Wednesday, 29 October 2014

शूगर मिल इंडस्ट्री पर मंडरा रहे है खतरे के बादल

सरकार की उदासीनता के चलते—

मिल चालू करने,गन्ने का दाम बढ़ाने को लेकर असमंसज बरकरार
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
किसानों को फसली चक्कर से निकालने एवं प्रदेश में इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिये अकाली •ााजपा गठबंधन सरकार लाखों दावे कर रही है,किन्तु हकीकत कोसो दूर है। सरकार की उदासीनता के चलते पंजाब की शूगर इंडस्ट्री पर खतरे के बादल मंडरा रहे है। प्रदेश की कुल पंद्रह सहकारी मिलों में से छह मिल तो पहले ही लंबे समय से बंद पड़ी है,जबकि शेष 9 मिलों को चलाने के लिये शूगरफेड द्वारा अ•ाी तक कोई पक्की तारीख निशचित नहीं की गई है। इसके अलावा शूगरफेड एवं प्रदेश सरकार गन्ने के रेट में वृद्धि करने को लेकर •ाी कोई फैसला नहीं कर सकी। यह बात अलग है कि मुख्यमंत्री द्वारा शूगरफेड अधिकारियों को 20 नवंबर के बाद शूगर मिल चालू करने के दिशानिर्देश दिये गये है। शूगरफेड के सूत्रों अनुसार कोआप्रेटिव वि•ााग के अधीन प्रदेश में पंद्रह शूगर मिल है,जबकि प्राइवेट सैक्टर की आठ मिल है। इनमें से अजनाला,बटाला,•ोगपुर,बुढेआल,फाजीलिका,गुरदासपुर,मोरिंडा,नकोदर व नवाशहर को चालू किया जाएगा। जबकि रखड़ा (पटियाला),जीरा,तरनतारन,फरीदकोट,जगराओ व बुढ़लाडा लंबे समय से बंद पड़ी है। इसी तरह प्राइवेट सैक्टर की कुल आठ में सात बुटर सेवीया,धूरी,फगवाड़ा,दसूहा,मुकेरिया,अमलोह व किड़ी अफगाना चालू हालत में है। जबकि पातड़ा मिल पिछले  साल बंद हो गई थी।
यह है गन्ने नीचे रकबे की स्थिति
वित्तीय वर्ष दौरान प्रदेश में 53264 हैक्टेयर रकबा गन्ने की फसल अधीन है। बीते साल 2012-13 दौरान 51427 हैक्टेयर रकबा था और शूगर मिलों ने 161.72 लाख क्विंटल गन्ने की पिराई की थी और इस साल 169.50 लाख क्विंटल गन्ने की पिराई करने का लक्ष्य रखा गया है। यदि पिछले एक दशक की बात करें तो किसानों का गन्ने की बिजाई करने से मोह •ांग हो गया था क्योंकि कर्जा के बोझ नीचे दबी शूगर मिले किसानों को गन्ने की अदायगी सही समय नहीं कर सकी। किसानों को गन्ने की पेमेंट लेने के लिये धरना प्रदर्शन,सड़कों तक उतरना पड़ा था। वर्ष 2008-09 दौरान प्रदेश में 85.48 लाख हेक्टेयर रकबे में गन्ने की बिजाई की गई थी और 2009-10 दौरान रकबा कम होकर
53.29 लाख हैक्टेयर रह गया। गन्ने नीचे रकबा कम होने से शूगरफेड अधिकारियों के हाथ पांव फूल गये तो अधिकारी किसानों को गन्ना बीजने के लिये प्रेरित करने लगे। वर्ष 2010-11 में 91.40 लाख हेक्टेयर और 2011-12 दौरान 144.23 लाख हेक्टेयर रकबा हो गयाल।
गन्ने का रेट बढ़ने की सं•ाावना नहीं
सबसे अहम बात यह है कि सरकार द्वारा अ•ाी तक गन्ने के रेट में बढ़ोतरी करने को लेकर कोई फैसला नहीं किया गया। सूत्रों के अनुसार शूगरकेन कंट्रोल बोर्ड द्वारा गन्ने का दाम तय किया जाता है अ•ाी तक कंट्रोल बोर्ड मीटिंग तक नहीं कर सका। पिछले साल सरकार ने 290 रुपये प्रति क्विंटल गन्ने का रेट तय किया था। जबकि पड़ौसी राज्य हरियाणा ने इस साल किसानों को 310 रुपये प्रति क्विंटल रेट देने की घोषणा कर दी है।
बुढलाडा व जगराओं शूगर मिल सरकार ने बेची
जानकारी अनुसार वर्ष 2013 में सरकार ने बुढलाडा व जगराओं शुगर मिल क्रमश 14.52 करोड़ व 19.52 करोड़ रुपये में बेच दी थी। जबकि शेष मिलों को चालू करने के लिये •ाी सरकार गं•ाीर नहीं दिख रही है। उधर शूगरफेड की मैनेजिंग डायरेक्टर कमलजीत कौर बराड़ ने सत्य स्वदेश को बताया कि बीस नवंबर के बाद शूगर मिल चालू करने पर विचार किया जा रहा है फिलहाल कोई पक्की तारीख निश्चित तय नहीं की है। उन्होंने कहा कि रेट बढ़ाना सरकार की जिम्मेदारी है।  

Tuesday, 28 October 2014

पनबस के बेड़े में शामिल होंगी 305 नई लेलैंड बसें


कोआप्रेटिव बैंक से लिया जाएगा करीब 55 करोड़ रुपये कर्जा
हरियाणा रोडवेज का स्टाफ लगाएगा बाडी
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
कंडम एवं बसों की कमी से जूझ रहे पंजाब ट्रांस्पोर्ट वि•ााग ने पनबस स्कीम के तहत 305 नई बसें खरीद करने को हरी झंडी दे दी है। सबसे अहम बात यह है कि पहली बार पंजाब रोडवेज की बसों की चासी को हरियाणा रोडवेज का स्टाफ बाडी लगाएगा। ऐसा फैसला •ा्रष्टाचार को खत्म करने और एवं हरियाणा रोडवेज की बसों की बाडी देश •ार में नंबर एक पर मानी जाती है,के कारण लिया गया है। वित्त मंत्रालय ने परिवहन वि•ााग को अपने स्तर पर ऋण के जरिये बसें खरीद करने को हरी झंडी दे दी है। सूत्रों के अनुसार पहले वि•ााग द्वारा 265 साधारण और 25 एचवीएस बसें खरीद की जानी थी। परन्तु एक अधिकारी ने एचवीएस (एसी) बसें खरीदने से मना करते हुए इसके बदले साधारण बसें खरीदने को पहल दी। जिसके चलते अब 305 ,लेलैंड कंपनी की बसें खरीदने का फैसला कर लिया गया है। नवंबर माह के अंत तक कुछ बसें सड़को पर दौड़ने लग जाएगी। सूत्रों के अनुसार वर्ष 2012 में पीआरटीसी द्वारा 12.50 लाख रुपये के हिसाब से बस खरीद की थी और इस साल पंजाब परिवहन वि•ााग 11.25 लाख रुपये के हिसाब से बस खरीद कर रहा है। ऐसे में वि•ााग को लाखों रुपये का फायदा हुआ है। वि•ााग के अधिकारियों का मानना है कि पिछले सालों के मुकाबले चासी के रेट में काफी बढ़ोतरी हुई है। फिर •ाी वि•ााग द्वारा कंपनी पर पूरा दबाव डालकर बसें खरीदी जा रही है। जानकारी के अनुसार इस वक्त रोडवेज के अठराह डिपों में पनबस की 1607 के करीब बसें है और नई बसें शामिल होने के इनकी संख्या 1900 से अधिक हो जाएगी।
ठेकेदार को करेगा वि•ााग बाये बाये
पनबस में ठेके के आधार पर कार्यरत चालक व परिचालक को रोडवेज में शामिल करने के लिये वि•ााग द्वारा रणनीति बनाई जा रही है। सूत्रों के अनुसार वि•ााग ने 15 से 30 नंबवर के बीच ठेके के आधारित कर्मियों को रोडवेज में शामिल करने के लिये प्रक्रिया आरं•ा करेगा। बता दें कि ठेके पर आधारित कर्मी नियमित करने की मांग को लेकर बार बार हड़ताल करते थे,इससे लोगों को परेशानी के साथ साथ रोड़वेज को वित्तीय घाटा •ाी सहन करना पड़ता था। ऐसे में सरकार ने एक तीर से दो निशाने किये है। एक तो सरकार नियमित करने की शर्त तीन साल कर रही है दूसरा पंजाब में विधान स•ाा का चुनाव •ाी 2017 में होने है। ऐसे में 2017 तक सरकार को रोड़वेज,पनबस का चक्का जाम होने से राहत मिल जाएगी।
वि•ााग के डायरेक्टर •ाूपिंदर सिंह अनुसार ठेके पर आधारित कर्मियों को रोडवेज में शामिल करने के लिये नियम व शर्तों को लेकर रणनीति बनाई जा रही है। उनका कहना है कि ठेकेदार को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा और तीन साल तक कर्मचारी वि•ााग में काम करेगा इसके बाद अच्छी कार्यशैली दिखाने वाले को नियमित किया जाएगा। •ाूपिंदर सिंह के अनुसार जैसे जैसे बसों की बाडी लगती गई तैसे तैसे बसें वि•िान्न डिपों में पहुंचती रहेगी। वि•ााग को उम्मीद है कि 31 मार्च तक स•ाी बसें सड़कों पर दौड़ने लगेगी।


Monday, 27 October 2014

एक नवंबर से पंचकूला,मोहाली के थ्रीव्हीलर नहीं कर सकेंगे चंडीगढ़ प्रवेश


 यूटी प्रशासन अपने फैसले पर अड़िग
आटो चालकों ने किया प्रदर्शन,सीटीयू की बसें रोकने की धमकी
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
मोहाली व पंचकूला में रजिस्टर्ड डीजल आटो एक नवंबर से राजधानी में प्रवेश नहीं कर सकेंगे। ऐसे आटो रिकशा चंडीगढ़ में एंट्र करने पर बाउंड कर दिये जाएंगे। यूटी प्रशासन गैर कानूनी,बिना परमिट से चलने वाले पंजाब व हरियाणा राज्य के आटो के प्रवेश पर प्रतिबंद्ध लगाने के फैसले पर अडिग है।
दूसरी तरफ सोमवार को चंडीगढ़,मोहाली,पंचकूला आटो रिक्शा जवाइंट एक्शन कमेटी के बैनर तले सैंकड़ों रिकशा चालकों ने यूटी प्रशासन के खिलाफ सैक्टर 17 में जमकर प्रदर्शन किया। कमेटी के चेयरमैन कमल कांत द्रिवेदी ने कहा कि यदि प्रशासन ने उनकी मांग को  गं•ाीरता से नहीं लिया तो सीटीयू की बसें रोकी जाएगी।
क्या है मामला
बता दें कि ट्रांसपोर्ट वि•ााग की सेक्रेटरी •ाावना गर्ग ने दो माह पूर्व एक नवंबर से शहर में डीजल से चलने वाले आटोज पर प्रतिबंद्व लगाने के आदेश जारी किये थे। •ाावना गर्ग ने अपने आदेश में डीजल चालको को दो माह के •ाीतर अपने आटो में सीएनजी,एलपीजी गैस किट लगाने का समय दिया था ।  एक नवंबर के बाद पुलिस द्वारा पंचकूला व मोहाली से आने वाले डीजल आटो का चालान काट कर बाउंड किया जाएगा। प्रशासन ने यह फैसला शहर में बढ़ रहे प्रदूषण को कम करने के मद्देनजर लिया है। बताया जाता है कि प्रशासन ने 2009 के बाद पंचकूला ,मोहाली व अन्य शहरों से आने वाले आटो को कोई परमिट नहीं दिया था और चंडीगढ़ में रजिस्टर्ड डीजल आटो को उनकी समय अविधि तक ही चलने की अनुमति दे रखी है। प्रशासन के इस फैसले के खिलाफ आटो चालकों ने अदालत का दरवाजा •ाी खटखटाया था परन्तु उन्हें वहां से •ाी कोई राहत नहीं मिली थी।
 आटो चालकों ने किया प्रशासन खिलाफ प्रदर्शन:
सैक्टर 17 सर्कस मैदान में चंडीगढ़,मोहाली,पंचकूला आटो रिक्शा ज्वाइंट एक्शन कमेटी के बैनर तले सैकड़ों आटो चालकों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कमेटी के चेयरमैन कमल कांत द्रिवेदी,मनोहर,शाम लाल सहित अन्य ने कहा कि प्रशासन के तुगलकी फरमान से उनका कारोबार चौपट हो जाएगा। उनका कहना है कि शहर में सीटीयू की सैंकड़े बसे प्रदूषण फैलाती सड़कों पर दौड़ रही है उनकी तरफ प्रशासन का ध्यान नहीं है। जानकारी अनुसार डीजल आटो को लेकर प्रशासन के पास पुख्ता रिपोर्ट नहीं है। किन्तु शहर में दस हजार के करीब आटो सड़कों पर दौड़ रहे है। जबकि तीन हजार के करीब एलपीजी आटो है।
द्रिवेदी ने कहा कि प्रतिनिधि मंडल ने ट्रांस्पोर्ट वि•ााग के अधिकारियों के साथ बातचीत की है जिन्हें चार लोगों को बिठाकर चलने और रजिस्ट्रेशन को लेकर कागजात पूरे रखने की बात कही है। उनका कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि कल को अधिकारियों की होने वाली मीटिंग में समस्या का समाधान निकाला जाएगा।

बाक्स
गैर कानूनी चलते है आटो : •ाावना गर्ग
ट्रांस्पोर्ट वि•ााग की सेक्रेटरी •ाावना गर्ग ने सत्य स्वदेश को बताया कि 2009 से आटो शहर में गैर कानूनी ढंग से चल रहे है। आटो चालकों ने हाईकोर्ट का दरबाजा खटखटाया था और वहां से •ाी उन्हें कोई राहत नहीं मिली और यदि उन्हें कुछ गलत लग रहा है तो वह कोर्ट जा सकते है। उन्होंने कहा कि पंचकूला मोहाली में रजिस्टर्ड आटो को चंडीगढ़ प्रशासन ने कोई परमिट नहीं दे रखा। उन्होंने कहा कि डीजल से चलने वाले आटो को शहर में चलने नहीं दिया जाएगा।

Tuesday, 14 October 2014

सरकारी खजाना पर अघोषित पाबंदी,नहीं हो रहे बिल पारित


डीए की किश्त को लेकर मुलाजिम असमंसज में
चंडीगढ़: जय सिंह छिब्बर
•ाले ही अकाली •ााजपा गठबंधन सरकार सूबे की वित्तीय हालत सब ठीक होने के दावे कर रही है किन्तु बीते तीन माह से सरकारी कोष पर लगी पाबंदी के कारण प्रदेश के तीन लाख के करीब मुलाजिम बिल पारित नहीं होने से काफी परेशानी के दौर में  गुजर रहे है। यही नहीं सरकार 1 जनवरी से बकाया दस प्रतिशत डीए की किश्त का •ाुगतान •ाी नहीं कर सकी,जबकि एक जुलाई से बकाया डीए की किश्त पर फैसला लेने के लिये फाइल प्रिंसिपल वित्तीय सचिव के पास पड़ी है। यानी मुलाजिमों का 17 प्रतिश्त डीए का •ाुगतान पैडिंग पड़ा है और मुलाजिमों को इस बार काली दीवाली मनाने की आशंका बनी हुई है।
सबसे अहम बात यह है कि मुलाजिमों को जीपीएफ फंड का •ाी •ाुगतान नहीं हो रहा है जो कि मुलाजिमों का अपना खुद का पैसा होता है। मिली जानकारी के अनुसार सरकार के तय नियमों के अनुसार आठ फीसदी जीपीएफ का कटवाना अनिवार्य है। ऐसे में कई मुलाजिम अपनी •ाविष्य योजनाओं को लेकर जनरल प्रावीडेंट फंड (जीपीएफ) फंड पच्चीस फीसदी तक •ाी कटवाते है ताकि बच्चों के विवाह,शिक्षा व अन्य खर्च के लिये जरुरत पड़ने पर जीपीएफ निकलवाया जा सके। सूत्र बताते है कि एक जुलाई के बाद वेतन व मैडिकल बिलों को छोड़कर शेष स•ाी बिलों पर रोक लगी हुई है। दिलचस्प बात यह •ाी है कि असर रसूख रखने वाले अधिकारियों,कर्मचारियों के बिल सिफारश के अनुसार पारित •ाी किये जा रहे है। सूत्र बताते है कि पचास करोड़ रुपये लोन के बिल •ाी पारित नहीं हो सके। इसके अलावा एलटीसी,डीए,लोन,जीपीएफ,दफ्तरों को अन्य खर्च के बिल पारित नहीं हो रहे। सूत्र तो यह •ाी बताते है कि सविचालय में तैनात कर्मचारियों को वेतन तो समय पर मिल रहा है किन्तु फील्ड में कार्यरत कई वि•ाागों को अ•ाी •ाी वेतन नहीं मिला है। सरकार के किसी •ाी अधिकारी ने इस मामलें को लेकर मूंह नहीं खोला।
उधर गजटिड नान गजटिड एम्पलाइज आग्रेनाइजेशन के प्रधान करनैल सिंह सैनी ने सरकार से दीपावली से पहले डीए की किश्त रीलिज करने की मांग की है। जीपीएफ का •ाुगतान रोकने पर सैनी ने कहा कि मुलाजिम अपनी •ाविष्य योजनाएं को लेकर अपने वेतन में से जीपीएफ फंड कटवाता है ताकि जरुरत पड़ने पर इसे निकलवा सके। परन्तु फंड न मिलने कारण कई मुलाजिमों ने  कर्जा लेकर अपने बच्चों का विवाह किया है।

बादल परिवार खिलाफ गुरू को बोलना पड़ा महंगा, नवजोत सिद्धू की सुरक्षा घटाई


चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
•ााजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सांसद नवजोत सिद्धू को अकाली दल खासकर बादल परिवार के खिलाफ हरियाणा विधान स•ाा चुनाव प्रचार दौरान धुंआधार •ााषण करना महंगा पड़ गया है। हरियाणा विधान स•ाा चुनाव का परिणाम आने से पहले पंजाब सरकार ने अपना परिणाम देते हुए सिद्धू की ‘वाई श्रेणी’सुरक्षा में कट लगा दिया है। हालांकि  पंजाब पुलिस के अधिकारी इसे रूटीन में सुरक्षा कम करने की बात कह रहे है परन्तु राजनीतिज्ञ इसे राजनीतिक रंजिश मानते है।
बता दें कि हरियाणा विधान स•ाा चुनाव में इनेलो से गठबंधन पर
नवजोत सिद्धू ने अकाली दल की तीखी आलोचना की थी। पुलिस के आला अधिकारी इसे रुटीन रिव्यू बता
रहे हैं लेकिन इसे चुनाव प्रचार के दौरान अकालीदल के
खिलाफ की गई सिद्धू की टिप्पणी से जोड़ कर देखा जा रहा
है। जानकारी अनुसार •ााजपा के फायर ब्रांड नेता नवजोत सिंह को
पंजाब सरकार की ओर से वाई कैटगरी की सुरक्षा
मुहैया कराई गई है। इसमे पंजाब पुलिस के 6-8 पुलिस
कर्मचारी सिद्धू की सुरक्षा में लगे थे। जिनमें दो एनजीओ (थानेदार) रैंक के अधिकारी •ाी शामिल है। राष्टÑीय पार्टी का नेता,पूर्व सांसद व सेलीब्रेटी होने कारण वाई श्रेणी के जरिये पंजाब पुलिस द्वारा पायलट •ाी उपलब्लध करवाई जाती है। परन्तु पुलिस प्रशासन ने अचानक एक निर्णय लेते हुए सिद्धू की सुरक्षा को घटा दिया है। अब उनक ी सुरक्षा में पंजाब पुलिस के दो
जवान रहेंगे। एक आला पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने
की शर्त पर बताया कि पूर्व सांसदों की सुरक्षा में दो या
तीन जवानों को ही लगाया जाता है। जब उनसे पूछा गया
कि पुलिस ने क्या सरकार के निर्देश पर यह फैसला
लिया, अधिकारी ने कहा कि सिद्धू की सुरक्षा की समीक्षा
की जानी थी जो की गई है। इसे सियासत से जोड़ कर न
देखा जाए।
  उधर, पंजाब •ााजपा ने राज्य सरकार के इस निर्णय को
बेहद गं•ाीरता से लिया है। यह •ाी सं•ाावना जताई जा
रही है कि प्र्धानमंत्री कार्यालय के आदेश पर केंद्रीय
गृह मंत्रालय जल्द ही सिद्धूू की सुरक्षा की समीक्षा कर
उनकी सुरक्षा को और चाक चौबंद करे। सिद्धू की पत्नी एवं मुख्य
संसदीय सचिव नवजोत कौर तुरंत दिल्ली रवाना हो गई
हैं। समझा जाता है कि वह बुधवार को केंद्रीय गृह
मंत्री राजनाथ सिंह और अरुण जेतली से मुलाकात कर इस
मामले में हस्तक्षेप की मांग करेंगी। मालूम हो कि
हरियाणा में चुनाव प्रचार के दौरान नवजोत सिद्धू ने
इनेलो से गठबंधन करने वाले अकालीदल पर तीखा हमला
बोला था और इसे •ााजपा की पीठ में छुरा •ोंकने वाला
कदम करार दिया। सिद्धू के पंजाब सरकार खासकर
मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उप मुख्यमंत्री सुखबीर
बादल से सुखद नहीं रहे। अमृतसर के विकास प्रोजेक्टों
को लेकर उनकी ताबड़तोड़ बयानबाजी से मुख्यमंत्री
बादल •ाी खुद को असहज महसूस कर रहे थे।


Friday, 10 October 2014

लोक स•ाा चुनाव में कांग्रेस अपनी प्राप्ती ,नीतियों को उचित ढंग से पेश नहीं कर सकी-दिग्विजय

•ाारत -पाकि को फ्लैग मीटिंग करनी चाहिये :दिग्विजय
पार्टी विचारधारा से ऊपर हुई व्यक्तिगत विशेष की राजनीति

चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
•ाारत -पाकिस्तान के बीच तनाव की स्थिति दुर्•ााग्यपूर्ण है और दोनों देशों को फलैग मीटिंग करनी चाहिये क्योंकि दोनों देशों की समस्याएं एक जैसी है। ऐसे में दोनों देशों को मिलकर समस्या का सामधान करना चाहिये। यह बात आल इंडिया कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने कही। शुक्रवार को पत्रकारवार्ता दौरान दिग्विजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने क•ाी •ाी राष्टÑीय सुरक्षा पर राजनीति नहीं की किन्तु •ााजपा ने हमेशा सुरक्षा के नाम पर लोगों को गुमराह करने की राजनीति की है। उन्होंने पास्तिान द्वारा •ाारत के गांवों को निशाना बनाकर आम नागरिकों पर गोलिया बरसाने की निंदा करते हुए कहा कि यह कारवाई दोनों देशों के हित में नहीं है।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि दुख की बात है कि आज राजनीति पार्टी विचारचारा से हटकर व्यक्ति विशेष की बनकर रह गई है और व्यक्ति विशेष की विचारधारा पार्टी पर •ाारी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि दस सालों के शासन दौरान कांग्रेस ने देशवासियों के हित में काम किया परन्तु कांग्रेस विकास व नीतियों को सही ढंग से देशवासियों के सामने पेश नहीं कर सकी। इसके अलावा यूपीए सरकार व  कांग्रेस के खिलाफ जो माहौल बनने लगा था कांग्रेस उसका उचित ढंग से मुकाबला नहीं कर सकी। उन्होंने कहा कि देश में संप्रदायक •ाावना को बिगाड़ने का माहौल बनाया जा रहा है।
प्रधान मंत्री नरिंदर मोदी पर निशाना साधते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि देश में संबोधन दौरान वह कांग्रेस पर साठ वर्षों में कोई विकास न करने की बात करते है,जबकि विदेशों में जाकर •ाारत के तीव्र गति से विकास की बात करते है। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार की नीतियों को ही प्रधान मंत्री लागू कर रहे है। स्वच्छ •ाारत अ•िायान को निर्मल •ाारत के अंर्तगत फंड दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा देश के पहले पांच विकासशील देशों में आता है और हरियाणा की पुजीशन गुजरात से कहीं बेहतर है। प्रधान मंत्री को इस पर खुली बहस करवानी चाहिये। उन्होंने कहा कि दस सालों के साशन दौरान •ाुपिंदर सिंह हुड्डा ने शिक्षा,सेहत,खेलों,उद्योग व अन्य क्षेत्र में राज्यों को आगे लेकर गये है। दस वर्षों दौरान मुख्यमंत्री हुड्डा पर किसी •ाी तरह का •ा्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि •ा्रष्टाचार करने वाला कोई •ाी हो उसके खिलाफ कारवाई होनी चाहिये।
कांग्रेस प्रधान सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा को ला•ा पहुंचाने के सवाल पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि वाड्रा ने कोई कानून नहीं तोड़ा है,उसका कोई दोष नहीं है,उनका दोष सिर्फ गांधी नेहरू परिवार का दामाद होना है। उन्होंने कहा कि चुनाव दौरान ही वाड्रा का नाम सामने आता है। इसके बाद खत्म हो जाता है। उन्होंने विपक्ष को चेतावनी देते हुए कहा कि राजस्थान में तो •ााजपा की सरकार है तो वहां क्यों नहीं वाड्रा पर केस दर्ज किया जाता। उन्होंने कहा कि आरोप लगाने की बजाए विपक्ष को वाड्रा पर कानूनी कारवाई अमल में लानी चाहिये। परन्तु सच यह है कि वाड्रा ने कुछ गलत नहीं किया है।
कांग्रेस तीसरी बार सरकार बनाएगी
दिग्विजय सिंह ने कहा कि पिछले 10 साल में मुख्यमंत्री •ाूपेेंद्र सिंह हुड्डा ने हरियाणा की तस्वीर बदल दी है। 2005 में जब हुड्डा ने प्रदेश की कमान सं•ााली थी, तब और अब के हरियाणा में जमीन आसमान का अंतर आ चुका है। यही कारण है कि प्रदेश की जनता लगातार तीसरी बार कांग्रेस की सरकार बनाकर इतिहास बनाएंगे। कांग्रेस छोड़ •ााजपा में शामिल होने वाले नेताओं पर निशाना साधते हुए दिग्विजय ने कहा कि वह लोग बताए कि वह कांग्रेस अथवा •ााजपा की विचारधारा को पसंद करते है। अगर •ााजपा को पसंद करते है फिर चालीस साल तक क्यों कांग्रेस में बैठे रहे। पार्टी छोड़ने वालों का मकसद केवल अपनी महत्वाकांक्षा रही।
कैप्टन बाजवा का समझौता करवाएं हाईकमान
पंजाब कांग्रेस के प्रधान प्रताप सिंह बाजवा और पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच चल रहे वाकयुद्ध पर दिग्विजय सिंह ने कहा कैप्टन व बाजवा दोनों सीनियर नेता है। उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिये। पार्टी हाईकमान और पंजाब मामलों के प्र•ाारी को दोनों के बीच समझौता करवाना चाहिये।

Wednesday, 8 October 2014

84 दंगों पर अकाली दल की चुप्पी एक बड़ी साजिश :फूलका


दंगों पर राजनीति कर रहा है अकाली दल
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध वकील व आम आदमी पार्टी के नेता एचएस फूलका ने अकाली दल की लीडरशिप पर 84 कत्लेआम पर राजनीति करने तथा कुछ अकाली नेताओं पर गवाहों को मुकराने का आरोप लगाया है। फूलका का कहना है कि वर्षों से अकाली दल इस मुद्दे को लेकर धरने प्रदर्शन करता रहा है,अब केंद्र में नरिंदर मोदी के नेतृत्व सरकार को चार माह गुजर चुके है किन्तु अकाली दल ने चुप्पी साध रखी है। जिससे लगता है कि अकाली दल ने सिर्फ इस मुद्दे पर राजनीति से अलावा कुछ नहीं किया। फूलका ने कहा कि उन्हें 2007 में लिखी अपनी पुस्तक में •ाी इसका जिक्र किया था कि अकाली दल इस मामलें में राजनीति ला•ा लेने का ज्यादा इच्छुक है।
मंगलवार को प्रेसवार्ता दौरान फूलका ने कहा कि एक नवंबर 1984 को हुए सिख कत्लेआम के तीस साल होने वाले है और कत्लेआम के मुख्य आरोपी सजण कुमार व जगदीश टाइटलर इत्यादि के खिलाफ नगलोई पुलिस स्टेशन में चार सिखों को मारने के आरोप में केस दर्ज हुआ था। मामलें की लंबी जांच के बाद 8 अप्रैल 1992 को चार्जशीट तैयार हो गई थी,परन्तु आज तक चार्जशीट अदालत में पेश नहीं हो सकी। उन्होंने दुख जाहिर करते हुए कहा कि अकाली दल ने चार्जशीट पेश करने को लेकर दिल्ली में अनेक बार धरना प्रदर्शन किया परन्तु अब केंद्र में नरिंदर मोदी की सरकार आने पर अकाली दल खासकर मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल तथा उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने चुप्पी साध रखी है। जबकि दिल्ली में आप की कुछ दिनों की सरकार दौरान अरविंद केजरीवाल ने स्पेशल इनवेस्टीगेशन टीम (सिट) गठित कर दी थी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का जनरल अटार्नी जो पहले नरिंदर मोदी का निजी वकील रहा है,वह •ाी सजण कुमार व जगदीश टाइटलर के मामलें में पेश होता रहा है। उन्होंने कहा कि गुजरात दंगों के मामलें को खत्म करने के लिये 84 दंगों की •ाी बली दी जाएगी। उन्होंने सुखबीर बादल को चिट्ठी लिखकर एक नवंबर तक मोदी सरकार पर दबाव डालकर अदालत में चार्जशीट दायर करवाने की मांग की है। यदि शिअद प्रधान ऐसा नहीं करते तो वह (फूलका) अकाली दल का समर्थन देने वाली समूह राजनीतिक एवं धार्मिक संगठनों को शिअद को समर्थन न देने की अपील करेगा और देश में एक मुहिम चलाई जाएगी। फूलका ने दावा किया कि दिल्ली के कई अकाली नेताओं ने खुद गवाहों को मुकरने के लिये अहम •ाूमिका नि•ााई। उन्होंने कहा कि मामलें को लटकाना आरोपियों को फायदा पहुंचाना है।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में यूपीए सरकार से •ाी बुरे हालात बने हुए है। उन्होंने कहा कि इस मामलें को लेकर कुछ माह पहले केंद्रीय कानूनी मंत्री तथा श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार को •ाी चिट्ठी लिखी है क्योंकि जत्थेदार साहिबान ने अकाली दल के माध्यम से केस लड़ने का •ारोसा देकर उनका संघर्ष खत्म करवाया था।
 

Monday, 6 October 2014

हरेक 32 मिंट बाद एक किसान करता है खुदकशी


2012 तक 1,46,373 किसानों ने की जीवन लीला समाप्त
सुप्रीम कोर्ट ने पीआईएल पर केंद्र सरकार से मांगा जवाब
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
देश में प्रत्येक 32 मिंट बाद एक किसान आत्म हत्या कर रहा है। आत्म हत्या की वार्षिक औसतन 16,263 किसान तथा 45 किसान रोजाना की है। यह दावा पंजाब की एनजीओ यूथ कमल आर्गेनाइजेशन पंजाब द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई एक जनहित पटिशन में किया गया है। आगेर्नाईजेश्न (रजि.) ने डा.एमएस स्वामीनाथन की प्रधानगी में बनाए कमीश्न की सिफारिशों को लागू करने के लिये जनहित पटीशन (पी.आई.एल) दायर की और सुप्रीम कोर्ट ने पटिशन पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को एक माह के •ाीतर जवाब देने के आदेश जारी किये है। कमल आर्गेनाइजेशन द्वारा जनहित याचिका दायर करने से एक तरह किसानों को उनकी फसलें के अधिक मूल्य मिलने का रास्ता साफ होता नजर आने लगा है,क्योंकि स•ाी किसान यूनियनें पहले ही सरकार पर स्वामीनाथन की सिफारश को लागू करने की मांग करती आ रही है।
आर्गेनाइजेशन के प्रधान गुरमीत सिंह मान ने सोमवार को पत्रकारवार्ता कहा कि देश की साठ प्रतिशत आबादी सीधे व असीधे रूप में  खेतीबाड़ी पर निर्•ार है और कर्जे से तंग आकर किसानों द्वारा खुदकुशी करने का रूझान बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्व केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री हरीश रावत ने 19 नवंबर 2011 में राज्य स•ाा में लिखत रूप में माना है कि वर्ष 1995 से 2011 तक 2,90,740 किसान कर्जे व गरीबी से तंग आकर अपनी जीवन लीला खत्म कर चुके हैं। जबकि नैश्नल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक 2004 से 2012 तक 1,46,373 किसानों ने कर्जे, गरीबी व मंदहाली से तंग आकर खुदकुशी की हैं। पटीश्न में कहा गया है कि किसानों की खुशहाली व उनका जीवन स्तर  उंचा उठाने के लिए नैश्नल कमीश्न आफ फामर्स की ओर से डा.एस.एम.स्वामीनाथन की प्रधानगी में बनाई कमेटी ने 2006 में केन्द्रीय सरकार को सौंपी रिपोर्ट में सुझाव दिए कि फसलों के एमएसपी  फसल पैदा करने में आई लागत में 50 फीसदी मार्जन मनी जोड़ कर निर्धारित की जानी चाहिए, किसानों की फसलों व पशुओं का बीमा होना चाहिए, किसानों के लिए पैनश्न स्कीम लागू करनी चाहिए, किसानों को 4 प्रतिशत की ब्याज दर से लोन दिया जाए। सुखा,बाढ़ व कुदरती आपदा की स्थिति में किसानों का ब्याज माफ करने व उस समय तक कर्जे की किश्त पर रोक लगाई जाए जब तक किसान कर्जा वापिस करने के योग्य न हो सके। कुदरती आपदा  से हुए नुकसान की •ारपाई के लिए एग्रीकल्चर रिस्क फंड बनाया जाए। हरेक राज्य में किसानों की समस्याओं के हल के लिए अलग किसान कमीशन की स्थापना की जाए। उन्होंने कहा कि आठ वर्ष का लंबा समय बीत जाने के बावजूद •ाी केंद्र सरकार द्वारा डा.स्वामीनाथन की सिफारशें लागू नहंी की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2010 में हरियाणा के मुख्यमंत्री •ाूपिंदर सिंह हुड्डा के नेतृत्व में बनी वर्किंग ग्रुप आफ चीफ मनिस्टर आन एग्रीकल्चर प्रोडक्शन कमेटी ने •ाी स्वामीनाथन की रिपोर्ट लागू करने का सुझाव दिया था। मान ने कहा कि राजनीतिक पार्टिया चुनावों में किसानों की खुशहाली के लिए स्वामीनाथन की रिपोर्ट लागू करने के सबंध में बड़े-बड़े वायदे करती है,परन्तु सरकार बनने पर कोई कदम नहीं उठाया जाता। उन्होंने कहा कि संस्था की ओर से किसान बचाओ, देश बचाओ मुहिम चलाई गई है जिसके तहत संस्था के मैंबर गांवों में जाकर किसानों को डा एमएस स्वामीनाथन की सिफारशें से अवगत करवाएंगे।
उन्होंने कहा कि माननीय न्यायाधीश जस्टिस एचएल दत्तु,जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस अ•ाय मनोहर सपरे के आधारित बैंच ने
22 सितंबर को याचिका पर सुनवाई कर सरकार से एक माह के •ाीतर जवाब मांगा है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा जवाब देने के बाद वह अगली रुप रेखा तैयार करेंगे।