Friday, 3 July 2015

युवाओं को अंधकार में डोब रहे है नर्सिंग कालेज


नियमों के विपरीत चल रहे है छह दर्जन से अधिक कालेज
प्रदीप कासनी ने की विजिलेंस जांच की सिफारश
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
प्रदेश में छह दर्जन के करीब नर्सिंग कालेज कानून एवं नियमों को ताक पर रखकर  चल रहे है। नर्सिंग में विद्यार्थियों का भविष्य बनाने की बजाए यह युवाओं को अंधकार में डोब रहे है और तय फीसों से ज्यादा फीसे वसूल कर मोटी कमाई कर रहे है। इसका खुलासा वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रदीप कासनी ने अपनी एक रिपोर्ट में किया है। मेडिकल एजुकेशन व रिसचर्च के निर्देशक पद से ट्रांसफर होने से पहले प्रदीप कासनी ने सरकार को एक विशेष रिपोर्ट सौंपी है जिसमें नर्सिंग कालेजों को लेकर चल रहे गोरखधंधे की विजीलेंस जांच करवाने की सिफारश की गई है। एक तरफ नर्सिंग कालेजों के छात्र उनका रिजल्ट घोषित करने की मांग को लेकर  धरना प्रदर्शन कर रहे है वहीं दूसरी ओर वरिष्ठ अधिकारी प्रदीप कासनी ने सरकार को विजिलेंस जांच करवाने की सिफारश करते हुए रिपोर्ट सौंप दी है। इससे सरकार कसूती स्थिति में फंस गई है।
सबसे अहम बात यह है कि प्रदीप कासनी ने अपनी रिपोर्ट में सूबे में बनी मेडिकल काउंसिल के असिस्त्व पर ही सवाल खड़ा कर दिया है क्योंकि हरियाणा में मेडिकल काउंसिल पंजाब मेडिकल काउंसिल एक्ट के अनुसार चल रही है। उक्त एक्ट मुताबिक हरियाणा में चल रही मेडिकल काउंसिल की सभी गतिविधियां गलत है। क्योंकि पंजाब सरकार ने मेडिकल काउंसिल एक्ट 1934 में संशोधन कर लिया है परन्तु हरियाणा सरकार ने इसमें संशोधन तक नहीं किया। ऐसे में विद्यार्थियों की डिग्री को लेकर बड़ी कानूनी अड़चन पैदा हो सकती है। 
सूत्र बताते है कि प्रदीप कासनी ने अपनी रिपोर्ट में अंकित किया है कि प्रदेश में कई नर्सिंग कालेज ऐसे सामने आये है ,जो सिर्फ दो तीन कमरों में चल रहे है। यही नहीं कई नर्सिंग कालेजों की बिल्डिंग ने के नीचे कोई यूनियन का दफ्तर अथवा दुकान चल रही है ऊपरली बिल्डिंग में नर्सिंग कालेज चल रहा है।
वरिष्ठ अधिकारियों की भी मिलीभगत ------
सूत्र बताते है कि कई नर्सिंग कालेज सियासी नेताओं अथवा उनके सगे संबंधियों के है। सियासी नेताओं के अलावा स्टेट के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी अपने हाथ रंगे है। रिपोर्ट में ऐसे अधिकारियों के खिलाफ विजिलेंस जांच कर आय से अधिक संपति अर्जित करने को लेकर केस दर्ज करने की भी सिफारश की गई है। बताया जाता है कि अधिकारियों व कर्मचारियों ने नर्सिंग कालेज के मालिको,संचालकों से मोटी रकम वसूली है।
भले ही प्रदीप कासनी की रिपोर्ट पर अंतिम फैसला मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने लेना है परन्तु जिस ढंग से प्रदीप कासनी ने अपनी रिपोर्ट तैयार की है उससे नर्सिंग कालेजों में शिक्षा लेने वाले विद्यार्थियों के भविष्य पर भी सवालिया निशान लग गया है। अगर सरकार प्रदीप कासनी की रिपोर्ट मुताबिक जांच करवाती है तो सियासी नेताओं के साथ साथ कई वरिष्ठ अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है।

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