Friday, 31 July 2015

कोर्ट का समय बरबाद करने पर याचि को दो लाख रुपये हरजाना

हाईकोर्ट का याचिकाकर्ता को बड़ा झटका
कोर्ट का समय बरबाद करने पर याचि को दो लाख रुपये हरजाना
याची ने सुखबीर बादल खिलाफ दायर कर रखी थी याचिकाएं
कोर्ट के 440 घंटे बरबाद करने का आरोप
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल सहित अन्य उच्चाधिकारियों के खिलाफ करीब ढाई सौ याचिकाएं डालकर कोर्ट का समय बरबाद करने के आरोप में याचिकाकर्ता नरेश सहगल को दो लाख रुपये कास्ट डाली है। इसके तहत हाईकोर्ट ने रजिस्टरी शाखा को भविष्य में याचिकाकर्ता की ऐसी याचिका को न मंजूर करने के निर्देश जारी किये है। हाईकोर्ट ने याचि खिलाफ कड़ा रूख अपनाते हुए फरीदकोट के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट को निर्देश दिये है कि यदि याची नरेश सहगल दो माह के भीतर उक्त राशि का भुगतान नहीं करता तो उनके खिलाफ कड़ी कारवाई की जाए। जानकारी अनुसार याची नरेश सहगल ने हाईकोर्ट में झूठी जानकारी देने के साथ साथ कुछ जानकारी को छिपाकर भी रखा है।
हाईकोर्ट के मुताबिक याची ने कोर्ट के करीबन 440 घंटे बरबाद किये है और साल 2003 से अब तक करीब 250 याचिकाएं दायर की है। यह समय कोर्ट किसी अन्य याचिकाओं के फैसले के लिये लगा सकता था। लेकिन नरेश सहगल ने अपनी पब्लिसिटी के लिये कोर्ट का समय बरबाद किया है।
कोर्ट में मंजूर नरेश सहगल ने माफी मांगी जिसके चलते कोर्ट ने उन्हें जेल भेजने तथा आपराधिक कारवाई को अमल में नहीं लाया परन्तु सबक सिखाने के लिये उसे दो लाख रुपये  कास्ट जरूर डाल दी है ताकि लोगों को कोर्ट का समय बरबाद करने पर उनके खिलाफ कैसा व्यवहार किया जाएगा का पता चल सकेे।
बता दें कि नरेश सहगल ने उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल के खिलाफ गलत जानकारी देकर उकना चुनाव रद्द करने,केस दर्ज करने,पास्पोर्ट जब्त करने इत्यादि याचिकाएं डाल रखी थी।
र्


Tuesday, 21 July 2015

डीपीआई सेकेंडरी ने हाईकोर्ट में मांगी माफी




लेक्चरार पद पर नियुक्ति को लेकर रिश्वत मांगने का मामला
6 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
 पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में लंबित एक मामलें को सुलझाने के लिये डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन के दो मुलाजिमों द्वारा एक महिला लेकचरार से रिश्वत मांगने के मामलें में डीपीआई पंजाब बलवीर सिंह ने हाईकोर्ट में माफी मांगी है। जस्टिस अरूण पल्ली ने मामलें पर सुनवाई 6 अगस्त तक स्थिगत कर दी है। लेकचरार अंग्रेजी के पद पर नियुक्ति को लेकर हाईकोर्ट में लंबित याचिका के मामलें को सुलझाने के दायर याचिका की सुनवाई दौरान मंगलवार को डीपीआई (सेकेंडरी) के डीलिंग हैंड सुखविंदर सिंह तथा कानूनी सहायक सुनील द्वारा रिश्वत की मांग के मामले पर डीपीआई सेकेंडरी एजूकेशन बलबीर सिंह ने माफी मांगी है।
डीपीआई ने अपने जवाब में कहा कि दोनों कर्मचारियों पर भारी जुर्माना लगाने के लिए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इसके जवाब में कर्मचारियों ने चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर याची के पति से मिलने की बात को तो स्वीकार किया है लेकिन रिश्वत की बात से साफ मना कर दिया है। दोनों कर्मचारियों को चार्जशीट जारी कर भर्ती शाखा बदल दिया गया है। बता दें कि लेकचरार की नियुक्ति की मांग को लेकर याची नवदीप कौर को डीपीआई (सेकेंडरी) कार्यलय में केस डील कर रहे डीलिंग हैंड सुखविंदर सिंह का फोन आया कि उन्हें कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई से पहले ही नियुक्ति पत्र जारी किया जा सकता है यदि वे तीन से चार लाख रुपये खर्च करें। नवदीप के पति अवतार सिंह ने फोन पर इस सारी बातचीत को रिकार्ड कर लिया। डीलिंग हैंड सुखविंदर सिंह ने ला अफसर सुनील से भी उनकी फोन पर बात करवाई थी। तय प्रोग्राम अनुसार 2& मई को सुबह दस बजे के करीब सुखविंदर सिंह ने अपने साथी सुनील के साथ अवतार सिंह से एक घंटे मुलाकात भी की। दोनों कर्मचारिोयं ने कहा था कि फाइल ने को कई जगहों से गुजरना है। जिस कारण उन्हें तीन -चार लाख रुपये रिश्वत देनी होगी और राशि अदा न करने पर कोर्ट में उनकी नियुक्ति का विभाग विरोध करेगा और याची के केस जीत जाने पर भी विभाग आसानी से नियुक्ति न देकर उन्हें परेशान करेगा और सही जगह नियुक्ति नहीं दी जाएगी। यह सारी बात याची के पति ने रिकार्ड की थी।
इस मामलें की अगली सुनवाई 6 अगस्त को होगी।


10 सितंबर तक करें किसानों को गन्ने की बकाया राशि का भुगतान

हाईकोर्ट के हरियाणा व पंजाब सरकार को निर्देश
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा एवं पंजाब सरकार द्वारा किसानों की गन्ने की बकाया राशी का भुगतान न करने के एक मामलें की सुनवाई करते हुए दोनों राज्यों की सरकारों को 10 सितंबर तक बकाया राशि का भुगतान करने के आदेश जारी किये है। मंगलवार को जस्टिस एसके मित्तल व जस्टिस एचएस सिद्बू के आधारित खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए दोनों सरकारों को फटकार लगाते हुए कहा कि वह किसानों को जैसे तैसे अदायगी करें। इस मामलें पर अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी।
पंजाव व हरियाणा राज्य के किसानों को गन्ने की बकाया राशि का भुगतान न करने को लेकर समाज सेवी संस्था लोक भलाई इंसाफ वेलफेयर सोसायटी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रखी है। याची अनुसार पंजाब में शुगर मिलों ने किसानों का करीब 700 करोड़ तथा हरियाणा में शुगर मिलों ने  किसानों का 900 करोड़ रुपये का भुगतान करना है। शुगर मिलों द्वारा किसानों की बकाया राशि का भुगतान नहीं किया जा रहा। जिससे किसानों की आर्थिक हालत खराब हो रही है और किसान परेशान हैं। याचिका में कहा गया कि पंजाब में 1 अक्टूबर 2014 से 15 अप्रैल तक किसानों द्वारा बेची गई गन्ने की फसल का 700 करोड़ रुपये लंबित है। सरकार किसान हितैषी होने का दम भर रही है। दूसरी ओर हरियाणा में हालात और भी बदतर हैं। हरियाणा के किसानों को उनकी फसल के करीब 900 करोड़ रुपये की बकाया राशि नहीं मिल रही। याची ने कहा कि किसानों को अपनी फसल बेचने के बावजूद उन्हें पैमेंट को लेकर तरसना पड़ रहा है।
मंगलवार को सुनवाई दौरान दोनों राज्यों के सरकारी वकीलों ने कोर्ट को जवाब में बताया कि केंद्र सरकार गन्ने के भुगतान को लेकर 6000 करोड़ रुपये ऋण देने की नीति तैयार कर रही है। ऐेसे में सभी राज्यों के किसानों को बकाया राशि का भुगतान किया जाएगा। कोर्ट ने सख्त रूख अख्तियार करते हुए कहा कि केंद्र पाल्सी बनाए या नहीं ,दोनो राज्य की सरकारें जैसे तैसे 10 सितंबर तक गन्ने की बकाया राशि का भुगतान करें।




Friday, 17 July 2015

मुख्यमंत्री एवं अनिल विज के बीच मतभेद फिर हुए उजागर


ब्रांड एम्बेसडर की नियुक्ति से स्वास्थ्य मंत्री दुखी
मुख्यमंत्री को बताया जंगल का शेर
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
 बालीवुड अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा को बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम की ब्रांड एम्बेसडर नियुक्त करने से मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री अनिल विज के बीच मतभेद एक बार फिर उजागर हो गये है। हालांकि विज ने मुख्यमंत्री के साथ मतभेद होने की खबर को सिरे से नकारते हुए अपना मित्र बताया है। लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि भारतीय राजनीति में मुख्यमंत्री बाहुवली होता है तथा मुख्यमंत्री के  पास पूरे अधिकार होते है और वह कुछ भी कर सकते है। परन्तु ब्रांड एम्बेसडर की नियुक्ती को लेकर उन्हें अथवा विभाग को कोई नॉलज नहीं है। 
अनिल विज ने जहां मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की तुलना जंगल के शेर व मंत्रियों की तुलना आम आदमी से की वहीं यहां तक कह दिया कि उनका विभाग बेटी बचाओ मुहिम को चलाने में सक्षम है। विभाग में किसी भी ब्रांड एम्बेसडर की जरूरत नहीं है। ऐसे में बेची बचाओ बेटी पढ़ाओं प्रोग्राम को लांच करने के लिये 21 जुलाई को गड़गांव में स्थित प्रोग्राम में अनिल विज के शामिल होने पर भी असमंसज पैदा हो गया है।
शुक्रवार को अपने कार्यलय में कुछ चुनिंदा पत्रकारों से बातचीत दौरान कहा कि उन्हें बीते रात सोशल मीडिया में हरियाणा सरकार द्वारा ब्रांड एम्बेसडर नियुक्त करने की खबरों से यह जानकारी मिली थी। विज ने कहा कि ब्रांड एम्बेसडर को लेकर कभी भी विभाग में चर्चा नहीं हुई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने कल उनसे 21 तारीख को प्रोग्राम होने और फरी रहने की बात कही थी परन्तु इस बारे कोई बातचीत नहीं हुई। उन्होंने कहा कि बेटी बचाना स्वास्थ्य विभाग और बेटी पढ़ाना शिक्षा विभाग का काम है और दोनों विभागों को इस बारे कोई जानकारी नहीं है। विज ने कहा कि विभाग के डाक्टरों की मेहनत कारण पीएनडीटी एक्ट को सख्ती से लागू किया जा रहा है और लिंग अनुपात का आंकड़ा बढ़ा है और नाचने गाने से बेटी नहीं बचने लगी। बता दें कि हरियाणा सरकार ने गुरूवार को बालीवुड अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा को स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को बिना भरोसे में लिये ब्रांड एम्बेसडर नियुक्त कर दिया। जिससे अनिल विज विभाग में दखल अंदाजी से क्रोधित हो गये।
प्रत्येक जिले में होंगे 44 कोच भर्ती ---
अनिल विज ने कहा कि खेल विभाग में बड़ी तबदीली की जा रही है और खेल नीति तहत भर्ती किये गये खिलाड़ियों को लेकर कानूनी विचार विमर्श किया जा रहा और ऐसा निमय बनाया जा रहा है कि खेल कोटे से भर्ती होने पर खिलाड़ी न्यूनतम छह साल तक खेलें या फिर खेल मैदान में खिलाड़ियों को ट्रेनिंग दे। उन्होंने कहा कि जल्द ही प्रदेश में 624 कोचों की भर्ती की जा रही है और इस वक्त 414 कोच है। इसी के साथ सभी जिलों में खेलों को बढ़ावा देने के लिये रैसेलाइजेशन किया जा रहा है। उन्होंने खुलासा करते हुए बताया कि कई जिलों में ऐसे कोच तैनात है जहां उस खेल का कोई खिलाड़ी भी नहीं है। 

Thursday, 16 July 2015

केंद्रीय मंत्री चौधरी वरिंदर सिंह डिफाल्टर घोषित

घर बनाने,कार खरीदने को लिया कर्जा वापिस न करने का आरोप
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
करीब चार दशकों से राजनीति कर रहे वरिष्ठ नेता एवं केंद्रीय मंत्री चौधरी वरिंदर सिंह ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उन्हें अपनी ही सरकार में अपमानित होना पड़ सकता है। देश के ग्रामीण विकास व पंचायती विभाग के मंत्री और पांच बार हरियाणा विधान सभा में हरियाणा की प्रतिनिधित्व करने वाले चौधरी वरिंदर सिंह को हरियाणा विधान सभा ने डिफाल्टर घोषित कर दिया है। चौधरी पर करीब 35 लाख रुपये का ऋण न चुकाने का आरोप है। जिसकी वजह से विधान सभा ने यह फैसला लिया है। विधान सभा के सूत्रों मुताबिक चौधरी वरिंदर सिंह ने कार खरीदने एवं हाउस बनाने के लिये करीब 35 लाख रुपये ऋण लिया था। जानकारी अनुसार चौधरी वरिंदर सिंह ने घर बनाने के लिये दो बार 12.50 लाख रुपये का कर्जा लिया। इसके अलावा दस लाख रुपये कार खरीदने के लिये अलग से कर्जा लिया था।  बकाया ऋण का भुगतान करने के लिये विधान सभा कार्यलय की तरफ से चौधरी वरिंदर सिंह को तीन-चार बार नोटिस भेजे गये परन्तु उन्होंने नोटिस को गंभीरता से नहीं लिया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केंद्र और हरियाणा में भाजपा की सरकार है। अपनी ही सरकार में एक केंद्रीय मंत्री के खिलाफ इतना बढ़ा फैसला लेना हैरानीजनक है। इसलिये विधान सभा कार्यलय ने कर्जा की अदायगी न करने पर उन्हें डिफाल्टर घोषित किया है।
ओर विधायकों ने भी ले रखा है कर्जा:
विधान सभा के विश्वनियता सूत्रों का कहना है कि बहुत सारे मौजूदा व पूर्व विधायकों ने भी कर्जा ले रखा है। परन्तु उनके कर्जा का भुगतान उन्हें दी जाती पैंशन से काट लिया जाता है। चौधरी वरिंदर सिंह सांसद बन गये और सांसद चुने जाने पर नियमों मुताबिक उन्हें विधान सभा से पैंशन नहीं दी जाती। जिसकी वजह से उनके बकाया राशि का भुगतान रूक गया था।
यह है राजनीतिक कैरियर :
चौधरी वरिंदर सिंह बीते 38 सालों से राजनीति की दुनिया में है। चौधरी को पांच बार हरियाणा के लोगों ने विधान सभा में भेजा है और दो बार वह सांसद और एक बार राज्य सभा सदस्य रहे है। जानकारी के अनुसार वह पहली बार 1977 में विधायक चुने गये थे। इसके बाद 1982 से 84 तक,1994-96 तक,1996 से 2000 तक और 2005 से 2009 तक विधायक रहे। वह हरियाणा के कैबेनिट मंत्री भी रहे है। इसी तरह दो बार हिसार संसदीय क्षेत्र से सांसद चुने गये। किन्तु पूर्व मुख्यमंत्री भुपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ सबंध अच्छे न होने के चलते उन्होंने कांग्रेस का हाथ छोडक़र भाजपा का दामन थाम लिया था।

Friday, 10 July 2015

अमित शाह आधा दर्जन राज्यों के विधायकों,मंत्रियों की लेंगे क्लास

मंत्री अपना अपना रिपोर्ट बनाने में जुटे
12 को होगी दिल्ली में मीटिंग
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह 12 जुलाई को करीब आधा दर्जन राज्यों के पार्टी के विधायकों और जिन राज्यों में पार्टी की सरकारें है,के मंत्रियों की क्लास लेंगे। पार्टी अध्यक्ष द्वारा क्लास लेने से हरियाणा के मंत्रियों में हडक़ंप मचा हुआ है और सभी मंत्री अपना अपना रिपोर्ट कोर्ड तैयार करने में जुटे हुए है। यह पहली बार है कि किसी राष्ट्रीय पार्टी का अध्यक्ष अपनी पार्टी के विधायकों और मंत्रियों की क्लास लेगा। क्योंकि अक्सर प्रदेश से संबंधित मामलों के प्रभारी ही बैठक लेते है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पार्टी हाईकमान को शिकायतें मिल रही है कि जहां जहां पार्टी की सरकारें वहां मंत्रियों और विधायकों के बीच तालमेल नहीं है। तालमेल न होने की वजह से जहां पार्टी कार्यकर्ताओं में मायूसी का आलम है वहीं इसका लोगों में सरकार को लेकर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। सूत्र बताते है कि  हरियाणा में मंत्रियों व विधायकों के बीच संबंध मधुर नहीं है और इनकी शिकायतें ज्यादा हाईकमान के पास पहुंच रही है।
हाईकमान का आदेश आने के बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की कैबेनिट के सभी मंत्री अपना अपना रिपोर्ट कार्ड बनाने में जुटे हुए है कि सरकार के नौ माह के कार्यकाल दौरान क्या क्या किया है। मंत्रियों को डर सता रहा है कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह किस विभाग के बारे में क्या  पूछ लें। इसीलिये वे किसी किसम की कोताही नहीं बरतना चाहते क्योंकि यह पहली बार है कि पार्टी अध्यक्ष सरकार के कामकाज का लेखा जोखा लेंगे कि सरकार ने लोग हित में क्या कया काम किया है। प्रधान मंत्री नरिंदर मोदी की ओर से शुरू की गई योजनाओं पर क्या क्या अमल हुआ है और लोगों का क्या रिसपांस मिल रहा है। इन सभी बातों का मीटिंग में जिक्र होगा। सूत्र बताते है कि हरियाणा के अलावा पंजाब,जम्मू कशमीर,दिल्ली,राजस्थान,उतराखंड इत्यादि राज्यों के पार्टी विधायक मीटिंग में हिस्सा लेंगे। सूत्र बताते है कि सभी राज्यों के नेताओं के साथ अलग अलग मीटिंग होगी।
हरियाणा प्रदेश भाजपा के प्रभारी अनिल जैन ने अमित शाह द्वारा मीटिंग लेने की पुष्टि करते हुए कहा कि पार्टी अध्यक्ष द्वारा कई राज्यों के विधायकों,मंत्रियों के साथ मीटिंग कर रहे है,जिनमें हरियाणा राज्य भी शामिल है।

Wednesday, 8 July 2015

कई मायने रखता है मुख्यमंत्री का बस सफर

 ---
धरातल की समस्याएं और लोगों की नब्ज टटोल रहे है सीएम
बस में सीएम के साथ साथ -----
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा सरकारी वाल्वो बस में सफर करना कोई छोटी मोटी बात नहीं है। भले ही विपक्ष इसे सियासत से जोडक़र देख  रहा हो और अफसरशाही को भी यह अटपटा लगता हो। पर मुख्यमंत्री के सरकारी बस में सफर करने के कई मायने है। मुख्यमंत्री ने स्वयं पहल कर सरकार में शामिल अन्य मंत्रियों,विधायकों एवं अफसरशाही को भी यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह देश व सूबे के हित के लिये सरकारी खर्च पर कटौती करे।
बिलकुल सादगी,बिना ला लश्कर,बिना कोई सुरक्षाकर्मी जहां तक कि पायलट के बिना बुधवार को सुबह चंडीगढ़ से करनाल तक करीबन ढाई घंटे तक बस सफर किया। बसे में सफर दौरान ऐसा प्रतीत हो रहा था कि मानों कि बस में सूबे का मुखिया सीएम नहीं आम लोग ही सफर कर रहे है। मुख्यमंत्री ने जहां एक एक कर यात्रियों से मुलाकात कर उनका हालचाल पूछा वहीं उनसे सूबे की स्थिति को लेकर मन की बात पूछी। यही नहीं जिसने मुख्यमंत्री को किसी समस्या से अवगत करवाया तो मुख्यमंत्री ने उसी से समाधान करने का तरीका भी पूछा। इसके अलावा प्रदेश व केंद्र सरकार की कार्यशैली को लेकर भी लोगों से बातचीत की।
बस में सफर करने को लेकर पूछे सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके पास आज समय था। इसलिये उन्होंने बस में सफर करने को पहल दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह जहाज में सफर करते है तो उन्होंने सोचा कि आज बस में सफर किया जाए। यदि सडक़ मार्ग जाते है तो रोड पर बहुत सुरक्षा लगती है। ऐसे में लोगों को भी परेशानी होती है।
क्या भविष्य में भी बस में सफर जारी रखेंगे ,इसके जवाब में उन्होंने कहा कि जब उन्हें फ्री समय मिलेगा तो वह ऐसे ही बस में सफर करेंगे।  वाल्वो बस की जगह साधारण बस और ग्रामीण एरिया को क्यों नहीं चुना तो उन्होंने बताया कि आज उनका करनाल में प्रोग्राम था। भविष्य में ग्रामीण एरिया में साधारण बसों में भी सफर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दिनों दिन ट्रेफिक बढ़ रही है। ऐसे में लोगों को बसों व रेलों में सफर करने को पहल देनी चाहिये। इससे देश व सूबे की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी और सडक़ों पर ट्रेफिक कम होगी व प्रदूषण भी कम होगा। कुल मिलाकर मुख्यमंत्री ने बस में सफर कर सूबे की ब्यूरोक्रेसी, राजनीतिज्ञों को साधारण जिंदगी बसर करने और सरकारी खर्च पर कटौती करने का मैसेज देने की कोशिश की है।  जैसे पौधारोपण करने के बाद इसकी छाया कई सालों बाद मिलती है ठीक उसी तरह मुख्यमंत्री के प्रयास का असर आने वाले समय में देखने को मिलेगा।
बाक्स --
वई झूठ न बोला हम तो सिफराश से लगा.......
जिस बस में सीएम ने सफर किया उसके टायर की चंडीगढ़ से चलते वक्त ही टूटी टूट गई थी। जिसके चलते टायर बदलने के लिये बस चालक  बस को रोडवेज वर्कशाप ले गये। वर्कशाप में कूड़ा कक्र्ट होने और टायर,ट्यूब व अन्य समान इधर उधर बिखड़ा होने पर मुख्यमंत्री ने  चेहरे पर कोई गुस्सा नहीं दिखा। मुख्यमंत्री ने रोडवेज अधिकारी को पूछा कि आप घर में भी ऐसे कूड़ा कक्र्ट रखते है तो अधिकारी ने जवाब दिया नहीं। मुख्यमंत्री ने प्यार से समझाया कि जब घर में सफाई रखते है तो जहां भी रखा करो। यह भी आपका घर है। इसी दौरान मुख्यमंत्री ने परिचालको को पूछा कि सबसे बड़ी समस्या क्या है तो एक परिचालक ने कहा कि उन्हें अपने पास दो-ढाई सौ रुपये रखने की अनुमति है जबकि सुबह पहले टाइम पर बस चलाने समय खुले पैसे न होने पर काफी परेशानी आती है ऐसे में दो तीन हजार रुपये कैश रखने की अनुमति चाहिये। इसी दौरान कर्मचारियों ने ओर भर्ती व बसे डालने की भी मांग की। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार एक हजार के करीब नई बसें डालने को लेकर काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने पूछा कि क्या आप सिफराश से लगे है कि अपने दम पर। तो एक कर्मचारी ने कहा कि वाई झूठ न बोला हम तो सिफराश से लगा। उसके परिजन की मौत हो गई थी जिसके चलते उन्हें नौकरी मिली है समझो सिफराश से ही नौकरी मिली।

Monday, 6 July 2015

आईपीएएस नौनिहाल सिंह के जमीन खरीद मामलें की विजिलेंस जांच के आदेश

हाईकोर्ट का फैसला ------
आईपीएएस नौनिहाल सिंह के जमीन खरीद मामलें की विजिलेंस जांच के आदेश
विजिलेंस को छह माह में जांच कर जरूरी कदम उठाने को कहा
लुधियाना के दो सगे भाईयों ने दायर की थी याचिका
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब केडर के आईपीएस अधिकारी (यूटी के पूर्व एसएसपी) नौनिहाल सिंह व अन्य द्वारा दो सौ करोड़ रुपये की जमीन खरीदने के मामलें की विजिलेंस जांच के आदेश दिये है। हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच की मांग को लेकर दायर याचिका पर सोमवार को सुनवाई करते हुए सीबीआई मांग को नकारते हुए छह माह के भीतर विजिलेंस जांच के आदेश दिये है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद आईपीएस अधिकारी नौनिहाल सिंह, उनके भाई गुजरात कैडर के आईएएस अधिकारी रूपवंत सिंह और उनके ससुर हवा सिंह जो कि हरियाणा के पूर्व एडवोकेट जनरल है,की मुशिकलें बढ़ सकती है।
लुधियाना निवासी जसविंदर पाल सिंह तथा उसके भाई हरमीत सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि पंजाब केडर के आईपीएस अधिकारी नौनिहाल सिंह,उसके भाई गुजरात कैडर के आईएएस अधिकारी रूपवंत सिंह, ससुर हरियाणा के पूर्व एडवोकेट जनरल हवा सिंह हुडा और भतीजे लवलीन सिंह ने तमिलनाडु व आंध्र प्रदेश में करोड़ों रुपये की करीबन दो सौ एकड़ कामीन खरीद की है। शिकायतकर्ताओं ने सीबीआई जांच की मांग करते हुए कहा कि वह 2002 में नौनिहाल के एसएसपी लुधियाना रहते समय उनके संपर्क में आए थे। तमिलनाडु में करोड़ों रुपये की जमीन बेनामी ट्रांजेक्शन के जरिए खरीद की है। याची अनुसार तमिलनाडु लैंड रिफोर्मस (फिक्सेशन ऑफ सिलिंग ऑन लैंड) एक्ट 1961 के मुताबिक पांच लोगों के परिवार का सिलिंग एरिया 30 एकड़ है। इसी तरह वैट लैंड की खरीद पर भी सिलिंग लिमिट 27 एकड़ है। डबल क्राप  वैट लैंड पर यह लिमिट 18 एकड़ है। ऐसे में जमीन की खरीद नहीं की जा सकती थी।
जस्टिस एजी मसीह ने याचिका पर सुनवाई करते हुए विजिलेंस को छह माह के भीतर मामलें की जांच करने और जरूरी कदम उठाने के निर्देश देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया है।
डीआईजी पीएपी तैनात है नौनिहाल सिंह --
नौनिहाल सिंह इस वक्त पंजाब पुलिस में डीआईजी आम्र्ड पुलिस फोर्स के पद पर तैनात हैं जबकि रूपवंत सिंह गुजरात के इंडस्ट्रियल एक्सटेंशन ब्यूरो के एमडी हैं। जबकि हवा सिंह हुडा हरियाणा में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुडा सरकार में एडवोकेट जनरल थे।

Friday, 3 July 2015

युवाओं को अंधकार में डोब रहे है नर्सिंग कालेज


नियमों के विपरीत चल रहे है छह दर्जन से अधिक कालेज
प्रदीप कासनी ने की विजिलेंस जांच की सिफारश
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
प्रदेश में छह दर्जन के करीब नर्सिंग कालेज कानून एवं नियमों को ताक पर रखकर  चल रहे है। नर्सिंग में विद्यार्थियों का भविष्य बनाने की बजाए यह युवाओं को अंधकार में डोब रहे है और तय फीसों से ज्यादा फीसे वसूल कर मोटी कमाई कर रहे है। इसका खुलासा वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रदीप कासनी ने अपनी एक रिपोर्ट में किया है। मेडिकल एजुकेशन व रिसचर्च के निर्देशक पद से ट्रांसफर होने से पहले प्रदीप कासनी ने सरकार को एक विशेष रिपोर्ट सौंपी है जिसमें नर्सिंग कालेजों को लेकर चल रहे गोरखधंधे की विजीलेंस जांच करवाने की सिफारश की गई है। एक तरफ नर्सिंग कालेजों के छात्र उनका रिजल्ट घोषित करने की मांग को लेकर  धरना प्रदर्शन कर रहे है वहीं दूसरी ओर वरिष्ठ अधिकारी प्रदीप कासनी ने सरकार को विजिलेंस जांच करवाने की सिफारश करते हुए रिपोर्ट सौंप दी है। इससे सरकार कसूती स्थिति में फंस गई है।
सबसे अहम बात यह है कि प्रदीप कासनी ने अपनी रिपोर्ट में सूबे में बनी मेडिकल काउंसिल के असिस्त्व पर ही सवाल खड़ा कर दिया है क्योंकि हरियाणा में मेडिकल काउंसिल पंजाब मेडिकल काउंसिल एक्ट के अनुसार चल रही है। उक्त एक्ट मुताबिक हरियाणा में चल रही मेडिकल काउंसिल की सभी गतिविधियां गलत है। क्योंकि पंजाब सरकार ने मेडिकल काउंसिल एक्ट 1934 में संशोधन कर लिया है परन्तु हरियाणा सरकार ने इसमें संशोधन तक नहीं किया। ऐसे में विद्यार्थियों की डिग्री को लेकर बड़ी कानूनी अड़चन पैदा हो सकती है। 
सूत्र बताते है कि प्रदीप कासनी ने अपनी रिपोर्ट में अंकित किया है कि प्रदेश में कई नर्सिंग कालेज ऐसे सामने आये है ,जो सिर्फ दो तीन कमरों में चल रहे है। यही नहीं कई नर्सिंग कालेजों की बिल्डिंग ने के नीचे कोई यूनियन का दफ्तर अथवा दुकान चल रही है ऊपरली बिल्डिंग में नर्सिंग कालेज चल रहा है।
वरिष्ठ अधिकारियों की भी मिलीभगत ------
सूत्र बताते है कि कई नर्सिंग कालेज सियासी नेताओं अथवा उनके सगे संबंधियों के है। सियासी नेताओं के अलावा स्टेट के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी अपने हाथ रंगे है। रिपोर्ट में ऐसे अधिकारियों के खिलाफ विजिलेंस जांच कर आय से अधिक संपति अर्जित करने को लेकर केस दर्ज करने की भी सिफारश की गई है। बताया जाता है कि अधिकारियों व कर्मचारियों ने नर्सिंग कालेज के मालिको,संचालकों से मोटी रकम वसूली है।
भले ही प्रदीप कासनी की रिपोर्ट पर अंतिम फैसला मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने लेना है परन्तु जिस ढंग से प्रदीप कासनी ने अपनी रिपोर्ट तैयार की है उससे नर्सिंग कालेजों में शिक्षा लेने वाले विद्यार्थियों के भविष्य पर भी सवालिया निशान लग गया है। अगर सरकार प्रदीप कासनी की रिपोर्ट मुताबिक जांच करवाती है तो सियासी नेताओं के साथ साथ कई वरिष्ठ अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है।