1700 करोड़ के बिल, अंतरिम राहत के 600 करोड़ जुटाना हुआ मुश्किल
26000 कच्चे कर्मियों को पक्का करने को भी चाहिए 7000 करोड़
पंजाब की नई सरकार को बिजली पर भी देनी होगी बढ़ी हुई सब्सिडी
चंडीगढ़। पंजाब में अगली सरकार किस सियासी पार्टी की बनेगी, इस विषय पर चर्चा आगामी 11 मार्च को मतगणना के समय तक जारी रहेगी। लेकिन प्रदेश की वित्तीय हालत लगातार चिंताजनक बनती जा रही है। बाजार से कर्ज उठाने की समयसीमा बीत जाने के बाद इस समय सरकारी खजाने में कर्मचारियों-अफसरों के 1700 करोड़ रुपये के बिल तो अटक ही गए हैं, वहीं सरकार द्वारा कर्मचारियों को 5 फीसदी अंतरिम राहत देने की घोषणा पर अमल करने के लिए भी करीब 600 करोड़ रुपये की जरूरत है। प्रदेश में आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण सरकार फिलहाल कर्मचारियों-अफसरों का फरवरी-मार्च माह का वेतन जुटाए रखने को ही प्राथमिकता दे रही है।
इस बीच प्रदेश के ठेका कर्मचारियों द्वारा पक्के किए जाने की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरु कर दी गई है। राज्य सरकार ने विधानसभा चुनाव से ऐन पहले 26000 कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने के लिए 'पंजाब एडहॉक, ठेका, डेलीवेज, टेम्परेरी, वर्कचार्ज व आउट सोर्स कर्मचारी वेलफेयर एक्ट 2016' बिल पारित किया था। हालांकि इन कर्मचारियों को पक्का करते हुए अगले तीन साल तक केवल बेसिक वेतन ही दिया जाना था। प्रदेश सरकार ने गत 5 जनवरी को सभी विभागों को पत्र लिखकर पक्के किए जाने वाले कर्मचारियों की सूची भी मंगा ली थी लेकिन चुनाव आचार संहिता लागू होते ही सरकार के इस फैसले पर अमल नहीं हो सका। अब ऐसे ही एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि कच्चे कर्मचारियों को भी समान वेतन के तहत नियमित कर्मचारियों के बराबर वेतन दिया जाए। कच्चे कर्मचारियों की भूख हड़ताल और सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था को देखते हुए पंजाब सरकार के अधिकारियों ने आनन-फानन में 'पंजाब एडहॉक, ठेका, डेलीवेज, टेम्परेरी, वर्कचार्ज व आउट सोर्स कर्मचारी वेलफेयर एक्ट 2016' को लागू करने के लिए अपनी तरफ से तैयारी को अंतिम रूप देना शुरु कर दिया है। इसके तहत मंगलवार को सभी सरकारी विभागों को पत्र लिखकर अपने कच्चे कर्मचारियों का ब्योरा पर्सोनल विभाग को देने के निर्देश जारी किए गए हैं।
सरकार के अफसरों की इस तेजी का एक कारण यह भी माना जा रहा है कि मौजूदा सरकार का कार्यकाल आगामी 18 मार्च तक है और 11 मार्च को मतगणना के बाद नई सरकार का गठन तय समय पर ही हो जाएगा। नई सरकार के सामने सबसे पहला मुद्दा 26000 कच्चे कर्मचारियों का ही आएगा, जिसके लिए यदि समान वेतन का नियम लागू किया गया तो सरकार को करीब 7000 करोड़ रुपये की जरुरत होगी। वहीं, बिजली सब्सिडी का मामला भी नई सरकार का स्वागत करने को तैयार है। पंजाब में इस सरकार के कार्यकाल में बिजली पर सब्सिडी 6463 करोड़ रुपये थी जो अब बढ़कर 8000 करोड़ रुपये हो जाएगी। यानी, नई सरकार को प्रदेश का खाली खजाना मुंह चिढ़ाता हुआ मिल सकता है।
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