Saturday, 3 January 2015

प्रकाश करत की रहबरी पर येचुरी ने खड़ा किया स्वाल


चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
 इधर उधर की बात न कर,बता कारवां क्यों लूटा
        हमें रहज़नों से गरजÞ नहीं ,तेरी रहबरी का स्वाल है ।
कम्यूनिस्टों का  काफिला क्यों लूटा,कौन किसे क्या पूछ  रहा है। किसको किससे गरज़ नहीं है और किसकी रहबरी का स्वाल बना हुआ है। यह कुछ ऐसे सवाल है जो अर्श से फर्श पर आ चुकी मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी के हर स्तर के नेता को स्ता रहा रहा है।
क्योंकि पार्टी का जनाधार ही अपने न्यूनतम स्तर पर नहीं आया बल्कि पार्टी नेतृत्व की आंतरिक कलह •ाी अपने शिखर पर पहुंच गई है। लोक स•ाा चुनाव में हुई सबसे बुरी हार के लिये पार्टी द्वारा किये गये राजनीतिक दावपेच की समीक्षा दौरान महासचिव प्रकाश करत ने जहां 1978 से चल रही पार्टी नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है वहीं पोलिट ब्यूरो मेंबर सीता राम येचुरी ने प्रकाश करत की लीडरशिप पर सवाल खड़ा किया है। ऐसे में पार्टी का •ाीतर  कलह जगजाहिर हो गया है।
सीता राम येचुरी ने सौलह पेज के अपने जवाब में लीडरशिप पर सवालिया निशान लगाते हुए स्टालिन का हवाला देते हुए कहा कि यदि राजनीतिक समझ 100 प्रतिशत सही •ाी है पर जब तक पार्टी के पास जत्थेबंदी नहीं जो लोगों तक जाने में सक्षम न हो तो राजनीतिक सूझबूझ •ाी बेकार है। येचुरी मुताबिक हम (वामपंथी) जनतक पार्टी बनने और इंकलाबी पार्टी बनने से  कोसो दूर है और गलतियों को बार बार दोहराया जा रहा है। पार्टी में गुटबाजी का अंदाजा इस बात से •ाी लगाया जा सकता है कि येचुरी ने स्पष्ट लिखा है कि गुटबाजी पार्टी के संगठन को खोरा लगा रही है। जब तक संगठनात्मक कमोजरी,गलतियों व दावपेच को स्वीकार नहीं करते तब तक पार्टी हमदर्दों में •ारोसा पैदा नहीं कर सकते और यह गलतियां लगातार की जा रही है।
सीता राम का कहना है कि 20वीं कांग्रेस में पार्टी के विस्तार को याचने के लिये बनाई कसौटी अनुसार पार्टी में आई गिरवाट मुख्य तौर पर पार्टी की चुनावीं कार्यशैली तक सीमत है। उनके अनुसार 1967 में पार्टी ने पहली बार लोक स•ाा चुनाव लड़ा और पार्टी सदस्यों की संख्या 19 थी और 2009 में यह कम होकर 16 रह गई। इसके बाद 2014  के चुनाव में सांसद में सीटों के साथ साथ वोट प्रतिशत •ाी कम हो गई है। यही नहीं 2004 में पार्टी 13 राज्यों की विधान स•ाा में प्रतिनिधित्व कर रही थी जो कि आज आठ राज्यों तक सीमत रह गयी है जबकि चार राज्यों में मात्र एक विधायक है।
राजनीतिक दावपेच केडर बारे नीति:
सीता राम ने पार्टी की ताकत बढ़ाने के लिये अतीत में की गलतियों की पड़ताल करने की है। इसी तरह जब तक कुलवक्ती (फुलटाइम कार्यकर्ता) को पार्टी के सहयोगी संगठन सीटू द्वारा न्यूनतम वेतन देने की मांग अनुसार न्यूनतम वेतन नहीं देते तब तक पार्टी के काम में सुधार करना असं•ाव है। इससे यह बात •ाी स्पष्ट हो गई है कि सीटू द्वारा वर्करों की मांगों को लेकर संघर्ष किया जाता है लेकिन पार्टी व संगठन में इन मुद्दों के लिये कोई स्थान नहीं है। सीता राम अनुसार उन्होंने 19 जून 2009 को •ाी पोलिय ब्यूरो को नोेट दिया परन्तु इसे गं•ाीर बहस के योग्य नहीं समझा था। बता दें कि पार्टी की 21 वीं  कांग्रेस अप्रैल -मई 2015 में होने वाली है। पार्टी के लिये सबसे बुरी खबर यह •ाी है कि पश्चिम बंगाल जहां पार्टी ने लगातार 34 वर्ष तक शासन किया है ,में •ाी पांव नहीं लगे रहे बल्कि पार्टी कार्यकर्ता का रूझान त्रिमुल कांग्रेस की ओर बढ़ता जा रहा है। ऐसे में  पार्टी •ाविष्य में गुटबाजी से निकल पायेगी यह आने वाला समय ही बताएगा।

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