Friday, 26 June 2015

अब अनपढ़ नहीं बन सकेगा पंचायत सदस्य !


सरकार न्यूनतम शैक्षणिक योज्यता निरधारित करने पर कर रही है विचार
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
विधायक एवं सांसद बनने के लिये भले ही कोई शैक्षणिक योज्यता निरधारित नहीं है और राजनीति में रिटायरमेंट सीमा भी नहीं है। लेकिन  गांव का मुखिया यानी सरपंच व पंच बनने के लिये शैक्षिणक योज्यता लाजमी हो,यह बात किसी के हजम नहीं हो रही है। हां यह सच है कि हरियाणा सरकार पंचायत सदस्य बनने के लिये न्यूनतम शैक्षणिक योज्यता लाजमी करने के लिये ड्राफट तैयार कर रही है। यदि पंचायत चुनाव से पहले सरकार न्यूनतम योज्यता लाजमी कर देती है तो आगामी पंचायती चुनावों में पंचायत,जिला परिषद व ब्लाक समिति में कोई अंगूठा छाप मेंबर नहीं बनेगा।
मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश सरकार पंचायती सिस्टम में सुधार लाने के उदेश्य तहत सरपंच,पंच,ब्लाक समिति व जिला परिषद सदस्य की न्यूनतम योज्यता लागू करने के लिये ड्राफ्ट तैयार कर रही है और अंतिम मोहर मुख्यमंत्री की लगनी है। ग्रामीण विकास व पंचायती राज्य विभाग की ओर से गांव का मुखिया बनने के लिये आठवीं और पंचायत समिति व जिला परिषद का सदस्य बनने के लिये 10 पास को न्यूनतम योज्यता निरधारित करने को लेकर ड्राफट तैयार किया है। पंचायती राज्य विभाग की ओर से ड्राफ्ट मुख्यमंत्री को स्वीकृति के लिये भेज दिया गया है। अगर मुख्यमंत्री मोहर लगा देते है तो मंत्री मंडल से मंजूरी ली जाएगी। सूत्र बताते है कि 30 जून को मंत्री मंडल की मीटिंग होने की संभावना है और मंत्रीमंडल इस पर अपनी मोहर भी लगा सकता है। मंत्रीमंडल द्वारा मंजूरी देने के बाद फाइल राज्याल को नोटीफिकेशन के लिये भेजी जाएगी। राज्यपाल द्वारा हस्ताक्षर करने के बाद पंचायती राज्य अधिनियम की धारा 19 में संशोधन लागू हो जाएगा।
सूत्र बताते है कि सरकार शैक्षणिक योज्यता ही अनिवार्य नहीं कर रही। बल्कि विभिन्न केसों में सजा याफता,सरकारी प्रापर्टी पर कब्जा करने वाले,बैंक के डिफालटर अथवा जो बिजली चोरी इत्यादि मामलें में भी फंसे है उन पर भी सिकंजा कसना चाहती है और उनके राजनीति में प्रवेश पर अंकुश लगाना चाहती। इसलिये सरकार निचले स्तर पर साफ छवि वाले लोगों को राजनीति में लाना चाहती है ताकि निचले स्तर से ऊपर तक भ्रष्टाचार को खत्म किया जा सके। सरकार ऐसा कदम उठाकर यह संदेश भी देना चाहती है कि पढ़े लिखे लोग ही राजनीति में आए क्योंकि अनपढ़ लोग अफसरशाही द्वारा लिखी नोटिंग को पढ़ नहीं सकते और अफसरशाही अनपढ़ पंचायत सदस्य का नजायज फायदा भी उठाती है।
 अब देखना होगा कि सरकार इस ड्राफ्ट को मंजूरी देती है या नहीं और सरकार की इस नीति को गांव के लोग हजम करेंगे या नहीं।

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