Wednesday, 8 July 2015

कई मायने रखता है मुख्यमंत्री का बस सफर

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धरातल की समस्याएं और लोगों की नब्ज टटोल रहे है सीएम
बस में सीएम के साथ साथ -----
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा सरकारी वाल्वो बस में सफर करना कोई छोटी मोटी बात नहीं है। भले ही विपक्ष इसे सियासत से जोडक़र देख  रहा हो और अफसरशाही को भी यह अटपटा लगता हो। पर मुख्यमंत्री के सरकारी बस में सफर करने के कई मायने है। मुख्यमंत्री ने स्वयं पहल कर सरकार में शामिल अन्य मंत्रियों,विधायकों एवं अफसरशाही को भी यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह देश व सूबे के हित के लिये सरकारी खर्च पर कटौती करे।
बिलकुल सादगी,बिना ला लश्कर,बिना कोई सुरक्षाकर्मी जहां तक कि पायलट के बिना बुधवार को सुबह चंडीगढ़ से करनाल तक करीबन ढाई घंटे तक बस सफर किया। बसे में सफर दौरान ऐसा प्रतीत हो रहा था कि मानों कि बस में सूबे का मुखिया सीएम नहीं आम लोग ही सफर कर रहे है। मुख्यमंत्री ने जहां एक एक कर यात्रियों से मुलाकात कर उनका हालचाल पूछा वहीं उनसे सूबे की स्थिति को लेकर मन की बात पूछी। यही नहीं जिसने मुख्यमंत्री को किसी समस्या से अवगत करवाया तो मुख्यमंत्री ने उसी से समाधान करने का तरीका भी पूछा। इसके अलावा प्रदेश व केंद्र सरकार की कार्यशैली को लेकर भी लोगों से बातचीत की।
बस में सफर करने को लेकर पूछे सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके पास आज समय था। इसलिये उन्होंने बस में सफर करने को पहल दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह जहाज में सफर करते है तो उन्होंने सोचा कि आज बस में सफर किया जाए। यदि सडक़ मार्ग जाते है तो रोड पर बहुत सुरक्षा लगती है। ऐसे में लोगों को भी परेशानी होती है।
क्या भविष्य में भी बस में सफर जारी रखेंगे ,इसके जवाब में उन्होंने कहा कि जब उन्हें फ्री समय मिलेगा तो वह ऐसे ही बस में सफर करेंगे।  वाल्वो बस की जगह साधारण बस और ग्रामीण एरिया को क्यों नहीं चुना तो उन्होंने बताया कि आज उनका करनाल में प्रोग्राम था। भविष्य में ग्रामीण एरिया में साधारण बसों में भी सफर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दिनों दिन ट्रेफिक बढ़ रही है। ऐसे में लोगों को बसों व रेलों में सफर करने को पहल देनी चाहिये। इससे देश व सूबे की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी और सडक़ों पर ट्रेफिक कम होगी व प्रदूषण भी कम होगा। कुल मिलाकर मुख्यमंत्री ने बस में सफर कर सूबे की ब्यूरोक्रेसी, राजनीतिज्ञों को साधारण जिंदगी बसर करने और सरकारी खर्च पर कटौती करने का मैसेज देने की कोशिश की है।  जैसे पौधारोपण करने के बाद इसकी छाया कई सालों बाद मिलती है ठीक उसी तरह मुख्यमंत्री के प्रयास का असर आने वाले समय में देखने को मिलेगा।
बाक्स --
वई झूठ न बोला हम तो सिफराश से लगा.......
जिस बस में सीएम ने सफर किया उसके टायर की चंडीगढ़ से चलते वक्त ही टूटी टूट गई थी। जिसके चलते टायर बदलने के लिये बस चालक  बस को रोडवेज वर्कशाप ले गये। वर्कशाप में कूड़ा कक्र्ट होने और टायर,ट्यूब व अन्य समान इधर उधर बिखड़ा होने पर मुख्यमंत्री ने  चेहरे पर कोई गुस्सा नहीं दिखा। मुख्यमंत्री ने रोडवेज अधिकारी को पूछा कि आप घर में भी ऐसे कूड़ा कक्र्ट रखते है तो अधिकारी ने जवाब दिया नहीं। मुख्यमंत्री ने प्यार से समझाया कि जब घर में सफाई रखते है तो जहां भी रखा करो। यह भी आपका घर है। इसी दौरान मुख्यमंत्री ने परिचालको को पूछा कि सबसे बड़ी समस्या क्या है तो एक परिचालक ने कहा कि उन्हें अपने पास दो-ढाई सौ रुपये रखने की अनुमति है जबकि सुबह पहले टाइम पर बस चलाने समय खुले पैसे न होने पर काफी परेशानी आती है ऐसे में दो तीन हजार रुपये कैश रखने की अनुमति चाहिये। इसी दौरान कर्मचारियों ने ओर भर्ती व बसे डालने की भी मांग की। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार एक हजार के करीब नई बसें डालने को लेकर काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने पूछा कि क्या आप सिफराश से लगे है कि अपने दम पर। तो एक कर्मचारी ने कहा कि वाई झूठ न बोला हम तो सिफराश से लगा। उसके परिजन की मौत हो गई थी जिसके चलते उन्हें नौकरी मिली है समझो सिफराश से ही नौकरी मिली।

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