नियमों को ताक पर रखकर लगाई गई पलेट्स
जय सिंह छिब्बर
चंडीगढ़ : हरियाणा में वर्ष 2012 से 2014 तक करीब 10 लाख वाहनों और पंजाब में 13 लाख 19 हजार वाहनों पर लगी हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेटस (एचएसआरपी) सुप्रीम कोर्ट के आदेश एवं ट्रांसपोर्ट विभाग के दिशानिर्देश अनुसार उचित नहीं है। पंजाब सरकार पहले ही नंबर प्लटेस लगाने वाली कंपनी का एग्रीमेंट रद्द कर चुकी है। ऐसे में सवाल पैदा होता है कि वाहनों पर लगी हाई सिक्योरटी नंबर प्लटेस गैरकानूनी है ?
इसका खुलासा यातायात नियमों के विशेषज्ञ एवं पंजाब स्टेट रोड सेफ्टी काउंसिल के पूर्व सदस्य डा. कमलजीत सोई ने किया है। सोमवार को पत्रकारवार्ता दौरान बताया कि साढ़े चार लाख की करीब लोगों ने वाहनों पर नंबर प्लटे्स लगाने को फीस जमा करवा रखी है और कंपनी करोड़ों रुपये कमा कर फुर्रर हो गई है।
डा. सोई और एडवोकेट सरीन उप्पल ने कहा कि हरियाणा में हाई सिक्योरटी प्लटे्स लगाने का एग्रीमेंट उत्सव सेफ्टी प्राइवेट लिम.कंपनी को अलाट हुआ था,परन्तु मिलीभगत से लिंक प्वाइंट कंपनी की ओर से हरियाणा ,दिल्ली,मध्यप्रदेश में नियमों को ताक पर रखकर नंबर प्लट्ेस लगाई गई। उन्होंने बताया कि उत्सव कंपनी के एमडी ने बकायदा हरियाणा सरकार को लिंक प्वाइंट कंपनी की ओर से प्लटेस लगाने की शिकायत की थी। उन्होंने इस मामलें की सीबीआई,विजिलेंस अथवा न्यायिक जांच की मांग की। डा.सोई ने बताया कि वर्ष 2010 दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को हाई सिक्योरटी नंबर प्लटेस लगाने के आदेश जारी करते हुए बकायदा नंबर का साइज,होलोग्राम (लोगो) ,सनैप लाक और सात अंकों का कोड नंबर अंकित करने को कहा था ताकि देश में कही भी वाहन को ट्रेस किया जा सके। सोई ने कहा कि प्रदेश सरकार ने वर्ष 2011 में एग्रोस इम्पैक्स इंडिया प्राइवेट लिमटिड कंपनी के साथ एग्रीमेंट किया था जिसने महाराष्ट: में लगाए गये रेट से 33 प्रतिशत रेट कम वसूल कर करीब 54 लाख वाहनों पर ,जो उस वक्त राजिस्टर्ड थे,पर प्लटेस लगानी थी। उक्त कंपनी का बिहार,उतर प्रदेश,झारखंड सरकार द्वारा पहले ही पांच सालों के लिये लाइसेंस रद्द किया जा चुका है।
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