Monday, 6 October 2014

हरेक 32 मिंट बाद एक किसान करता है खुदकशी


2012 तक 1,46,373 किसानों ने की जीवन लीला समाप्त
सुप्रीम कोर्ट ने पीआईएल पर केंद्र सरकार से मांगा जवाब
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
देश में प्रत्येक 32 मिंट बाद एक किसान आत्म हत्या कर रहा है। आत्म हत्या की वार्षिक औसतन 16,263 किसान तथा 45 किसान रोजाना की है। यह दावा पंजाब की एनजीओ यूथ कमल आर्गेनाइजेशन पंजाब द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई एक जनहित पटिशन में किया गया है। आगेर्नाईजेश्न (रजि.) ने डा.एमएस स्वामीनाथन की प्रधानगी में बनाए कमीश्न की सिफारिशों को लागू करने के लिये जनहित पटीशन (पी.आई.एल) दायर की और सुप्रीम कोर्ट ने पटिशन पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को एक माह के •ाीतर जवाब देने के आदेश जारी किये है। कमल आर्गेनाइजेशन द्वारा जनहित याचिका दायर करने से एक तरह किसानों को उनकी फसलें के अधिक मूल्य मिलने का रास्ता साफ होता नजर आने लगा है,क्योंकि स•ाी किसान यूनियनें पहले ही सरकार पर स्वामीनाथन की सिफारश को लागू करने की मांग करती आ रही है।
आर्गेनाइजेशन के प्रधान गुरमीत सिंह मान ने सोमवार को पत्रकारवार्ता कहा कि देश की साठ प्रतिशत आबादी सीधे व असीधे रूप में  खेतीबाड़ी पर निर्•ार है और कर्जे से तंग आकर किसानों द्वारा खुदकुशी करने का रूझान बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्व केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री हरीश रावत ने 19 नवंबर 2011 में राज्य स•ाा में लिखत रूप में माना है कि वर्ष 1995 से 2011 तक 2,90,740 किसान कर्जे व गरीबी से तंग आकर अपनी जीवन लीला खत्म कर चुके हैं। जबकि नैश्नल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक 2004 से 2012 तक 1,46,373 किसानों ने कर्जे, गरीबी व मंदहाली से तंग आकर खुदकुशी की हैं। पटीश्न में कहा गया है कि किसानों की खुशहाली व उनका जीवन स्तर  उंचा उठाने के लिए नैश्नल कमीश्न आफ फामर्स की ओर से डा.एस.एम.स्वामीनाथन की प्रधानगी में बनाई कमेटी ने 2006 में केन्द्रीय सरकार को सौंपी रिपोर्ट में सुझाव दिए कि फसलों के एमएसपी  फसल पैदा करने में आई लागत में 50 फीसदी मार्जन मनी जोड़ कर निर्धारित की जानी चाहिए, किसानों की फसलों व पशुओं का बीमा होना चाहिए, किसानों के लिए पैनश्न स्कीम लागू करनी चाहिए, किसानों को 4 प्रतिशत की ब्याज दर से लोन दिया जाए। सुखा,बाढ़ व कुदरती आपदा की स्थिति में किसानों का ब्याज माफ करने व उस समय तक कर्जे की किश्त पर रोक लगाई जाए जब तक किसान कर्जा वापिस करने के योग्य न हो सके। कुदरती आपदा  से हुए नुकसान की •ारपाई के लिए एग्रीकल्चर रिस्क फंड बनाया जाए। हरेक राज्य में किसानों की समस्याओं के हल के लिए अलग किसान कमीशन की स्थापना की जाए। उन्होंने कहा कि आठ वर्ष का लंबा समय बीत जाने के बावजूद •ाी केंद्र सरकार द्वारा डा.स्वामीनाथन की सिफारशें लागू नहंी की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2010 में हरियाणा के मुख्यमंत्री •ाूपिंदर सिंह हुड्डा के नेतृत्व में बनी वर्किंग ग्रुप आफ चीफ मनिस्टर आन एग्रीकल्चर प्रोडक्शन कमेटी ने •ाी स्वामीनाथन की रिपोर्ट लागू करने का सुझाव दिया था। मान ने कहा कि राजनीतिक पार्टिया चुनावों में किसानों की खुशहाली के लिए स्वामीनाथन की रिपोर्ट लागू करने के सबंध में बड़े-बड़े वायदे करती है,परन्तु सरकार बनने पर कोई कदम नहीं उठाया जाता। उन्होंने कहा कि संस्था की ओर से किसान बचाओ, देश बचाओ मुहिम चलाई गई है जिसके तहत संस्था के मैंबर गांवों में जाकर किसानों को डा एमएस स्वामीनाथन की सिफारशें से अवगत करवाएंगे।
उन्होंने कहा कि माननीय न्यायाधीश जस्टिस एचएल दत्तु,जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस अ•ाय मनोहर सपरे के आधारित बैंच ने
22 सितंबर को याचिका पर सुनवाई कर सरकार से एक माह के •ाीतर जवाब मांगा है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा जवाब देने के बाद वह अगली रुप रेखा तैयार करेंगे।

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  1. 2012 तक 1,46,373 किसानों ने की जीवन लीला समाप्त

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