Tuesday, 18 November 2014

पंजाब सरकार ने की गन्ने के मूल्य में मात्र पांच रुपये प्रति क्विवंटल वृद्धि


चंडीगढ़ : जय सिंह छिब्बर
किसानों की मसीहा कहलाने वाली पंथक सरकार ने गन्ने के दाम में मात्र पांच रुपये की वृद्धि की है। वह •ाी उस वक्त जब सरकार किसानों को धान-गेहूं के फसली चक्कर से बाहर आने के लिये प्रेरित कर रही है। आश्चर्य की बात यह है कि मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल फसलों के दाम बढ़ाने को लेकर अकसर केंद्र सरकार को कोसते रहते है।  परन्तु अब पंथक सरकार ने मात्र पांच रुपये की बढ़ोतरी कर एक तरह किसानों के साथ मजाक ही किया है। सरकार को इस फैसले से विपक्ष की आलोचना का शिकार होना पड़ सकता है। सबसे अहम बात यह है कि गन्ना इंडस्ट्री पर पहले ही खतरे के बादल मंडरा रहे है और सरकार की उदासीनता के चलते किसानों ने गन्ने की बीजाई कम कर दी है।
मुख्यमंत्री कार्यालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने इस संबंधी फाइल पर सुबह हस्ताक्षर कर दिए हैं।
जिक्रयोग्य है कि राज्य सरकार में वर्ष 2013-14 पिड़ाई सीजन दौरान गन्ने की आगामी, दरमियानी और पिछली किस्म का मूल्य क्रमश: 290 रुपये, 280 रुपये, 275 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था। राज्य सरकार के मौजूदा फैसले से वर्ष 2014-15 के पिड़ाई सीजन दौरान गन्ने की आगामी, दरमियानी और पिछली किस्म का मूल्य अब क्रमश: 295 रुपये, 285 रुपये, 280 रुपये प्रति क्विंटल होगा।
बता दें कि वित्तीय वर्ष दौरान प्रदेश में 53264 हैक्टेयर रकबा गन्ने की फसल अधीन है। साल 2012-13 दौरान 51427 हैक्टेयर रकबा था और शूगर मिलों ने 161.72 लाख क्विंटल गन्ने की पिराई की थी और इस साल 169.50 लाख क्विंटल गन्ने की पिराई करने का लक्ष्य रखा गया है। यदि पिछले एक दशक की बात करें तो किसानों का गन्ने की बिजाई करने से मोह •ांग हो गया था क्योंकि कर्जा के बोझ नीचे दबी शूगर मिले किसानों को गन्ने की अदायगी सही समय नहीं कर सकी। किसानों को गन्ने की पेमेंट लेने के लिये धरना प्रदर्शन,सड़कों तक उतरना पड़ा था। वर्ष 2008-09 दौरान प्रदेश में 85.48 लाख हेक्टेयर रकबे में गन्ने की बिजाई की गई थी और 2009-10 दौरान रकबा कम होकर 53.29 लाख हैक्टेयर रह गया।

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