ब्रांड एम्बेसडर की नियुक्ति से स्वास्थ्य मंत्री दुखी
मुख्यमंत्री को बताया जंगल का शेर
चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
बालीवुड अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा को बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम की ब्रांड एम्बेसडर नियुक्त करने से मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री अनिल विज के बीच मतभेद एक बार फिर उजागर हो गये है। हालांकि विज ने मुख्यमंत्री के साथ मतभेद होने की खबर को सिरे से नकारते हुए अपना मित्र बताया है। लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि भारतीय राजनीति में मुख्यमंत्री बाहुवली होता है तथा मुख्यमंत्री के पास पूरे अधिकार होते है और वह कुछ भी कर सकते है। परन्तु ब्रांड एम्बेसडर की नियुक्ती को लेकर उन्हें अथवा विभाग को कोई नॉलज नहीं है।
अनिल विज ने जहां मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की तुलना जंगल के शेर व मंत्रियों की तुलना आम आदमी से की वहीं यहां तक कह दिया कि उनका विभाग बेटी बचाओ मुहिम को चलाने में सक्षम है। विभाग में किसी भी ब्रांड एम्बेसडर की जरूरत नहीं है। ऐसे में बेची बचाओ बेटी पढ़ाओं प्रोग्राम को लांच करने के लिये 21 जुलाई को गड़गांव में स्थित प्रोग्राम में अनिल विज के शामिल होने पर भी असमंसज पैदा हो गया है।
शुक्रवार को अपने कार्यलय में कुछ चुनिंदा पत्रकारों से बातचीत दौरान कहा कि उन्हें बीते रात सोशल मीडिया में हरियाणा सरकार द्वारा ब्रांड एम्बेसडर नियुक्त करने की खबरों से यह जानकारी मिली थी। विज ने कहा कि ब्रांड एम्बेसडर को लेकर कभी भी विभाग में चर्चा नहीं हुई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने कल उनसे 21 तारीख को प्रोग्राम होने और फरी रहने की बात कही थी परन्तु इस बारे कोई बातचीत नहीं हुई। उन्होंने कहा कि बेटी बचाना स्वास्थ्य विभाग और बेटी पढ़ाना शिक्षा विभाग का काम है और दोनों विभागों को इस बारे कोई जानकारी नहीं है। विज ने कहा कि विभाग के डाक्टरों की मेहनत कारण पीएनडीटी एक्ट को सख्ती से लागू किया जा रहा है और लिंग अनुपात का आंकड़ा बढ़ा है और नाचने गाने से बेटी नहीं बचने लगी। बता दें कि हरियाणा सरकार ने गुरूवार को बालीवुड अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा को स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को बिना भरोसे में लिये ब्रांड एम्बेसडर नियुक्त कर दिया। जिससे अनिल विज विभाग में दखल अंदाजी से क्रोधित हो गये।
प्रत्येक जिले में होंगे 44 कोच भर्ती ---
अनिल विज ने कहा कि खेल विभाग में बड़ी तबदीली की जा रही है और खेल नीति तहत भर्ती किये गये खिलाड़ियों को लेकर कानूनी विचार विमर्श किया जा रहा और ऐसा निमय बनाया जा रहा है कि खेल कोटे से भर्ती होने पर खिलाड़ी न्यूनतम छह साल तक खेलें या फिर खेल मैदान में खिलाड़ियों को ट्रेनिंग दे। उन्होंने कहा कि जल्द ही प्रदेश में 624 कोचों की भर्ती की जा रही है और इस वक्त 414 कोच है। इसी के साथ सभी जिलों में खेलों को बढ़ावा देने के लिये रैसेलाइजेशन किया जा रहा है। उन्होंने खुलासा करते हुए बताया कि कई जिलों में ऐसे कोच तैनात है जहां उस खेल का कोई खिलाड़ी भी नहीं है।
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