेंट सीमा भी नहीं है। लेकिन  गांव का मुखिया यानी सरपंच व पंच बनने के लिये शैक्षिणक योज्यता लाजमी हो,यह बात किसी के हजम नहीं हो रही है। हां यह सच है कि हरियाणा सरकार पंचायत सदस्य बनने के लिये न्यूनतम शैक्षणिक योज्यता लाजमी करने के लिये ड्राफट तैयार कर रही है। यदि पंचायत चुनाव से पहले सरकार न्यूनतम योज्यता लाजमी कर देती है तो आगामी पंचायती चुनावों में पंचायत,जिला परिषद व ब्लाक समिति में कोई अंगूठा छाप मेंबर नहीं बनेगा।
मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश सरकार पंचायती सिस्टम में सुधार लाने के उदेश्य तहत सरपंच,पंच,ब्लाक समिति व जिला परिषद सदस्य की न्यूनतम योज्यता लागू करने के लिये ड्राफ्ट तैयार कर रही है और अंतिम मोहर मुख्यमंत्री की लगनी है। ग्रामीण विकास व पंचायती राज्य विभाग की ओर से गांव का मुखिया बनने के लिये आठवीं और पंचायत समिति व जिला परिषद का सदस्य बनने के लिये 10 पास को न्यूनतम योज्यता निरधारित करने को लेकर ड्राफट तैयार किया है। पंचायती राज्य विभाग की ओर से ड्राफ्ट मुख्यमंत्री को स्वीकृति के लिये भेज दिया गया है। अगर मुख्यमंत्री मोहर लगा देते है तो मंत्री मंडल से मंजूरी ली जाएगी। सूत्र बताते है कि 30 जून को मंत्री मंडल की मीटिंग होने की संभावना है और मंत्रीमंडल इस पर अपनी मोहर भी लगा सकता है। मंत्रीमंडल द्वारा मंजूरी देने के बाद फाइल राज्याल को नोटीफिकेशन के लिये भेजी जाएगी। राज्यपाल द्वारा हस्ताक्षर करने के बाद पंचायती राज्य अधिनियम की धारा 19 में संशोधन लागू हो जाएगा।
सूत्र बताते है कि सरकार शैक्षणिक योज्यता ही अनिवार्य नहीं कर रही। बल्कि विभिन्न केसों में सजा याफता,सरकारी प्रापर्टी पर कब्जा करने वाले,बैंक के डिफालटर अथवा जो बिजली चोरी इत्यादि मामलें में भी फंसे है उन पर भी सिकंजा कसना चाहती है और उनके राजनीति में प्रवेश पर अंकुश लगाना चाहती। इसलिये सरकार निचले स्तर पर साफ छवि वाले लोगों को राजनीति में लाना चाहती है ताकि निचले स्तर से ऊपर तक भ्रष्टाचार को खत्म किया जा सके। सरकार ऐसा कदम उठाकर यह संदेश भी देना चाहती है कि पढ़े लिखे लोग ही राजनीति में आए क्योंकि अनपढ़ लोग अफसरशाही द्वारा लिखी नोटिंग को पढ़ नहीं सकते और अफसरशाही अनपढ़ पंचायत सदस्य का नजायज फायदा भी उठाती है।
 अब देखना होगा कि सरकार इस ड्राफ्ट को मंजूरी देती है या नहीं और सरकार की इस नीति को गांव के लोग हजम करेंगे या नहीं।

Wednesday, 17 June 2015

मानव अधिकार आयोग के पास सबसे अधिक शिकायतें पुलिस के खिलाफ

मानव अधिकार आयोग के पास सबसे अधिक शिकायतें पुलिस के खिलाफ
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
भले ही प्रदेश सरकार सूबे में भ्रष्टाचार खत्म करने और पुलिस की कार्यप्रणाली में सुधार लाने का दम भर रही है परन्तु हकीकत यह है कि हरियाणा में सत्ता परिवर्तन के बाद भी पुलिस की कार्यशैली में कोई अधिक अंतर नहीं आया है। पुलिस का आमजन के प्रति रवैया पहले जैसा ही है। इसका भेद मानव अधिकार आयोग के पास पहुंच रही शिकायतों से खुलता है।
मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश से मानव अधिकार आयोग के पास जितनी शिकायतें पहुंच रही है उसमें से साठ फीसदी शिकायतों का सबंध प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से पुलिस विभाग से होता है।
सूत्रों के अनुसार पुलिस के खिलाफ निरंतर पहुंच रही शिकायतों से मानव अधिकार आयोग काफी नाराज है। हालांकि मानव अधिकारों के प्रति समय समय पुलिस को ट्रेनिंग देने के साथ साथ मानव अधिकारों का सखती से पालन करने के भी दिशानिर्देश  दिये जाते है परन्तु पुलिस की कार्यशैली में कोई सुधार नहीं आ रहा है और मानव अधिकारों का उलंघन लगातार हो रहा है।
१८०० से अधिक शिकायतें पुलिस के खिलाफ-----
जानकारी के अनुसार प्रदेश में मिर्चपुर केस के बाद सितंबर २०१२ में मानव अधिकार आयोग गठित किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने मिर्चपुर मामलें की सुनवाई हरियाणा मानवाधिकार आयोग को देने की बात कही तो यह मामला सामने आया था कि हरियाणा में मानव अधिकार आयोग ही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद ही प्रदेश में मानवाधिकार आयोग का गठन किया गया था।
आयोग के आंकड़े बताते है कि आयोग गठित होने के बाद अब तक करीब तीन हजार शिकायतें मानव अधिकार आयोग के पास पहुंची है इनमें से १८०० से अधिक केवल पुलिस विभाग से संबंधित है। जहां यह भी बताना जरूरी है कि ३३ के करीब मामलें ऐसे सामने आये थे ,जिन पर मानव अधिकार ने खुद संज्ञान लिया है।
चेयरमैन सहित आयोग के तीन सदस्य ----
भले ही सरकार ने मानव अधिकारों को लेकर आयोग गठित कर रखा है परन्तु जहां स्टाफ का भी काफी टोटा है। आयोग के चेयरमैन के अलावा दो अन्य सदस्य है। रोजाना तीस के करीब मामलों पर आयोग की ओर से सुनवाई की जाती है। परन्तु पुलिस के खिलाफ पहुंच रही शिकायतों व पुलिस द्वारा मानव अधिकारों के हनन करने से आयोग सखत है। आयोग के सदस्य जेएस अहलावत ने बताया कि आयोग के पास तीन हजार के लगभग शिकायतें आई है जिनमें से दो हजार का निपटारा कर दिया गया है। जबकि  अन्य सदस्य जस्टिस एचएस भल्ला कहा कहना है कि पुलिस अधिकारियों को मानव अधिकारों बारे कई बार प्रशिक्षण दिया गया है। उन्होंने कहा कि आयोग फिर से सेमिनार लगाकर पुलिस विभाग को मानव अधिकारों के प्रति जागरूक करेगा।


Thursday, 4 June 2015

दलित वोट बैंक को जोडऩे के लिये कांग्रेस का नया पैंतड़ा

डा. अंबेदकर के नाम पर -------
साल भर मनाई जाएगी अंबेदकर ज्यंती
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
दलित वोट बैंक को फिर से अपने साथ जोडऩे के लिये कांग्रेस हाईकमान ने  संविधान निर्माता डा अंबेदकर की 125 ज्यंती के उपलक्ष्य में देशभर में विशेष कार्यक्रम आयोजन करने का फैसला किया है  ताकि कांग्रेस से दूर हुए दलितों को फिर से पार्टी के साथ जोड़ा जा सके। बता दें कि बीते लंबे समय से दलित कांग्रेस पार्टी के हक में वोट डालते रहे है और बहुजन समाज पार्टी ने कांग्रेस के इस वोट बैंक को काफी नुक्सान पहुंचाया था। परन्तु बीते आम चुनाव दौरान देश भर में दलित वोट बैंक भाजपा के हक में भुगता था। जिसको लेकर कांग्रेस काफी चिंतत है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी की ओर से भी अंबेडकर ज्यंती पर विशेष प्रोग्राम करने का प्रोग्राम है। बीते माह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पार्टी के अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी द्वारा अमृतसर में आयोजित समारोह में विशेष तौर पर शामिल हुए थे।
कांग्रेस द्वारा बीते कल हरियाणा में एक पच्चीस सदस्यीय कमेटी गठित की है,जो कि प्रदेश में डा अंबेदकर ज्यंती के उपलक्ष्य में कार्यक्रम तय करेगी। सूत्रों का कहना है कि पार्टी अंबेडकर ज्यंती के माध्यम से जहां दलित वोट बैंक को अपने साथ जोडऩे का प्रयास करेगी वहीं पार्टी में चल रही गुटबाजी को खत्म करना चाहती है। हाईकमान ने प्रदेश प्रधान डा अशोक तंवर व पूर्व मुख्यमंत्री भुपेंद्र सिंह हुड्डा के बीच बनी दूरियां को खत्म करने के लिये ही हुड्डा तथा उनके बेटे दीपेंद्र हुड्डा को इस कमेटी में स्थान दिया है। सूत्र बताते है कि आलाकमान हुड्डा की लोकप्रिय से पूरी तरह वाकिफ है और उन्हें छोडऩा नहीं चाहती। इसलिये हुड्डा द्वारा शुरू किये गये जन जागरण अभियान में पार्टी के वरिष्ठ नेता व प्रदेश मामलों के प्रभारी डा शकील अहमद सहित अन्य नेता शामिल हुए है। हालांकि डा शकील अहमद प्रधान मंत्री नरिंदर मोदी एवं हरियाणा में खट्टर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज करवाने वाले प्रत्येक कांग्रेसी का समर्थन करने की बात कर रहे है परन्तु हकीकत यह है कि पार्टी आलाकमान प्रदेश में वरिष्ठ नेताओं के बीच बढ़ रही दुरियों से काफी चिंतत है। चर्चा तो यह भी है कि पूर्व मुख्यमंत्री भुपेंद्र सिंह हुड्डा नयी पार्टी भी बना सकते है। हालांकि हुड्डा कांग्रेस में ही रहने और नयी पार्टी न बनाने की बात करते है फिर भी आलाकमान इसे हलके में नहीं ले रही। यही हाल पंजाब में भी है। पंजाब में पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का प्रदेश प्रधान प्रताप सिंह बाजवा के  साछ छत्तीस का आंकड़ा चल रहा है। ऐसे में वरिष्ठ नेताओं को साथ लेकर चलने और कार्यकर्ताओं के बीच जोश पैदा करने के लिये कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे प्रोग्राम लांच किये है ताकि जमीनी स्तर पर कांग्रेस का पौधा पल फूल सके।

जेलों में क्षमता से अधिक कैदी रहने को मजबूर


जेलो में विचाराधीन कैदियों की संख्या अधिक
31 विदेशी कैदी भी है जेलों में बंद
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
प्रदेश की अधिकांश जेलों में क्षमता से अधिक कैदी रह रहे है। प्रदेश की पांच जेलों को छोडक़र शेष जेलों में बंद इन कैदियों में सबसे अधिक संख्या विचाराधीन कैदियों की है। सबसे अहम बात यह है कि रिवाड़ी जेल में 30 कैदियों को रखने की क्षमता है जहां 92 कैदी बंद है। इसी तरह 31 विदेशी कैदी जिनमें एक महिला भी शामिल है,हरियाणा की जेलों में बंद है। लगभग सभी जेलों में क्षमता से दो गुणा अधिक कैदी रखे हुए है। जिसके चलते कैदियों में आपसी भिंडत होना आम बात बन गई है। हालांकि सरकार को नई जेलों का निर्माण होने से कैदियों की संख्या कम होने की उम्मीद बनी हुई है।
जेल विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार हरियाणा में कुल 19 जेल है। जिनमें तीन  सेंट्रल जेल अंबाला,हिसार (एक) व हिसार (दो) और 16 जिला जेल है। इनमें 16647 कैदियों को रखने की क्षमता है। परन्तु इन दिनों जेलों में 18317 से अधिक कैदी रहने को मजबूर है। इन कैदियों में 17501 पुरष व 816 के करीब महिला कैदी शामिल है। सबसे अहम बात यह है कि जेलों में अंडर ट्रायल कैदियों की संख्या 10790 है जिनमें 10325 पुरूष व 465 महिला कैदी शामिल है। जेल विभाग के अधिकारियों का मानना है कि विचाराधीन कैदियों के कारण ही जेलों में क्षमता से अधिक कैदी है। उनका कहना है कि अपराध बढऩे एवं अदालतों में मामलें लंबित होने कारण बहुत से कैदियों को जमानत नहीं मिल पाती। यही नहीं कई कैदियों की कोई जमानत तक लेने को भी तैयार नहीं होता। जिस कारण उन्हें छोड़ा नहीं जा सकता।
यह जेलों की मौजूदा स्थिति--------
जानकारी अनुसार अंबाला जेल में 1228,हिसार 1020,सेंट्रल जेल हिसार (दो) 355,रोहतक 1300,करनाल 2434,गडग़ाव 2412, भिवानी 561, सिरास 567, सोनीपत 363, जींद 400, कुरूक्षेत्र 466, नरनौल 299, रिवाड़ी 30,कैथल 383, फरीदाबाद 2500,यमुनानगर 1200,पलवल 40,पानीपत 35 और झज्जर जेल में 1074 कैदियों को रखने की क्षमता है। परन्तु  अंबाला जेल में 1254,हिसार में 1658,हिसार (दो) 321,रोहतक 1410,करनाल 2245,गडग़ाव 2244, भिवानी 1175, सिरसा 923, सोनीपत 875, जींद 740, कुरूक्षेत्र 544,नरनौल 655, रिवाड़ी 92, कैथल 470, फरीदबाद 1983, यमुनानगर 827,  पलवल 41, पानीपत 44 औरल झज्जर में 816 कैदी बंद है।
विदेशी कैदियों की यह है संख्या -----
जानकारी अनुसार अंबाला में 8,करनाल में 3,गडग़ाव में 16,फरीदाबाद में 3 और भिवानी जेल में एक महिला विदेशी कैदी बंद है।

नई जेल बढऩे से मिलेगी राहत :एडीजीपी------
एडीजीपी जेल केके मिश्रा का कहना है कि नई जेलों का निर्माण होने से सब कुछ ठीक हो जाएगा। मिश्रा मुताबिक पानीपत व रेवाड़ी जिले में जेल के निर्माण का काम चल रहा है। पलवल में जमीन एक्वायर हो चुकी है जबकि फतेहबाद में जमीन एक्वायर का काम चल रहा है इसके अलावा पंचकूला व मेवात में भी जेल बनाने की प्रक्रिया विचाराधीन है।

Monday, 18 May 2015

हरियाणा में दस लाखों वाहनों पर लगी गलत हाई सिक्योरटी प्लेट्स


नियमों को ताक पर रखकर लगाई गई पलेट्स
जय सिंह छिब्बर
चंडीगढ़ : हरियाणा में वर्ष 2012 से 2014 तक करीब 10 लाख वाहनों  और पंजाब में 13 लाख 19 हजार वाहनों पर लगी हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेटस (एचएसआरपी) सुप्रीम कोर्ट के आदेश एवं ट्रांसपोर्ट विभाग के दिशानिर्देश अनुसार उचित नहीं है। पंजाब सरकार पहले ही नंबर प्लटेस लगाने वाली कंपनी का एग्रीमेंट रद्द कर चुकी है। ऐसे में सवाल पैदा होता है कि वाहनों पर लगी हाई सिक्योरटी नंबर प्लटेस गैरकानूनी है ?
इसका खुलासा यातायात नियमों के विशेषज्ञ एवं पंजाब स्टेट रोड सेफ्टी काउंसिल के पूर्व सदस्य डा. कमलजीत सोई ने किया है। सोमवार को पत्रकारवार्ता दौरान बताया कि साढ़े चार लाख  की करीब लोगों ने वाहनों पर नंबर प्लटे्स लगाने को फीस जमा करवा रखी है और कंपनी करोड़ों रुपये कमा कर फुर्रर हो गई है।
डा. सोई और एडवोकेट सरीन उप्पल ने कहा कि हरियाणा में हाई सिक्योरटी प्लटे्स लगाने का एग्रीमेंट उत्सव सेफ्टी प्राइवेट लिम.कंपनी को अलाट हुआ था,परन्तु मिलीभगत से लिंक प्वाइंट कंपनी की ओर से हरियाणा ,दिल्ली,मध्यप्रदेश में नियमों को ताक पर रखकर नंबर प्लट्ेस लगाई गई। उन्होंने बताया कि उत्सव कंपनी के एमडी ने बकायदा हरियाणा  सरकार को लिंक प्वाइंट कंपनी की ओर से प्लटेस लगाने की शिकायत की थी। उन्होंने इस मामलें की सीबीआई,विजिलेंस अथवा न्यायिक जांच की मांग की। डा.सोई ने बताया कि वर्ष 2010 दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को हाई सिक्योरटी नंबर प्लटेस लगाने के आदेश जारी करते हुए बकायदा नंबर का साइज,होलोग्राम (लोगो) ,सनैप लाक और सात अंकों का कोड नंबर अंकित करने को कहा था ताकि देश में कही भी वाहन को ट्रेस किया जा सके। सोई ने कहा कि प्रदेश सरकार ने वर्ष 2011 में एग्रोस इम्पैक्स इंडिया प्राइवेट लिमटिड कंपनी के साथ एग्रीमेंट किया था जिसने महाराष्ट: में लगाए गये रेट से 33 प्रतिशत रेट कम वसूल कर करीब 54 लाख वाहनों पर ,जो उस वक्त राजिस्टर्ड थे,पर प्लटेस लगानी थी। उक्त कंपनी का बिहार,उतर प्रदेश,झारखंड सरकार द्वारा पहले ही पांच सालों के लिये लाइसेंस रद्द किया जा चुका है।

Monday, 6 April 2015

परिवहन वि•ााग ने कोआप्रेटिव बैंक को किया ब्लैक लिस्ट


पनबस के बेड़े में नई बसें खरदीने को ऋण का मामला---
अब आंध्रा बैंक से लिया है वि•ााग ने ऋण
18 बसों की चासी खरीदी
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
ट्रांस्पोर्ट वि•ााग पंजाब ने पनबस स्कीम के तहत 305 बसें खरीदने के लिये कोआप्रेटिव बैंक द्वारा उचित समय में ऋण न देने की बजाए परेशान करने को लेकर बैंक को अपने कागजों में ब्लैक लिस्ट कर दिया है। अब दो साल तक परिवहन वि•ााग बैंक से कोई लेन देन नहीं करेगा। डायरेक्टर ट्रांसपोर्ट एमएस जग्गी ने इसकी पुष्टि की है।
बता दें कि बीते साल वित्त मंत्रालय ने परिवहन वि•ााग को ऋण के जरिये बसें खरीद करने की अनुमति दे दी थी। पहले वि•ााग ने 265 साधारण और 25 एचवीएस बसें खरीद की जानी थी। परन्तु एक अधिकारी ने एचवीएस (एसी) बसें खरीदने से मना करते हुए इसके बदले साधारण बसें खरीदने को पहल दी। जिसके चलते 305 ,लेलैंड कंपनी की बसें की चासी खरीदने का फैसला किया था और वि•ााग को नवंबर माह के अंत तक  बसें सड़को पर दौड़ने की उम्मीद थी। परन्तु बैंकों द्वारा ऋण न मिलने की वजह से वि•ााग को चासी खरीदने में देरी हो गई। जानकारी के अनुसार इस वक्त रोडवेज के अठराह डिपों में पनबस की 1607 के करीब बसें है और नई बसें शामिल होने के इनकी संख्या 1900 से अधिक हो जाएगी।
वि•ााग के डायरेक्टर एमएस जग्गी का कहना है कि वि•ााग ने कोआप्रेटिव बैंक को ब्लैक लिस्ट करते हुए आगामी दो वर्षों तक कोई •ाी लेन देन न करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि वि•ााग ने आंध्रा बैंक से 305 बसें खरीदने के लिये औसतन 55 करोड़ रुपये लिया है और अठारह बसें की चासी खरीद ली गई है। हरियाणा रोडवेज द्वारा बसों को बाडी लगाई जा रही है। जैसे जैसे हरियाणा परिवहन वि•ााग बसों को बाडी लगाता गया उसके अनुसार से नई बसें आती रहेगी। जग्गी अनुसार सरकार ने ढाई सौ के करीब ओर बसें खरीदने की अनुमति दे दी है जो कि रोडवेज के बेड़े में डाली जाएगी। ऐसे में आगामी कुछ माह में साढे पांच सौ के लग•ाग बसें सड़कों पर नई दौड़ेगी और सवारियों को काफी राहत मिलेगी।

Saturday, 4 April 2015

•ाूमि अधिग्रहण कानून - कांग्रेस को मिली संजीवनी


चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
लगातार दस वर्ष तक केंद्र में सत्ता का सुख •ोगने के बाद कांग्रेस हाशिए पर चली गई। ऐसी हालत बनी कि लोक स•ाा में विपक्षा का दर्जा तक नहीं मिल पाया। केंद्र के साथ साथ कई राज्यों में हुए चुनाव व उप चुनावों में कांग्रेस की स्थिति बदतर हो गई। ऐसे में नरिंदर मोदी सरकार द्वारा ‘•ाूमि अधिग्रहण कानून’में संशोधन का बिल लाना मानों कांग्रेस को संजीवनी बूटी मिल गई। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जय राम रमेश ने आज खुद माना कि •ाूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन बिल कांग्रेस को संजीवनी मिली है कांग्रेस इसे छोड़ेगी नहीं। उनका कहना है कि किसान समाज की रीढ़ की हड्Þडी है,अगर किसान कमजोर हुआ तो समाज व देश कमजोर होगा। स्पष्ट है कि मुर्दा हुई कांग्रेस को किसानों के नाम पर जीवित होने का मौका मिल गया। कांग्रेस संसद में तो हंगामा कर रही है और अब सड़कों पर उतरने लगी है। कांग्रेस के अलावा बहुजन समाज पार्टी,कम्यूनिस्ट दल,समाजवादी पार्टी,जनता दल (यू),एनसीपी,डीएमके सहित अन्य दल •ाी •ाूमि संशोधन कानून में संशोधन के खिलाफ है। ऐसे दलों का समर्थन मिलने से कांग्रेस बागोबाग हो गई। कांग्रेस के हाथ यह मुद्दा लगने के बाद पार्टी ने वि•िान्न राज्यों में लोगों को मोटीवेट करने के लिये पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की डयूटी लगा दी ताकि मोदी सरकार के खिलाफ लोगों को •ाड़का कर राजनीतिक ला•ा लिया जा सके। जय राम रमेश मानते है कि कांग्रेस राजनीतिक पार्टी है,राजनीति करनी है। किन्तु •ाूमि अधिग्रहण कानून का लोकतांत्रिक ढंग से विरोध कर रहे है। कांग्रेस हाथ लगे इस मुद्दे को कितना •ाुनाने में कामयाब होती है यह तो समय बताएगा फिलहाल कांग्रेस को एक मुद्दा जरूर मिल गया है।

Saturday, 31 January 2015

जत्थेदार नंदगढ़ की पत्नी,•ााणजा ,तहसीलदार,कानूगो सहित 14 खिलाफ धोखाधडी का मामला दर्ज


अदालत के आदेश पर पुलिस ने किया मामला दर्ज
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
राजस्व रिकार्ड से छेड़छाड़ कर विधवा की 14 मरले जमीन हथियाने के आरोप में पुलिस ने तख्त दमदमा साहिब के पूर्व जत्थेदार बलवंत सिंह नंदगढ़ की पत्नी सुखदेव कौर,•ााणजा जसपाल सिंह पटवारी,नायब तहसीलदार,कानूगों सहित 14 व्यक्तियों के खिलाफ धोखाधड़ी,रिकार्ड़ से छेड़छाड़ करने और साजिश रचने के आरोप में केस दर्ज किया है। तलवंडी साबो पुलिस स्टेशन में पुलिस ने यह केस सब डिवीजनल ज्यूडिश्यिल मजिस्ट्रेट तलवंडी साबो के आदेश पर किया है। बता दें कि पीड़ित विधवा बीते कई सालों से न्याय लेने के लिये पुलिस के पास गुहार लगा रही थी परन्तु पुलिस ने जत्थेदार नंदगढ़ के असर रसूख के चलते आरोपियों के खिलाफ कोई उचित कारवाई नहीं की थी।
  विधवा अमरजीत कौर पत्नी तेजा सिंह निवासी तलवंडी साबो ने सब डिवीजनल ज्यूडिश्यिल मजिस्ट्रेट तलवंडी साबो की अदालत में पटिशन दायर की थी कि जसपाल सिंह पटवारी जो कि जत्थेदार बलवंत सिंह नंदगढ़ का •ााणजा है,बतौर पटवारी तलवंडी साबो में कार्यरत है और इन्होंने एक पार्टी बना रखी है। पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर मुताबिक करीब 42 वर्ष पूर्व ज्ञान सिंह ने अपनी 2 कनाल 16 मरले जमीन में से एक कनाल चार मरले जमीन गुरदेव सिंह व हरनेक सिंह इत्यादि को बेच दी थी और ज्ञान सिंह के पास एक कनाल 12 मरले जमीन बची थी। परन्तु राजस्व रिकार्ड में उसकी मलकीयत 15 मरले दिखाई जा रही थी। इसमें से 14 मरले जमीन अमरजीत कौर ने खरीद ली थी और वर्ष 1977-78 की जमाबंदी में इंतकाल •ाी दर्ज हो गया था और अमरजीत कौर का इस •ाूमि पर कब्जा था। ज्ञान सिंह की मौत से करीब दस साल बाद विरातस का इंतकाल शीला देवी विधवा सुरजीत सिंह,कृष्णा देवी,वीरपाल कौर,परमजीत कौर,दर्शना देवी,सतीश कुमार,अंजु बाला (स•ाी ज्ञान सिंह के आश्रित) के हक में मंजूर हो गया था। इसके बाद जत्थेदार के •ााणजा पटवारी जसपाल सिंह ने दूसरे आरोपियों से साठगांठ कर सुखदेव कौर पत्नी जत्थेदार बलवंत सिंह नंदगढ़ और रजिंदर सिंह पुत्र गुरतेज सिंह निवासी तलवंडी साबो को ला•ा पहुंचाने के लिये जाली रिकार्ड तैयार कर तीन अलग अलग रजिस्ट्री करवाई। राजस्व रिकार्ड अनुसार 28 जून 2012,10 जुलाई 2012 और 3 अगस्त 2013 को अलग अलग बैनामा किया गया। जबकि असल रिकार्ड में उनका  केवल 3.5 मरला •ाूमि बनती थी। शिकायतकर्ता मुताबिक आरोपियों ने उसकी •ाूमि पर अवैध कब्जा करने का प्रयास किया। पीड़ित ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और आरोपियों ने अदालत के आदेश की परवाह न करते हुए •ाूमि पर कब्जा करने की कोशिश की। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर उस वक्त राजिंदर सिंह के खिलाफ 107/151 के तहत कारवाई की परन्तु दूसरे आरोपियों के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया। बार बार न्याय की गुहार लगाने पर पुलिस ने कोई कारवाई नहीं की। आखिर पीड़ित ने आरोपियों खिलाफ केस दर्ज करने के लिये अदालत में पटीशन दायर की। सब डिवीजनल तलवंडी साबो ने 27 जनवरी को पुलिस को केस दर्ज करने के आदेश दिये।
यह है आरोपी
पुलिस ने पटवारी जसपाल सिंह,सुखदेव कौर पत्नी बलवंत सिंह नंदगढ़,वीरपाल कौर पत्नी सुरजीत सिंह,शीला देवी पत्नी ज्ञान सिंह,सुरजीत सिंह व सतीश कुमार पुत्र ज्ञान सिंह,कृष्णा रानी,परमजीत कौर पुत्री ज्ञान सिंह,वीरपाल कौर पत्नी मंजीत सिंह,दर्शना देवी निवासी करनपुर,अंजू रानी निवासी धनौला मंडी,राजिंदर सिंह तलवंडी साबो,नायब तहसीलदार सतवंत सिंह ढिल्लों,कानूगो इंद्र सिंह के खिलाफ •ाारतीय दंडावली की धारा 420,465,467,468,471,408,506,120 बी,149 के तहत  केस दर्ज किया है।

Friday, 16 January 2015

पंजाब में वाहनों पर लगी हाई सिक्योरटी नंबर प्लटेस उचित नहीं


पंजाब सरकार ने किया कंपनी से एग्रीमेंट रद्द
पंजाबियों का हुआ चालीस हजार करोड़ रुपये का नुकसान
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
पंजाब में 13 लाख 19 हजार वाहनों पर लगी हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेटस (एचएसआरपी) सुप्रीम कोर्ट के आदेश एवं ट्रांसपोर्ट वि•ााग के दिशानिर्देश अनुसार उचित नहीं है। जिसके चलते पंजाब सरकार ने पंजाब में वाहनों पर नंबर प्लटेस लगाने वाली कंपनी का एग्रीमेंट रद्द कर दिया है। अब सवाल पैदा होता है कि वाहनों पर लगी हाई सिक्योरटी नंबर प्लटेस गैरकानूनी है ? और क्या ऐसी नंबर प्लटेस का पुलिस चालान काट सकती है? इससे वाहन चालक बड़ी दुबिधा में फंस चुके है। यही नहीं प्रदेश में लाखों लोगों द्वारा नये व पुराने वाहनों पर नंबर प्लटेस लगाने के लिये फीस •ाी जमा करवा रखी है। यानी कंपनी करोड़ों रुपये कमाकर फुरर्र हो गई है। एक अनुमान मुताबिक पंजाबियों का चालीस हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
इसका खुलासा यातायात नियमों के विशेषज्ञ एवं पंजाब स्टेट रोड सेफ्टी काउंसिल के पूर्व सदस्य डा. कमलजीत सोई ने किया है। शुक्रवार को पत्रकारवार्ता दौरान डा. सोई ने कहा कि यह देश की सुरक्षा से जुड़ा मामला है इसकी सीबीआई जांच होनी चाहिये। डा.सोई ने बताया कि वर्ष 2010 दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को हाई सिक्योरटी नंबर प्लटेस लगाने के आदेश जारी करते हुए बकायदा नंबर का साइज,होलोग्राम (लोगो) और सात अंकों का कोड नंबर •ाी अंकित करने को कहा था ताकि देश •ार में कहीं •ाी वाहन को ट्रेस किया जा सके। सोई ने कहा कि प्रदेश सरकार ने वर्ष 2011 में एग्रोस इम्पैक्स इंडिया प्राइवेट लिमटिड कंपनी के साथ एग्रीमेंट किया था जिसने महाराष्टÑ में लगाए गये रेट से 33 प्रतिशत रेट कम वसूल कर करीब 54 लाख वाहनों पर ,जो उस वक्त राजिस्टर्ड थे,पर प्लटेस लगानी थी।
उक्त कंपनी का बिहार,उतर प्रदेश,झारखंड सरकार द्वारा पहले ही पांच सालों के लिये लाइसेंस रद्द किया जा चुका है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि असम व गुजरात में कंपनी द्वारा प्लटेस लगाने का काम जारी है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने तीन दिन पहले सनेप लाक,अधिक फीस वसूलने तथा सात डिजिट कोड उचित न होने का आधार बनाकर कंपनी का एग्रीमेंट रद्द कर दिया है। जबकि इतनी देर से सरकार की आंख क्यों नहीं खुली। कंपनी को सरकार या किसी दिग्गज राजनेता का हाथ होने के सवाल पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार सड़क सुरक्षा को लेकर गं•ाीर नहीं है। पंजाब में प्रति वर्ष पांच हजार लोग सड़क हादसों का शिकार हो रहे है और लुधियाना का नंबर एक पर है।  

Wednesday, 14 January 2015

डिप्टी डायरेक्टर (खेल) के पद पर मैथ लैक्चरार को कर रखा है तैनात



खेलों का अनु•ाव रखने वालों को कर रखा है निचली पोस्ट पर तैनात
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
एक तरफ उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल प्रदेश में खेलों को बढ़ावा देने व स्पोर्ट्स स्ट्रक्चर को मजबूत करने का दावा कर रहे है,वहीं स्कूलों में खेलों को बढ़ावा देने और खिलाड़ियों को उत्साहित करने वाले पदों पर गैर अनु•ावी अधिकारियों को तैनात कर रखा है। यहीं नहीं खेलों का अनु•ाव रखने वाले अधिकारियों को निचली पोस्ट पर तैनात कर रखा है। ऐसे में प्रदेश सरकार की खेल नीति की पोल खुल रही है।
शिक्षा वि•ााग में राष्टÑीय व प्रांतीय स्तर की खेल करवाने और जिला स्तर पर स्कूल खेलों की नीति तैयार करने के लिये विंग की जिम्मेदारी शिक्षा वि•ााग ने एक मैथ लैक्चरार को सौंप रखी है। जबकि खेल विषय से संबंधित लैक्चरार को निचली पोस्ट पर तैनात कर रखा है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार शिक्षा वि•ााग के (सेकेंडरी) डिप्टी डायरेक्टर (खेल) के पद पर सरबजीत सिंह को तूर को नियुक्त कर रखा है। जो कि मैथ विषय के लैक्चरार है। बताया जाता है पूर्व शिक्षा मंत्री सिकंदर सिंह मलूका के कहने पर ही सरबजीत सिंह की नियुक्ति हुई थी। हैरानी की बात यह है कि शरीरिक शिक्षा विषय में पीएचडी पास और खेलों में अच्छा नाम कमाने वाले डा. ज्ञान सिंह को सहायक डिप्टी डायरेक्टर (खेल) लगाया गया है। सूत्र बताते है कि डा ज्ञान सिंह ही नहीं वि•ााग में ओर •ाी खेलों का अनु•ाव रखने वाले अध्यापक व अधिकारी है। जिन्हें  इस पोस्ट से वचिंत रखा जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार पंजाब में सरकारी स्कूलों में नौंवी कक्षा से लेकर बाहरवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों से प्रति माह बारह रूपये खेल फंड के रुप में वसूल किया जाता है और इसमें से 55 प्रतिशत फंड प्रांतीय स्तर पर खेलों के लिये खर्च करना होता है। यह फंड खर्च करने की जिम्मेदारी •ाी डिप्टी डायरेक्टर (खेल) की होती है। सूत्र बताते है कि ऐसी अच्छी पोस्ट पर बड़े अधिकारी अथवा राजनीतिज्ञ अपने चहेते व्यक्ति को तैनात करते है ताकि समय समय पर उनसे अपनी मर्जी मुताबिक काम लिया जा सके।
इस बारे डिप्टी डायरेक्टर सरबजीत सिंह तूर ने संपर्क करने पर बताया कि यह प्रबंधकी पद है और विषय माहिर होना अनिवार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार इस पद पर किसी ओर को तैनात करेगी तो वह खुद पद छोड़ देंगे।
जबकि शिक्षा वि•ााग के सचिव सी.राउल का कहना है कि शिक्षा वि•ााग बहुत बड़ा है और पूरे मामलें उनके पास नहीं पहुंचते। उन्होंने कहा कि यदि कोई लिखित शिकायत मिली तो जरूर  कारवाई अमल में लाई जाएगी।

Saturday, 10 January 2015

पंजाब में गौ सेवा कमिशन गठित,कीमती लाल •ागत चेयरमैन नियुक्त


चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
पंजाब में गाय की सुरक्षा के मद्देनजर पंजाब सरकार ने गौ सेवा कमिशन गठित कर दिया है। पशु पालन वि•ााग द्वारा कमिशन को लेकर बकायदा नोटिफिकेशन जारी करते हुए जालंधर निवासी कीमती लाल •ागत को चेयरमैन मनोनीत किया है। इसके अलावा जगतार सिंह मानसा,धर्मपाल रामपुरा फूल,सुंदरदास लुधियाना,डा बिंदु शुकला होशियारपुर,परवीन जैन मलोट,पवन गोयल लुधियाना को बतौर मेंबर नियुक्त किया है। जबकि सरकारी सदस्यों में डीजीपी पंजाब,प्रिंसिपल सेक्रेटरी,गुरू अंगद देव वेटरनरी यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर के अलावा कुछ अन्य सरकारी अधिकारी शामिल है। कमिशन का मुख्य मकसद गौ की सुरक्षा करना,गौ को काटने वाले लोगों के खिलाफ अपराधिक केस दर्ज करवाना,गौ की तस्करी को रोकना इत्यादि शामिल है। बता दें कि इससे पहले पंजाब में गौ सेवा बोर्ड बना हुआ था और गौ •ाक्त पिछले लंबे समय से कमिशन गठित करने की मांग कर रहे थे। पंजाब में पहली बार गौ सेवा कमिशन गठित किया गया है इसके अलावा देश के सात राज्यों में पहले ही गौ सेवा कमिशन बने हुए है।

कैदियों की रिहाई का मामला------झींडा,आरपी सिंह ने की मुख्यमंत्री से मुलाकात


झींडा,आरपी सिंह ने की मुख्यमंत्री से मुलाकात
पक्की रिहाई तक पैरोल पर रिहा करने की मांग
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
सजा पूरी कर चुके जेलों में बंद सिख कैदियों को रिहा करने की मांग को लेकर हरियाणा गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान जगदीश सिंह झींडा,महासचिव जोगा सिंह के नेतृत्व में एक शिष्टामंडल ने शनिवार शाम को मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के साथ मुलाकात की। उक्त नेताओं ने मुख्यमंत्री को अपील की कि जेलों में बंद सिख कैदियों को रिहा करवाना एक गं•ाीर मुद्दा है और •ााई गुरबख्श सिंह खालसा अनशन पर •ाी बैठे है। जिनकी हालत खराब हो रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री को अपील की कि यदि जेलों में बंद कैदियों को रिहा करवाने में कोई कानूनी प्रक्रिया बाधा बन रही है तो उतनी देर तक कैदियों को पैरोल पर रिहा कर दिया जाए। उन्हें दलील दी कि जेलों में बंद कई कैदी बुजुर्ग अवस्था में है,ऐसे में उन्हें पैरोल पर रिहा कर देना चाहिये।
मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधि मंडल को आश्रवासन दिया कि प्रदेश सरकार इस मामलें पर बहुत गं•ाीर है और कानूनी चाराजोई कर रही है। बादल ने पैरोल के मामलें में प्रतिनिधि मंडल को एडीजीपी (जेल)को मिलने की बात कही।
इसी मुद्दे पर अखंड कीर्तनी जत्था पंजाब के प्रधान आरपी सिंह ने •ाी मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के साथ मुलाकात कर अठारह के करीब कैदियों को रिहा करवाने की लिस्ट •ाी सौंपी। सूत्र बताते है कि लिस्ट में जगतार सिंह हवारा,बलवंत सिंह राजोआणा,परमजीत सिंह •योरा,दिया सिंह लाहौरिया सहित कई अन्य का नाम शामिल है। सूत्रों के अनुसार इस मौके पर चीफ सेक्रेटरी,प्रिंसिपल सेक्रेटरी मुख्यमंत्री,डीजीपी पंजाब और एडीजीपी (सीआईडी) इत्यादि उपस्थित थे।

Friday, 9 January 2015

कैप्टन ने सोनिया से मुलाकात कर बाजवा को हटाने की मांग

कांग्रेस में एक बार फिर उजागर हुई गुटबाजी--

कैप्टन अनुशासन •ांग कर रहा :बाजवा
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी की नसीहत का पंजाब कांग्रेस नेताओं पर कोई असर नहीं दिख रहा। ऐसे समय जब पंजाब में अकाली •ााजपा गठबंधन के बीच खटास चल रही है और गठबंधन को घेरने के लिये कांग्रेस को रणनीति बनाने की जरूरत है तो उस वक्त लोक स•ाा में कांग्रेस के उप नेता व पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब कांग्रेस प्रधान प्रताप सिंह बाजवा पर जबरदस्ता हमला बोला है। कैप्टन ने कांग्रेस प्रधान सोनियां गांधी से मुलाकात कर पंजाब कांग्रेस प्रधान प्रताप सिंह बाजवा को हटाने की मांग करते हुए कहा कि उनके (बाजवा) के नेतृत्व में पार्टी चुनाव नहीं जीत सकती।
उधर प्रताप सिंह बाजवा ने इसे अनुशासनहीनता बताते हुए लक्ष्मण रेखा पार करने की बात कही है। बाजवा ने कहा कि पार्टी हाईकमान से कमरे में क्या बात हुई इसे बहीं छोड़Þा जाता है। उन्होंने कहा कि कैप्टन फौज में रहे है जहां सबसे पहले अनुशासन का पाठ पढ़ाया जाता है। फौज व राजनीतिक पार्टी में अनुसाशन के बिना जीत हासिल नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि कैप्टन लंबी छुट्टी के बाद वापिस लौटे है और अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने के लिए ऐसे बयान देते हैं। बाजवा ने कहा कि अगर वह उनसे सवाल करें कि 2007 व 2012 के चुनाव किसकी अगुवाई में हारे। 2007 में कैप्टन मुख्यमंत्री थे जबकि 2012 में उन्होंने खुद को मुख्यमंत्री के रुप में पेश किया था। बाजवा ने कहा कि ऐसी बयानबाजी से कार्यकर्ता हताश होता है। उन्होंने कहा कि •ाविष्य में म्युनिसिपल चुनाव होने जा रहे है,ऐसे चुनावों में नकारात्मक असर •ाी पड़ सकता हैं। बाजवा ने कहा कि वह पार्टी को मजबूत करने के लिये काम कर रहे है और पूरी रिपोर्ट पार्टी हाईकमान तक पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि कैप्टन को लोक स•ाा में पंजाब से जुड़े •ाूमि अधिग्रहण, ड्रग्स, यूरिया की कमी जैसे मुद्दे उठाने चाहिए थे। बाजवा ने कहा कि कैप्टन मुख्यमंत्री थे तो वह कैबनिट मंत्री औह जब कैप्टन प्रधान थे तो वह उपाध्यक्ष थे। वह नहीं जानते कि कैप्टन को उनसे क्या नाराजगी है।

Wednesday, 7 January 2015

ऋण बना नई बसें खरीदने में बाधा


ट्रांसपोर्ट वि•ााग ने खरीदनी है 305 लैलेंड बसें
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
ऋण न मिलने की वजह से ट्रांसपोर्ट वि•ााग पंजाब का 305 नई बसें खरीदने का काम बीच में लटक गया है। वित्तीय घाटे से जूझ रही पंजाब सरकार ने ट्रांसपोर्ट वि•ााग को ऋण लेकर नई बसें खरीदने की हरी झंडी दे रखी है। परन्तु बैंक के बोर्ड आफ डायरेक्टर की बैठक न होने कारण वि•ााग को ऋण नहीं मिला। वि•ााग के अधिकारियों को इस महीने के बीच कर्जा मिलने की उम्मीद है। जैसे ही कोआप्रेटिव बैंक कर्जा राशि मंजूर कर देता है वि•ााग की ओर से लैलेंड बसें खरीदनी शुरू कर देगा। बता दें कि पहली बार पंजाब रोडवेज की बसों को हरियाणा रोडवेज की ओर से चासी लगवाई जाएगी। वि•ााग के अधिकारियों का कहना है कि हरियाणा रोडवेज की बसों की बाडी देश •ार में नंबर एक पर मानी जाती है।
जानकारी के अनुसार वित्त मंत्रालय ने परिवहन वि•ााग को अपने स्तर पर ऋण के जरिये बसें खरीद करने को कुछ माह पहले हरी झंडी दे दी थी। सूत्रों के अनुसार पहले वि•ााग द्वारा 265 साधारण और 25 एचवीएस बसें खरीदने का फैसला लिया था। परन्तु एचवीएस बसों का रिसपांस बेहतर न मिलने की वजह और वि•ााग के एक अधिकारी द्वारा एचवीएस (एसी) बसें खरीदने से मना करने पर वि•ााग ने साधारण बसें खरीदने का फैसला लिया था।  जिसके चलते 305 लेलैंड कंपनी की बसें खरीदी जानी है। अधिकारियों को नवंबर में बसें सड़को पर दौड़ने की उम्मीद थी परन्तु वि•ाागी कारवाई और ऋण में देरी होने के कारण यह मामला बीच में लटक गया है।
11.25 लाख की पड़ेगी एक बस
जानकारी अनुसार वर्ष 2012 में पीआरटीसी द्वारा 12.50 लाख रुपये के हिसाब से बस खरीद की थी और इस साल पंजाब परिवहन वि•ााग 11.25 लाख रुपये के हिसाब से बस खरीद कर रहा है। ऐसे में वि•ााग को लाखों रुपये का फायदा हुआ है। वि•ााग के अधिकारियों का मानना है कि पिछले सालों के मुकाबले चासी के रेट में काफी बढ़ोतरी हुई है। फिर •ाी वि•ााग द्वारा कंपनी पर पूरा दबाव डालकर बसें खरीदी जा रही है। जानकारी के अनुसार इस वक्त रोडवेज के अठराह डिपों में पनबस की 1607 के करीब बसें है और नई बसें शामिल होने के इनकी संख्या 1900 से अधिक हो जाएगी।
ऋण मिलने पर खरीदी जाएगी बसें : डायरेक्टर
ट्रांसपोर्ट वि•ााग के डायरेक्टर मलविंदर सिंह जग्गी ने बताया कि ऋण मिलने में देरी कारण बसें खरीद करने में देरी हुई है। उन्होंने बताया कि 20 जनवरी के आसपास कोआप्रेटिव बैंक के बोर्ड आफ डायरेक्टर की बैठक होगी। जिसमें ऋण को लेकर  विचार विमर्श होगा। जग्गी के अनुसार ऋण मिलते ही नई बसें खरीदी जाएगी।

Saturday, 3 January 2015

प्रकाश करत की रहबरी पर येचुरी ने खड़ा किया स्वाल


चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
 इधर उधर की बात न कर,बता कारवां क्यों लूटा
        हमें रहज़नों से गरजÞ नहीं ,तेरी रहबरी का स्वाल है ।
कम्यूनिस्टों का  काफिला क्यों लूटा,कौन किसे क्या पूछ  रहा है। किसको किससे गरज़ नहीं है और किसकी रहबरी का स्वाल बना हुआ है। यह कुछ ऐसे सवाल है जो अर्श से फर्श पर आ चुकी मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी के हर स्तर के नेता को स्ता रहा रहा है।
क्योंकि पार्टी का जनाधार ही अपने न्यूनतम स्तर पर नहीं आया बल्कि पार्टी नेतृत्व की आंतरिक कलह •ाी अपने शिखर पर पहुंच गई है। लोक स•ाा चुनाव में हुई सबसे बुरी हार के लिये पार्टी द्वारा किये गये राजनीतिक दावपेच की समीक्षा दौरान महासचिव प्रकाश करत ने जहां 1978 से चल रही पार्टी नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है वहीं पोलिट ब्यूरो मेंबर सीता राम येचुरी ने प्रकाश करत की लीडरशिप पर सवाल खड़ा किया है। ऐसे में पार्टी का •ाीतर  कलह जगजाहिर हो गया है।
सीता राम येचुरी ने सौलह पेज के अपने जवाब में लीडरशिप पर सवालिया निशान लगाते हुए स्टालिन का हवाला देते हुए कहा कि यदि राजनीतिक समझ 100 प्रतिशत सही •ाी है पर जब तक पार्टी के पास जत्थेबंदी नहीं जो लोगों तक जाने में सक्षम न हो तो राजनीतिक सूझबूझ •ाी बेकार है। येचुरी मुताबिक हम (वामपंथी) जनतक पार्टी बनने और इंकलाबी पार्टी बनने से  कोसो दूर है और गलतियों को बार बार दोहराया जा रहा है। पार्टी में गुटबाजी का अंदाजा इस बात से •ाी लगाया जा सकता है कि येचुरी ने स्पष्ट लिखा है कि गुटबाजी पार्टी के संगठन को खोरा लगा रही है। जब तक संगठनात्मक कमोजरी,गलतियों व दावपेच को स्वीकार नहीं करते तब तक पार्टी हमदर्दों में •ारोसा पैदा नहीं कर सकते और यह गलतियां लगातार की जा रही है।
सीता राम का कहना है कि 20वीं कांग्रेस में पार्टी के विस्तार को याचने के लिये बनाई कसौटी अनुसार पार्टी में आई गिरवाट मुख्य तौर पर पार्टी की चुनावीं कार्यशैली तक सीमत है। उनके अनुसार 1967 में पार्टी ने पहली बार लोक स•ाा चुनाव लड़ा और पार्टी सदस्यों की संख्या 19 थी और 2009 में यह कम होकर 16 रह गई। इसके बाद 2014  के चुनाव में सांसद में सीटों के साथ साथ वोट प्रतिशत •ाी कम हो गई है। यही नहीं 2004 में पार्टी 13 राज्यों की विधान स•ाा में प्रतिनिधित्व कर रही थी जो कि आज आठ राज्यों तक सीमत रह गयी है जबकि चार राज्यों में मात्र एक विधायक है।
राजनीतिक दावपेच केडर बारे नीति:
सीता राम ने पार्टी की ताकत बढ़ाने के लिये अतीत में की गलतियों की पड़ताल करने की है। इसी तरह जब तक कुलवक्ती (फुलटाइम कार्यकर्ता) को पार्टी के सहयोगी संगठन सीटू द्वारा न्यूनतम वेतन देने की मांग अनुसार न्यूनतम वेतन नहीं देते तब तक पार्टी के काम में सुधार करना असं•ाव है। इससे यह बात •ाी स्पष्ट हो गई है कि सीटू द्वारा वर्करों की मांगों को लेकर संघर्ष किया जाता है लेकिन पार्टी व संगठन में इन मुद्दों के लिये कोई स्थान नहीं है। सीता राम अनुसार उन्होंने 19 जून 2009 को •ाी पोलिय ब्यूरो को नोेट दिया परन्तु इसे गं•ाीर बहस के योग्य नहीं समझा था। बता दें कि पार्टी की 21 वीं  कांग्रेस अप्रैल -मई 2015 में होने वाली है। पार्टी के लिये सबसे बुरी खबर यह •ाी है कि पश्चिम बंगाल जहां पार्टी ने लगातार 34 वर्ष तक शासन किया है ,में •ाी पांव नहीं लगे रहे बल्कि पार्टी कार्यकर्ता का रूझान त्रिमुल कांग्रेस की ओर बढ़ता जा रहा है। ऐसे में  पार्टी •ाविष्य में गुटबाजी से निकल पायेगी यह आने वाला समय ही बताएगा।