सरकार की उदासीनता के चलते—
मिल चालू करने,गन्ने का दाम बढ़ाने को लेकर असमंसज बरकरार
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
किसानों को फसली चक्कर से निकालने एवं प्रदेश में इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिये अकाली •ााजपा गठबंधन सरकार लाखों दावे कर रही है,किन्तु हकीकत कोसो दूर है। सरकार की उदासीनता के चलते पंजाब की शूगर इंडस्ट्री पर खतरे के बादल मंडरा रहे है। प्रदेश की कुल पंद्रह सहकारी मिलों में से छह मिल तो पहले ही लंबे समय से बंद पड़ी है,जबकि शेष 9 मिलों को चलाने के लिये शूगरफेड द्वारा अ•ाी तक कोई पक्की तारीख निशचित नहीं की गई है। इसके अलावा शूगरफेड एवं प्रदेश सरकार गन्ने के रेट में वृद्धि करने को लेकर •ाी कोई फैसला नहीं कर सकी। यह बात अलग है कि मुख्यमंत्री द्वारा शूगरफेड अधिकारियों को 20 नवंबर के बाद शूगर मिल चालू करने के दिशानिर्देश दिये गये है। शूगरफेड के सूत्रों अनुसार कोआप्रेटिव वि•ााग के अधीन प्रदेश में पंद्रह शूगर मिल है,जबकि प्राइवेट सैक्टर की आठ मिल है। इनमें से अजनाला,बटाला,•ोगपुर,बुढेआल,फाजीलिका,गुरदासपुर,मोरिंडा,नकोदर व नवाशहर को चालू किया जाएगा। जबकि रखड़ा (पटियाला),जीरा,तरनतारन,फरीदकोट,जगराओ व बुढ़लाडा लंबे समय से बंद पड़ी है। इसी तरह प्राइवेट सैक्टर की कुल आठ में सात बुटर सेवीया,धूरी,फगवाड़ा,दसूहा,मुकेरिया,अमलोह व किड़ी अफगाना चालू हालत में है। जबकि पातड़ा मिल पिछले साल बंद हो गई थी।
यह है गन्ने नीचे रकबे की स्थिति
वित्तीय वर्ष दौरान प्रदेश में 53264 हैक्टेयर रकबा गन्ने की फसल अधीन है। बीते साल 2012-13 दौरान 51427 हैक्टेयर रकबा था और शूगर मिलों ने 161.72 लाख क्विंटल गन्ने की पिराई की थी और इस साल 169.50 लाख क्विंटल गन्ने की पिराई करने का लक्ष्य रखा गया है। यदि पिछले एक दशक की बात करें तो किसानों का गन्ने की बिजाई करने से मोह •ांग हो गया था क्योंकि कर्जा के बोझ नीचे दबी शूगर मिले किसानों को गन्ने की अदायगी सही समय नहीं कर सकी। किसानों को गन्ने की पेमेंट लेने के लिये धरना प्रदर्शन,सड़कों तक उतरना पड़ा था। वर्ष 2008-09 दौरान प्रदेश में 85.48 लाख हेक्टेयर रकबे में गन्ने की बिजाई की गई थी और 2009-10 दौरान रकबा कम होकर
53.29 लाख हैक्टेयर रह गया। गन्ने नीचे रकबा कम होने से शूगरफेड अधिकारियों के हाथ पांव फूल गये तो अधिकारी किसानों को गन्ना बीजने के लिये प्रेरित करने लगे। वर्ष 2010-11 में 91.40 लाख हेक्टेयर और 2011-12 दौरान 144.23 लाख हेक्टेयर रकबा हो गयाल।
गन्ने का रेट बढ़ने की सं•ाावना नहीं
सबसे अहम बात यह है कि सरकार द्वारा अ•ाी तक गन्ने के रेट में बढ़ोतरी करने को लेकर कोई फैसला नहीं किया गया। सूत्रों के अनुसार शूगरकेन कंट्रोल बोर्ड द्वारा गन्ने का दाम तय किया जाता है अ•ाी तक कंट्रोल बोर्ड मीटिंग तक नहीं कर सका। पिछले साल सरकार ने 290 रुपये प्रति क्विंटल गन्ने का रेट तय किया था। जबकि पड़ौसी राज्य हरियाणा ने इस साल किसानों को 310 रुपये प्रति क्विंटल रेट देने की घोषणा कर दी है।
बुढलाडा व जगराओं शूगर मिल सरकार ने बेची
जानकारी अनुसार वर्ष 2013 में सरकार ने बुढलाडा व जगराओं शुगर मिल क्रमश 14.52 करोड़ व 19.52 करोड़ रुपये में बेच दी थी। जबकि शेष मिलों को चालू करने के लिये •ाी सरकार गं•ाीर नहीं दिख रही है। उधर शूगरफेड की मैनेजिंग डायरेक्टर कमलजीत कौर बराड़ ने सत्य स्वदेश को बताया कि बीस नवंबर के बाद शूगर मिल चालू करने पर विचार किया जा रहा है फिलहाल कोई पक्की तारीख निश्चित तय नहीं की है। उन्होंने कहा कि रेट बढ़ाना सरकार की जिम्मेदारी है।
मिल चालू करने,गन्ने का दाम बढ़ाने को लेकर असमंसज बरकरार
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
किसानों को फसली चक्कर से निकालने एवं प्रदेश में इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिये अकाली •ााजपा गठबंधन सरकार लाखों दावे कर रही है,किन्तु हकीकत कोसो दूर है। सरकार की उदासीनता के चलते पंजाब की शूगर इंडस्ट्री पर खतरे के बादल मंडरा रहे है। प्रदेश की कुल पंद्रह सहकारी मिलों में से छह मिल तो पहले ही लंबे समय से बंद पड़ी है,जबकि शेष 9 मिलों को चलाने के लिये शूगरफेड द्वारा अ•ाी तक कोई पक्की तारीख निशचित नहीं की गई है। इसके अलावा शूगरफेड एवं प्रदेश सरकार गन्ने के रेट में वृद्धि करने को लेकर •ाी कोई फैसला नहीं कर सकी। यह बात अलग है कि मुख्यमंत्री द्वारा शूगरफेड अधिकारियों को 20 नवंबर के बाद शूगर मिल चालू करने के दिशानिर्देश दिये गये है। शूगरफेड के सूत्रों अनुसार कोआप्रेटिव वि•ााग के अधीन प्रदेश में पंद्रह शूगर मिल है,जबकि प्राइवेट सैक्टर की आठ मिल है। इनमें से अजनाला,बटाला,•ोगपुर,बुढेआल,फाजीलिका,गुरदासपुर,मोरिंडा,नकोदर व नवाशहर को चालू किया जाएगा। जबकि रखड़ा (पटियाला),जीरा,तरनतारन,फरीदकोट,जगराओ व बुढ़लाडा लंबे समय से बंद पड़ी है। इसी तरह प्राइवेट सैक्टर की कुल आठ में सात बुटर सेवीया,धूरी,फगवाड़ा,दसूहा,मुकेरिया,अमलोह व किड़ी अफगाना चालू हालत में है। जबकि पातड़ा मिल पिछले साल बंद हो गई थी।
यह है गन्ने नीचे रकबे की स्थिति
वित्तीय वर्ष दौरान प्रदेश में 53264 हैक्टेयर रकबा गन्ने की फसल अधीन है। बीते साल 2012-13 दौरान 51427 हैक्टेयर रकबा था और शूगर मिलों ने 161.72 लाख क्विंटल गन्ने की पिराई की थी और इस साल 169.50 लाख क्विंटल गन्ने की पिराई करने का लक्ष्य रखा गया है। यदि पिछले एक दशक की बात करें तो किसानों का गन्ने की बिजाई करने से मोह •ांग हो गया था क्योंकि कर्जा के बोझ नीचे दबी शूगर मिले किसानों को गन्ने की अदायगी सही समय नहीं कर सकी। किसानों को गन्ने की पेमेंट लेने के लिये धरना प्रदर्शन,सड़कों तक उतरना पड़ा था। वर्ष 2008-09 दौरान प्रदेश में 85.48 लाख हेक्टेयर रकबे में गन्ने की बिजाई की गई थी और 2009-10 दौरान रकबा कम होकर
53.29 लाख हैक्टेयर रह गया। गन्ने नीचे रकबा कम होने से शूगरफेड अधिकारियों के हाथ पांव फूल गये तो अधिकारी किसानों को गन्ना बीजने के लिये प्रेरित करने लगे। वर्ष 2010-11 में 91.40 लाख हेक्टेयर और 2011-12 दौरान 144.23 लाख हेक्टेयर रकबा हो गयाल।
गन्ने का रेट बढ़ने की सं•ाावना नहीं
सबसे अहम बात यह है कि सरकार द्वारा अ•ाी तक गन्ने के रेट में बढ़ोतरी करने को लेकर कोई फैसला नहीं किया गया। सूत्रों के अनुसार शूगरकेन कंट्रोल बोर्ड द्वारा गन्ने का दाम तय किया जाता है अ•ाी तक कंट्रोल बोर्ड मीटिंग तक नहीं कर सका। पिछले साल सरकार ने 290 रुपये प्रति क्विंटल गन्ने का रेट तय किया था। जबकि पड़ौसी राज्य हरियाणा ने इस साल किसानों को 310 रुपये प्रति क्विंटल रेट देने की घोषणा कर दी है।
बुढलाडा व जगराओं शूगर मिल सरकार ने बेची
जानकारी अनुसार वर्ष 2013 में सरकार ने बुढलाडा व जगराओं शुगर मिल क्रमश 14.52 करोड़ व 19.52 करोड़ रुपये में बेच दी थी। जबकि शेष मिलों को चालू करने के लिये •ाी सरकार गं•ाीर नहीं दिख रही है। उधर शूगरफेड की मैनेजिंग डायरेक्टर कमलजीत कौर बराड़ ने सत्य स्वदेश को बताया कि बीस नवंबर के बाद शूगर मिल चालू करने पर विचार किया जा रहा है फिलहाल कोई पक्की तारीख निश्चित तय नहीं की है। उन्होंने कहा कि रेट बढ़ाना सरकार की जिम्मेदारी है।