Thursday, 16 July 2015

केंद्रीय मंत्री चौधरी वरिंदर सिंह डिफाल्टर घोषित

घर बनाने,कार खरीदने को लिया कर्जा वापिस न करने का आरोप
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
करीब चार दशकों से राजनीति कर रहे वरिष्ठ नेता एवं केंद्रीय मंत्री चौधरी वरिंदर सिंह ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उन्हें अपनी ही सरकार में अपमानित होना पड़ सकता है। देश के ग्रामीण विकास व पंचायती विभाग के मंत्री और पांच बार हरियाणा विधान सभा में हरियाणा की प्रतिनिधित्व करने वाले चौधरी वरिंदर सिंह को हरियाणा विधान सभा ने डिफाल्टर घोषित कर दिया है। चौधरी पर करीब 35 लाख रुपये का ऋण न चुकाने का आरोप है। जिसकी वजह से विधान सभा ने यह फैसला लिया है। विधान सभा के सूत्रों मुताबिक चौधरी वरिंदर सिंह ने कार खरीदने एवं हाउस बनाने के लिये करीब 35 लाख रुपये ऋण लिया था। जानकारी अनुसार चौधरी वरिंदर सिंह ने घर बनाने के लिये दो बार 12.50 लाख रुपये का कर्जा लिया। इसके अलावा दस लाख रुपये कार खरीदने के लिये अलग से कर्जा लिया था।  बकाया ऋण का भुगतान करने के लिये विधान सभा कार्यलय की तरफ से चौधरी वरिंदर सिंह को तीन-चार बार नोटिस भेजे गये परन्तु उन्होंने नोटिस को गंभीरता से नहीं लिया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केंद्र और हरियाणा में भाजपा की सरकार है। अपनी ही सरकार में एक केंद्रीय मंत्री के खिलाफ इतना बढ़ा फैसला लेना हैरानीजनक है। इसलिये विधान सभा कार्यलय ने कर्जा की अदायगी न करने पर उन्हें डिफाल्टर घोषित किया है।
ओर विधायकों ने भी ले रखा है कर्जा:
विधान सभा के विश्वनियता सूत्रों का कहना है कि बहुत सारे मौजूदा व पूर्व विधायकों ने भी कर्जा ले रखा है। परन्तु उनके कर्जा का भुगतान उन्हें दी जाती पैंशन से काट लिया जाता है। चौधरी वरिंदर सिंह सांसद बन गये और सांसद चुने जाने पर नियमों मुताबिक उन्हें विधान सभा से पैंशन नहीं दी जाती। जिसकी वजह से उनके बकाया राशि का भुगतान रूक गया था।
यह है राजनीतिक कैरियर :
चौधरी वरिंदर सिंह बीते 38 सालों से राजनीति की दुनिया में है। चौधरी को पांच बार हरियाणा के लोगों ने विधान सभा में भेजा है और दो बार वह सांसद और एक बार राज्य सभा सदस्य रहे है। जानकारी के अनुसार वह पहली बार 1977 में विधायक चुने गये थे। इसके बाद 1982 से 84 तक,1994-96 तक,1996 से 2000 तक और 2005 से 2009 तक विधायक रहे। वह हरियाणा के कैबेनिट मंत्री भी रहे है। इसी तरह दो बार हिसार संसदीय क्षेत्र से सांसद चुने गये। किन्तु पूर्व मुख्यमंत्री भुपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ सबंध अच्छे न होने के चलते उन्होंने कांग्रेस का हाथ छोडक़र भाजपा का दामन थाम लिया था।

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